"रिश्ता तू बना ले श्याम से" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी श्याम भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बागड़ा जी ने अपनी मधुर आवाज में गाया है। यह भजन भगवान खाटू श्याम (बर्बरीक) के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और अनन्य भक्ति भाव को दर्शाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'समर्पण' और 'सच्चा सखा भाव' है। सांसारिक रिश्तों की नश्वरता और भगवान के साथ बने अलौकिक रिश्ते की अमरता को यह भजन बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है। जब मनुष्य संसार की मोह-माया और झूठे रिश्तों से थक जाता है, तब खाटू नरेश का द्वार ही उसे सच्चा संबल और शांति प्रदान करता है। इस भजन को विशेष रूप से एकादशी, द्वादशी, श्याम संकीर्तन, और दैनिक पूजा के समय गाया जाता है। यह भजन भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि चाहे पूरी दुनिया साथ छोड़ दे, लेकिन 'हारे का सहारा' बाबा श्याम कभी अपने भक्त का हाथ नहीं छोड़ते।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
रिश्ता तू बना ले श्याम से
(Rishta Tu Banale Shyam Se Lyrics in Hindi)
रिश्ता तू बना ले श्याम से,
तेरे हर दुःख में हर सुख में, यही काम आएगा,
रिश्ता तू बना ले श्याम से, आराम पाएगा।।
[अंतरा - 1]
ये ऐसा सच्चा साथी, हर दुःख में साथ निभाए,
इस जग में हार गया जो, उसे बढ़कर गले लगाए,
जब ठुकरा देगी दुनिया, यही साथ आएगा,
रिश्ता तू बना ले श्याम से, आराम पाएगा।।
[अंतरा - 2]
ये एहलवती का लाल, हारे का बना सहारा,
दिया शीश दान नटवर को, पर माँ का वचन न टाला,
तिहुँ लोक में ऐसा दानी, ना कोई और पाएगा,
रिश्ता तू बना ले श्याम से, आराम पाएगा।।
[अंतरा - 3]
श्री कृष्णा का हाल ना पूछो, किया कैसा छल ये हाये,
झर झर बहते थे आंसू, बस इतना ही कह पाए,
मेरे नाम से तू कलयुग में, पहचाना जाएगा,
रिश्ता तू बना ले श्याम से, आराम पाएगा।।
[अंतरा - 4]
खाटू में जो भी आता, मेरे श्याम से नज़र मिलाता,
वो श्याम दीवाना होकर, अपनी सुध-बुध है खो जाता,
जो शरण में इसकी आया, वो भव से तर जाएगा,
रिश्ता तू बना ले श्याम से, आराम पाएगा।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक रिश्ते अस्थायी और स्वार्थ पर आधारित होते हैं, जबकि भगवान खाटू श्याम से जुड़ा रिश्ता निस्वार्थ, शाश्वत और कल्याणकारी होता है। भक्त को प्रेरित करते हुए गीतकार कहते हैं कि हे मानव! तू इस नश्वर संसार के झूठे बंधनों को छोड़कर उस परमपिता परमेश्वर, खाटू नरेश श्याम से अपना नाता जोड़ ले। वह ऐसा सच्चा साथी है जो सुख में तो साथ रहता ही है, परंतु दुःख के समय सबसे पहले आकर खड़ा हो जाता है।
भजन के माध्यम से यह समझाया गया है कि जब व्यक्ति जीवन के संघर्षों से थककर हार जाता है और दुनिया उसे ठुकरा देती है, तब बाबा श्याम उसे अपनी बाहों में समेट लेते हैं। वे 'हारे का सहारा' हैं। महाभारत काल में बर्बरीक (श्याम बाबा) ने अपनी माता के वचन की रक्षा के लिए अपना शीश दान कर दिया था। उनके इस महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे। इसलिए, उनसे रिश्ता बनाने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं लौटता और अंततः मोक्ष व परम शांति को प्राप्त करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- समर्पण भाव की पराकाष्ठा: यह भजन भक्त को भगवान के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण करने की प्रेरणा देता है।
- सांसारिक सत्य का प्रकटीकरण: भजन में स्पष्ट किया गया है कि सांसारिक संबंध समय आने पर टूट सकते हैं, लेकिन ईश्वर का साथ सदैव बना रहता है।
- ऐतिहासिक एवं पौराणिक संदर्भ: इसमें बर्बरीक के शीश दान और श्री कृष्ण द्वारा दिए गए वरदान का सुंदर चित्रण है।
- मानसिक शांति का स्रोत: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से अशांत मन को असीम शांति और संबल मिलता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन को गाने और सुनने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:
- एकादशी और द्वादशी: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्याम संकीर्तन में इस भजन को गाना विशेष फलदायी होता है।
- संध्या आरती के समय: घर या मंदिर में संध्या पूजन के समय इस भजन का गायन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
- गायन की विधि: इस भजन को पूर्ण श्रद्धा, शांत मन और करताल या मंजीरे की थाप पर सामूहिक रूप से गाना चाहिए। गाते समय मन में यह भाव होना चाहिए कि हम साक्षात बाबा श्याम के सम्मुख बैठकर उनसे प्रार्थना कर रहे हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। वे महान धनुर्धर थे और उनके पास तीन अमोघ बाण थे। महाभारत युद्ध के समय उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि वे हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे। भगवान श्री कृष्ण ने सृष्टि के कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया। इस महान बलिदान से द्रवित होकर श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने ही नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया। आज राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम भक्तों की आस्था का एक महान केंद्र है, जहाँ लाखों भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस सुंदर भजन के रचनाकार अमन जी हैं और इसे संगीत से सजाया है प्रवीण बेदी जी ने। इस भजन को अपनी जादुई और भावपूर्ण आवाज से जीवंत करने का श्रेय सुप्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बागड़ा जी को जाता है। यह भजन 'कीर्तन की है रात' एल्बम से लिया गया है, जिसे 'युकी' (Yuki) लेबल के अंतर्गत जारी किया गया था। इस भजन की तर्ज प्रसिद्ध हिंदी फिल्मी गीत "दिल दीवाने का डोला" पर आधारित है, जिससे यह श्रोताओं के बीच बहुत जल्दी लोकप्रिय हो गया।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली गेय (गाने योग्य) है। इसमें करुण और शांत रस का अद्भुत समन्वय है। 'एहलवती का लाल', 'हारे का सहारा', और 'शीश दानी' जैसे विशेषणों का प्रयोग करके कवि ने बाबा श्याम के स्वरूप और उनके चरित्र को बहुत ही सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अटूट विश्वास: जीवन में चाहे कितनी भी विकट परिस्थितियां आएं, ईश्वर पर विश्वास कभी डगमगाना नहीं चाहिए।
- निस्वार्थ सेवा और दान: बर्बरीक के शीश दान से हमें त्याग और माता-पिता के वचनों के पालन की सीख मिलती है।
- अहंकार का त्याग: जब हम भगवान के सामने अपनी हार स्वीकार कर लेते हैं, तभी वे हमें अपनी शरण में लेते हैं।
- सच्चा मित्र ईश्वर है: संसार के लोग सुख के साथी हो सकते हैं, परंतु ईश्वर ही एकमात्र ऐसा मित्र है जो दुःख में सबसे पहले खड़ा होता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | भजन के संदर्भ में महत्व |
|---|---|---|
| एहलवती का लाल | माता अहिलावती के पुत्र (बर्बरीक) | श्याम बाबा के मातृ-भक्ति भाव को दर्शाता है। |
| शीश दान | सिर का दान करना | बर्बरीक द्वारा श्री कृष्ण को अपना सिर दान करने का प्रसंग। |
| नटवर | भगवान श्री कृष्ण | श्री कृष्ण के लीलाधर रूप का संकेत। |
| तिहुँ लोक | तीनों लोक (आकाश, पाताल, पृथ्वी) | श्याम बाबा की महिमा तीनों लोकों में व्याप्त है। |
| भव से तरना | संसार रूपी सागर को पार करना | मोक्ष या मुक्ति प्राप्त करना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"रिश्ता तू बना ले श्याम से, तेरे हर दुःख में हर सुख में, यही काम आएगा..."
कवि कहते हैं कि हे मनुष्य! तू भगवान श्याम से अपना नाता जोड़ ले। जीवन के उतार-चढ़ाव में, चाहे सुख हो या दुःख, केवल वही तेरे सच्चे सहायक सिद्ध होंगे।
"ये ऐसा सच्चा साथी, हर दुःख में साथ निभाए, इस जग में हार गया जो, उसे बढ़कर गले लगाए..."
संसार के लोग केवल सफलता के साथी होते हैं, लेकिन बाबा श्याम हारे हुए और निराश लोगों को सहारा देते हैं और उन्हें गले लगाते हैं।
"ये एहलवती का लाल, हारे का बना सहारा, दिया शीश दान नटवर को, पर माँ का वचन न टाला..."
माता अहिलावती के पुत्र बर्बरीक ने अपनी माता को दिए वचन (हारे का साथ देने) का पालन किया और भगवान श्री कृष्ण के मांगने पर अपना शीश दान कर दिया।
"श्री कृष्णा का हाल ना पूछो, किया कैसा छल ये हाये, झर झर बहते थे आंसू, बस इतना ही कह पाए..."
जब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश मांगा, तो उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। वे बर्बरीक के इस महान त्याग से अत्यंत द्रवित थे और उन्होंने वरदान दिया कि तुम कलयुग में मेरे नाम से पूजे जाओगे।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्याम बाबा की आराधना करते समय निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥
॥ हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा ॥
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है:
"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | रिश्ता तू बना ले श्याम से (Rishta Tu Banale Shyam Se) |
| मुख्य देवता | भगवान खाटू श्याम (श्री कृष्ण) |
| गायक (Singer) | मुकेश बागड़ा (Mukesh Bagda) |
| गीतकार (Lyricist) | अमन (Aman) |
| संगीतकार (Music) | प्रवीण बेदी (Praveen Bedi) |
| भाषा | हिंदी (Hindi) |
| मुख्य भाव | समर्पण, सखा भाव, भक्ति रस |
| उपयुक्त अवसर | श्याम संकीर्तन, एकादशी, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वान संपादकों ने पाया कि यह भजन न केवल संगीतमय रूप से समृद्ध है, बल्कि इसमें कलयुग के सबसे जाग्रत देव खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य भक्ति का संदेश भी निहित है। भजन के प्रत्येक शब्द में समर्पण की भावना कूट-कूट कर भरी है, जो श्रोता के हृदय को सीधे ईश्वर से जोड़ती है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- महाभारत - वन पर्व (बर्बरीक की कथा और शीश दान का प्रसंग)
- श्रीमद्भगवद्गीता - शरणागति योग
- युकी म्यूजिक (Yuki Music) - आधिकारिक एल्बम 'कीर्तन की है रात'
- खाटू श्याम मंदिर ट्रस्ट, सीकर (राजस्थान) की पारंपरिक मान्यताएं
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