चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja Lyrics in Hindi) -
चैती छठ सबसे प्राचीन छठ पर्व है, चैती छठ का अपना ही महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है, चैत्र महीने में पड़ने वाली छठ पूजा को चैती छठ के रूप में मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च या अप्रैल के महीने में होता है और दूसरा छठ त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक माह में अक्टूबर या नवंबर में। कार्तिक माह में पड़ने वाली छठ पूजा लोगों के बीच अधिक प्रसिद्ध है।
चैती छठ करने से शरीर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही परिवार की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। चैती छठ पर्व देश के कई हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में लोक आस्था का यह महापर्व बड़ी आस्था के साथ मनाया जाता है.
कार्तिक छठ पूजा:-
छठ पर्व या छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी से कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक मनाया जाने वाला चार दिवसीय लोक उत्सव है। यह त्यौहार दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है। छठ पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
छठ पूजा में सूर्य भगवान और छठी मैया की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। छठ वैदिक काल से भारत में मनाया जाने वाला बिहार का एक प्रसिद्ध त्योहार है। षष्ठी तिथि को मुख्य व्रत रखने के कारण ही इस पर्व को छठ कहा जाता है। इस दौरान भक्त लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे जल भी ग्रहण नहीं करते हैं.
संबंधित नाम - छठ पर्व, छठ, षष्ठी पूजा, चैती छठ
तिथि कार्तिक - चैत्र शुक्ल चतुर्थी से प्रारंभ होती है
कारण - सूर्य देव और छठी मैया की पूजा.
उत्सव - स्नान, सूर्य को अर्घ्य, भजन, कीर्तन, आरती, मेला।
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja Lyrics in Hindi) - Chhath Puja - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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