Rani Sati Dadi Bhajan

तू चरणों में झुक जा तेरा हाथ पकड़ लेगी लिरिक्स (Tu charno me jhuk ja tera hath pakad legi Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan - Bhaktilok

135 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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रानी सती दादी का यह अत्यंत पावन भजन "तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी" शरणागति और अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह भजन उन भक्तों के लिए एक संजीवनी के समान है जो जीवन की चिंताओं, दुखों और सांसारिक उलझनों से घिरे हुए हैं। दादी की महिमा अपरंपार है और जो भक्त पूर्ण समर्पण के साथ उनके चरणों में नतमस्तक होता है, माँ स्वयं उसका हाथ थामकर उसे भवसागर से पार लगा देती हैं। इस भजन में निहित भाव 'अनन्य भक्ति' का है, जहाँ भक्त को केवल अपने आराध्य पर भरोसा रखने का संदेश दिया गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी।
तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी॥

दादी के चरणों में बैकुंठ समाया है,
जो झुका उसी ने ही सुख स्वर्ग का पाया है।
जन्नत की सब खुशियाँ झोली में भर देगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी॥

जिस घड़ी तू दादी के चरणों में झुक जाए,
माथे की सब चिंता चौखट पे चढ़ जाए।
माँ मुक्ति तुझे सारी चिंता से कर देगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी॥

चरणों की रज जिनके मस्तक पे लग जाती,
दादी की हरदम उन्हें किरपा ही मिल जाती।
स्वाती दुखड़े तेरे दादी जी हर लेगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव 'शरणागति' है। भक्त कहता है कि हे मन! तू व्यर्थ की चिंताओं में क्यों पड़ा है? यदि तू रानी सती दादी के चरणों में झुक जाए, तो वे स्वयं तेरा हाथ थाम लेंगी। जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चे को गिरने से बचाने के लिए उसका हाथ पकड़ लेती है, उसी प्रकार दादी अपने भक्तों को भक्ति की डोर में जकड़ लेती हैं ताकि वे कभी भटकें नहीं।

भजन की पंक्तियों में बताया गया है कि दादी के चरणों में ही बैकुंठ (स्वर्ग) का सुख है। जो भक्त अहंकार त्यागकर झुक जाता है, उसे स्वर्ग के सुख सहज ही प्राप्त हो जाते हैं। दादी की चौखट इतनी प्रभावशाली है कि वहाँ पहुँचते ही भक्त के माथे की सारी चिंताएँ मिट जाती हैं। माँ की कृपा से भक्त को मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। अंत में, चरणों की रज (धूल) का महत्व बताया गया है, जो मस्तक पर लगते ही भक्त को दादी की कृपा का पात्र बना देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'दास्य भाव' और 'वात्सल्य भाव' का मिश्रण है।
  • मानसिक शांति: नियमित श्रवण से तनाव और चिंता में कमी आती है।
  • शरणागति का संदेश: यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के सामने झुकना कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति है।
  • सांस्कृतिक महत्व: रानी सती दादी के भजनों में यह एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी रचना है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप दादी के किसी भी विशेष उत्सव, जैसे कि 'भादो अमावस्या' या 'दादी के मंगल पाठ' के दौरान गा सकते हैं। इसे सुबह की पूजा या संध्या आरती के समय सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते समय मन में दादी के स्वरूप का ध्यान रखें और दीपक जलाकर धूप-दीप अर्पित करें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
शरणागति पूर्ण समर्पण
बैकुंठ स्वर्ग लोक, परम धाम
रज चरणों की धूल
किरपा कृपा या आशीर्वाद
जकड़ लेना प्रेम की डोर में बांध लेना

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तू चरणों में झुक जा तेरा हाथ पकड़ लेगी
आराध्य श्री रानी सती दादी
मुख्य भाव शरणागति एवं भक्ति
भाषा हिंदी
श्रेणी रानी सती दादी भजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: रानी सती दादी के भजनों को सुनने का क्या लाभ है?
    उत्तर: दादी के भजनों को सुनने से मन को शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  2. प्रश्न: क्या यह भजन किसी विशेष दिन गाना चाहिए?
    उत्तर: इसे किसी भी दिन गाया जा सकता है, लेकिन अमावस्या के दिन इसका विशेष महत्व है।
  3. प्रश्न: दादी के चरणों की रज का क्या महत्व है?
    उत्तर: चरणों की रज को मस्तक पर लगाने से भक्त को दादी का आशीर्वाद और सुरक्षा प्राप्त होती है।
  4. प्रश्न: क्या मैं इस भजन को घर पर गा सकता हूँ?
    उत्तर: हाँ, आप इसे घर पर श्रद्धापूर्वक गा सकते हैं।
  5. प्रश्न: दादी की भक्ति का मुख्य संदेश क्या है?
    उत्तर: दादी की भक्ति का मुख्य संदेश 'अहंकार का त्याग' और 'पूर्ण विश्वास' है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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