माँ महालक्ष्मी आरती(Ma Lakshmi Aarati in Hindi):-
माँ महालक्ष्मी आरती(Ma Lakshmi Aarati in Hindi):-
ॐ जय लक्ष्मी माता
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत
हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
उमारमाब्रह्माणी
तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत
नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
दुर्गा रुप निरंजनी
सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
तुम पाताल-निवासिनि
तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी
भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
जिस घर में तुम रहतीं
तहँ सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता
मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
तुम बिन यज्ञ न होते
वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव
सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर
क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन
कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
महालक्ष्मीजी की आरती
जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता
पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "माँ महालक्ष्मी आरती(Ma Lakshmi Aarati in Hindi) - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

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