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गौरी सुत गणराज पधारो आके सारे काज सवारों (Gauri Sut Ganraj Padharo Lyrics in Hindi) - Tujhko Aana Hoga Ganesh Bhajan - Bhaktilok

173 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गौरी सुत गणराज पधारो आके सारे काज संवारो - परिचय एवं भक्ति भावना

भगवान श्री गणेश जी को हिंदू सनातन परंपरा में 'प्रथम पूज्य' का स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान, यज्ञ, विवाह, गृहप्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी का स्मरण और पूजन अनिवार्य माना गया है। प्रसिद्ध भजन "गौरी सुत गणराज पधारो आके सारे काज संवारो" (Gauri Sut Ganraj Padharo Lyrics in Hindi) भगवान गणेश के प्रति अगाध श्रद्धा, समर्पण और विनय का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भक्ति गीत है। इस भजन के माध्यम से भक्त माता पार्वती (गौरी) के नंदन गजानन को अपने जीवन के समस्त विघ्नों को दूर करने और कार्यों को सफल बनाने के लिए अत्यंत प्रेम और आर्त भाव से आमंत्रित करता है।

इस भजन को स्वर प्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बगड़ा (Mukesh Bagda) ने अपनी मधुर और भावपूर्ण वाणी से सजाया है, जबकि इसके भावपूर्ण बोल विनोद अग्रवाल (Vinod Agarwal) जी की कलम से निकले हैं और इसका संगीत संयोजन सूरज ने किया है। यह भजन देश-विदेश के गणेशोत्सव पंडालों, घरों में होने वाली गणेश पूजा और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ गाया जाता है। जब इस भजन की पंक्तियाँ गूंजती हैं, तो वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक और भक्तिमय हो जाता है, जिससे श्रोता के मन में भगवान गणेश के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा जागृत होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ गौरी सुत गणराज पधारो आके सारे काज संवारो ॥

गौरी सुत गणराज पधारो,
आके सारे काज संवारो।
तुझको आना होगा, तुझको आना होगा,
गौरी सुत गणराज पधारो ॥

सारे देवों में पहले तुझको मनाये,
तुहि दयालु सारे विघ्न हटाये।
फिर जाके प्यारे बाबा शिव के दुलारे,
दुःखड़ों से देवा हमको उबारो ॥
तुझको आना होगा, तुझको आना होगा...

रिद्धि-सिद्धि के दाता आप कहलाये,
कृपा दिखाओ बाबा गुण तेरे गाये।
भक्तों की नैया अब है तेरे सहारे,
अटकी कश्ती को आके पार उतरो ॥
तुझको आना होगा, तुझको आना होगा...

मलयगिरि चंदन का टीका लगाऊँ,
लड्डुओं का तेरे देवा भोग लगाऊँ।
हर्ष दीवाना तेरी बात निहारे,
मेरे भी अटके सारे काज सुधारो ॥
तुझको आना होगा, तुझको आना होगा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान गणेश के प्रति एक भक्त की सजीव पुकार है। भजन की हर एक पंक्ति में समर्पण की पराकाष्ठा और गणेश जी की महिमा का गुणगान किया गया है।

मुखड़ा (स्थायी): भक्त माता गौरी (पार्वती) के पुत्र गणेश जी से प्रार्थना करता है कि हे गणराज! आप हमारे घर और जीवन में पधारिए और हमारे सभी अटके हुए कार्यों को सुचारू रूप से पूर्ण कर दीजिए। भक्त का विश्वास इतना दृढ़ है कि वह कहता है कि हे प्रभु, आपको हमारे संकट दूर करने के लिए आना ही होगा।

प्रथम अंतरा: हिंदू धर्म में यह सनातन नियम है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। भक्त कहता है कि हम सभी देवताओं से पहले आपका ही पूजन करते हैं, क्योंकि आप ही समस्त दुखों और विघ्नों को हरने वाले दयालु देवता हैं। हे भगवान शिव और माता पार्वती के दुलारे नंदन, हमारे जीवन के इन भारी दुखों और संतापों से हमें बाहर निकालिए।

द्वितीय अंतरा: भगवान गणेश रिद्धि (बुद्धि और समृद्धि) और सिद्धि (सफलता और उपलब्धि) के प्रदाता हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि हे दाता, अपनी कृपा दृष्टि हम पर बरसाइए ताकि हम आपके गुणों का गान कर सकें। संसार रूपी सागर में भक्तों की जीवन रूपी नाव अब पूरी तरह आपके ही भरोसे है। हमारी यह अटकी हुई कश्ती (नाव) भवसागर से पार लगा दीजिए।

तृतीय अंतरा: भक्त भगवान गणेश के सत्कार और पूजन की अपनी भावना को व्यक्त करते हुए कहता है कि मैं मलय पर्वत के सुगंधित चंदन का तिलक आपके मस्तक पर लगाऊँगा और आपको आपके प्रिय मोदक (लड्डुओं) का भोग अर्पित करूँगा। भजन के रचयिता 'हर्ष' या भक्त अपनी स्थिति का वर्णन करते हुए कहता है कि वह आपकी राह निहार रहा है, अतः मेरे जीवन के भी सभी रुके हुए कार्यों को अपनी कृपा से सुधार दीजिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • प्रथम पूज्य का आह्वान: यह भजन भगवान गणेश को समर्पित है, जो किसी भी शुभ कार्य के आरंभ का प्रतीक हैं।
  • भक्ति और समर्पण का भाव: इसमें भक्त और भगवान के बीच एक आत्मीय संबंध और अटूट विश्वास को दर्शाया गया है।
  • रिद्धि-सिद्धि के दाता: गणेश जी को बुद्धि, विवेक, रिद्धि और सिद्धि का स्वामी माना गया है, जिसका सुंदर उल्लेख इस भजन में मिलता है।
  • पारिवारिक एवं सांस्कृतिक महत्व: यह भजन गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, विवाह समारोहों और किसी भी नए कार्य के आरंभ पर गाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को सुबह की पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान, या किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान और गणेशोत्सव के दिनों में गाया जा सकता है। इसे हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे के साथ सामूहिक रूप से गाने पर विशेष आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। प्रातः स्नान के पश्चात भगवान गणेश के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाकर इस भजन का स्मरण करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, उनके माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती, तथा उनकी दोनों देवियाँ रिद्धि और सिद्धि विराजमान हैं। इस भजन के गीतकार लोकप्रिय भजन सम्राट विनोद अग्रवाल जी हैं, जिन्होंने अपनी अद्भुत शैली से इसे भक्तों के कंठ तक पहुँचाया और स्वर दिया है जाने-माने गायक मुकेश बगड़ा ने।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन सम्राट विनोद अग्रवाल द्वारा रचित यह रचना उन तमाम भक्तों के लिए समर्पित है जो जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं। सूफी और भक्ति संगीत की मिठास समेटे हुए यह रचना श्रोता के मन को सीधे छू लेती है। इसका संगीत सूरज जी ने तैयार किया है, जो इसे और अधिक कर्णप्रिय बनाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (ब्रज और खड़ी बोली के सुंदर मिश्रण) भाषा में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और लयात्मकता का सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे यह बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अटल विश्वास: जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • विनम्रता और शरणागति: भक्त को हमेशा ईश्वर के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति स्वीकार करनी चाहिए।
  • विघ्न निवारण: भगवान गणेश स्मरण मात्र से हमारे मार्ग की सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
गौरी सुत माता पार्वती का पुत्र भगवान गणेश के संदर्भ में
गणराज गणों के राजा भगवान गणेश का एक नाम
विघ्न बाधा / संकट कठिनाइयों को दूर करने वाले
रिद्धि-सिद्धि समृद्धि और सफलता गणेश जी की दोनों पत्नियाँ / शक्तियाँ
मलयगिरि चंदन उत्तम प्रकार का सुगंधित चंदन भगवान के श्रृंगार हेतु

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त की आंतरिक पुकार को प्रकट करती है। जब भक्त कहता है कि "सारे देवों में पहले तुझको मनाये", तो यह सनातन धर्म की उस परंपरा को दर्शाता है जहाँ गणेश प्रथम पूज्य हैं। "अटकी कश्ती को आके पार उतरो" पंक्ति यह सिखाती है कि जब इंसान चारों तरफ से समस्याओं से घिर जाता है, तब केवल भगवान की कृपा ही उसे संकट से बाहर निकाल सकती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

इस महामंत्र के साथ यदि इस भजन का स्मरण किया जाए, तो साधक को दोगुना आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है। इसी प्रकार श्री गणेश चालीसा का पाठ भी नियमित रूप से करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम गौरी सुत गणराज पधारो आके सारे काज संवारो
प्रमुख देवता भगवान श्री गणेश
गीतकार विनोद अग्रवाल
गायक मुकेश बगड़ा
संगीतकार सूरज
भाषा सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
संगीत लेबल्स Yuki
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, पूजा, अनुष्ठान, हवन एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायक मुकेश बगड़ा ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

इस भजन के भावपूर्ण बोल प्रसिद्ध भजनकार और संत स्वभाव के धनी विनोद अग्रवाल जी द्वारा लिखे गए हैं।

माता पार्वती का एक नाम 'गौरी' भी है। चूँकि भगवान गणेश माता गौरी और भगवान शिव के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें 'गौरी सुत' या 'गौरी नंदन' कहा जाता है।

यह भजन गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, गृहप्रवेश, नया व्यापार आरंभ करने या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भगवान गणेश को मोदक (लड्डू) और दुर्वा घास अति प्रिय है। इस भजन में भी लड्डुओं के भोग का विशेष उल्लेख किया गया है।

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन के हर संकट और बाधा के समय हमें प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण करना चाहिए, जिससे हमारे सारे कार्य सुगमता से पूर्ण हो जाते हैं।

गणेश जी की उपासना से बुद्धि, ज्ञान, विवेक के साथ-साथ 'रिद्धि' (समृद्धि) और 'सिद्धि' (सफलता) की प्राप्ति होती है।

हाँ, इस भजन को दैनिक पूजा, विशेषकर बुधवार के दिन या गणेश वंदना के दौरान सस्वर पाठ या श्रवण किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तित्सलोक पर प्रकाशित यह आलेख सनातन संस्कृति के पारंपरिक स्रोतों, लोकगीतों और प्रतिष्ठित भजन संग्रहों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को भगवान गणेश के इस लोकप्रिय भजन के सटीक बोल, उसका गहरा अर्थ और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करना है ताकि साधक अपनी भक्ति को और अधिक प्रगाढ़ कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भारतीय भजन एवं संगीत परंपरा
  • श्री गणेश पुराण एवं मुद्गल पुराण संदर्भ
  • लोकप्रिय भक्ति एल्बम एवं संगीत लेबल्स (Yuki Music Archives)
  • संत विनोद अग्रवाल रचित भजन संकलन

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श्रेणियां: Mahagauri Stotra gauri Mata Chalisa

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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