शिव शंकर डमरू वाले(Shiv Shankar Damru Wale Lyrics in Hindi) | Nisha Arora -
Song: शिव शंकर डमरू वाले(Shiv Shankar Damru Wale Lyrics in Hindi)
Singer: Nisha Arora (Kashipur) Uttrakhand
Music: Lovely Sharma
Lyricist: Dheeraj Saxena
Video: Manmeet Photgraphy
Category: Hindi Devotional (Shiv Bhajan)
Producers: Ramit Mathur
Label: Yuki
शिव शंकर डमरू वाले(Shiv Shankar Damru Wale Lyrics in Hindi):-
ॐ नमः शिवाय
शिव शंकर डमरू वाले
पीते हैं भंग के प्याले
देवों में देव निराले
है बाबा शमशानी
ये रचते खेल निराले, बाबा औघड़ दानी
शिव शंकर डमरू वाले ..........
लम्बी लम्बी जटाएं धारे रूप बड़ा अलबेला
भूत प्रेत बेताल का संग में रखते हर दम मेला
कैलाश पे रहने वाले ये तो हैं बर्फानी
ये रचते खेल निराले, बाबा औघड़ दानी
शिव शंकर डमरू वाले ..........
एक तो विषधर गले में उस पर है विष कंठ में धारे
थर थर कांपे देव असुर सब इनके क्रोध के मारे
कर्मी है त्रिशूल संभाले ये तो अन्तर्यामी
ये रचते खेल निराले, बाबा औघड़ दानी
शिव शंकर डमरू वाले ..........
धीरज धारी रहते हर दम व्याकुल कभी न होते
इनकी कृपा से सब भक्तों के वारे न्यारे होते
दीवाने और दिलवाले सब इनके हैं हंगामी
ये रचते खेल निराले, बाबा औघड़ दानी
शिव शंकर डमरू वाले ..........
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "शिव शंकर डमरू वाले(Shiv Shankar Damru Wale Lyrics in Hindi) | Nisha Arora - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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