Ganesh Vandana Mantra

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे लिरिक्स (Maa Sharde Tu Mere Kantha Mein Viraje Lyrics in Hindi) - Saraswati vandana by Manoj Mishra - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे (Maa Sharde Tu Mere Kantha Mein Viraje) Manoj Mishra द्वारा गाई गई एक अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय सरस्वती वंदना है। सनातन धर्म में विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी भगवती माँ सरस्वती (Maa Saraswati) की कृपा प्राप्ति के लिए इस पावन वंदना का स्मरण साधकों, विद्यार्थियों और संगीत प्रेमियों द्वारा अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पठन-पाठन, संगीत साधना, कला प्रदर्शन या मंच संचालन से पूर्व माँ शारदे का आह्वान उनके आशीर्वाद को सुनिश्चित करता है। मनोज Mishra की सुमधुर वाणी और भावपूर्ण शैली में रचित यह वंदना अंतर्मन को पावन कर देती है और साधक के कंठ में साक्षात भगवती वाग्देवी का वास कराती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय सरस्वती वंदना के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, महत्व, गायन विधि और आध्यात्मिक आयामों पर चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे - Manoj Mishra

स्थायी (म-खड़ा / Refrain):

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,
सुरीली तान मेरी जुबां से तू गाजे।
विद्या की देवी हे वीणा वादिनी,
हर ले अंधेरा तू ज्ञान की स्वामिनी।।
(माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे...)

प्रथम अंतरा:

अज्ञान का तम मेरे मन से मिटा दे,
सत्य और धर्म का दीप तू जला दे।
शब्दों में शक्ति और सुरों में रवानी,
तुझसे ही मिलती है हमको जवानी।
तेरी कृपा से हो जीवन ये पावन,
तुझमें ही रमता है मेरा ये पावन मन।।
(माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे...)

द्वितीय अंतरा:

वीणा की झंकार से गूंजे गगन सारा,
तुझको ही माँ हमने समझा है سہارا (सहारा)।
हाथों में पुस्तक और श्वेत वन्दना है,
चरणों में तेरे मेरी कोटि वंदना है।
लिखूं जो भी रचना वो सत्य हो जाए,
तेरा ही यश गान ये जग गाए।।
(माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे...)

तृतीय अंतरा:

सुर और संगीत की तू ही है धारा,
डूबते को तूने ही माँ पार उतारा।
मंच पे आऊं तो तुझको ध्याऊं,
तुझसे ही पाकर वर आगे मैं जाऊं।
मनोज की विनती ये स्वीकार कर लो,
कंठ में बैठकर उपकार कर लो।।
(माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे...)

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

मनोज मिश्रा द्वारा रचित और स्वरबद्ध यह सरस्वती वंदना केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक साधक की अपनी आराध्य देवी के प्रति अनन्य पुकार है। भजन के स्थायी भाग में साधक माँ शारदे से प्रार्थना करता है कि वे उसके कंठ में स्वयं आकर विराजमान हो जाएं, ताकि उसकी जुबान से निकलने वाली हर तान सुरीली और पवित्र हो। विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाली ज्ञान की स्वामिनी हैं।

प्रथम और द्वितीय अंतरे में साधक अपने अंतर्मन से अज्ञान के तम को मिटाने और जीवन में सत्य व धर्म का प्रकाश फैलाने की विनती करता है। वह माता से कामना करता है कि उसके शब्दों में ऐसी शक्ति और सुरों में ऐसी रवानी (प्रवाह) हो कि उसकी हर रचना सत्य और लोक कल्याणकारी हो। अंत में, गायक मनोज मिश्रा अपने नाम के साथ माँ से यह विनती करते हैं कि उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए माँ उनके कंठ में स्थायी वास करें और उन पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • विद्या प्राप्ति: विद्यार्थियों के लिए यह वंदना एकाग्रता, बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि करती है।
  • कला और संगीत साधना: गायक, वादक, नर्तक और वक्ता इस वंदना को गाकर अपनी वाणी और कला को सिद्ध करते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: इसके श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सांस्कृतिक परंपरा: भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत परंपरा में मंच पर प्रस्तुति से पूर्व वाग्देवी की वंदना करने की प्राचीन परंपरा है।

इसी प्रकार की अन्य पावन स्तुतियों और भजनों के लिए हमारे माँ सरस्वती वंदना संग्रह और लोकप्रिय सरस्वती भजन सूची का अवलोकन करें।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रातःकाल स्नान-ध्यान के पश्चात, अध्ययन आरंभ करने से पूर्व, संगीत के रियाज के समय अथवा किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत में गाया जा सकता है। बसंत पंचमी (Basant Panchami) के पावन अवसर पर माँ शारदे के पूजन में विशेष रूप से इसका गान किया जाता है। दीप प्रज्वलित कर, माँ श्वेतवर्णा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक इस वंदना का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी भगवती माँ सरस्वती हैं, जिन्हें ब्रह्मा जी की शक्ति, वाग्देवी, शारदा, वीणावादिनी और हंसवाहिनी कहा जाता है। वे शुक्लवर्णा, श्वेत पद्मासना और हाथों में वीणा-पुस्तक धारण करने वाली हैं। इसके रचनाकार एवं गायक मनोज मिश्रा ने अपनी मधुर और समर्पित शैली से इस वंदना को जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना समकालीन भक्ति संगीत परंपरा के अंतर्गत हुई है, जहाँ पारंपरिक शास्त्रीय तत्वों को आधुनिक सुगम संगीत की धुनों के साथ पिरोया जाता है। मनोज मिश्रा ने अपनी कलात्मकता का परिचय देते हुए इसे बहुत ही सरल, सहज और हृदयग्राही बनाया है ताकि हर आयु वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से गा सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल खड़ी हिंदी और अवधी मिश्रित लोक भाषा में रचित है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। छंद की दृष्टि से यह गेय पद्धति पर आधारित है जिसे किसी भी ताल या बिना ताल के भी सहजता से गाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • विद्या की विनम्रता: ज्ञान अहंकार को मिटाता है, और माँ शारदे की शरण में जाने से मनुष्य विनम्र बनता है।
  • सत्य का मार्ग: वाणी और कर्म में सत्य का होना ही सच्ची विद्या की पहचान है।
  • शरणागति: अपनी कला और बुद्धि को ईश्वर को समर्पित कर देना ही सर्वोच्च साधना है।

जीवन में सफलता और शांति के लिए भगवान गणेश की वंदना भी उतनी ही आवश्यक है, जिसके लिए आप गणेश वंदना मंत्र का पाठ कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
शारदे माता सरस्वती विद्या और कला की देवी
कंठ गला / वाणी का स्थान जहाँ से स्वर उत्पन्न होते हैं
वीणा वादिनी वीणा बजाने वाली माँ सरस्वती का एक प्रसिद्ध नाम
तम अंधकार अज्ञानता का प्रतीक
रवानी प्रवाह / धारा शब्दों या सुरों की निरंतरता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे..." - गायक माँ से प्रार्थना करता है कि हे माँ सरस्वती, आप मेरे गले में यानी मेरी वाणी में निवास करें।

"सुरीली तान मेरी जुबां से तू गाजे..." - आपके प्रभाव से मेरे मुख से निकलने वाले स्वर और गीत अत्यंत मधुर और ओजस्वी हों।

"अज्ञान का तम मेरे मन से मिटा, सत्य और धर्म का दीप जला..." - मेरे भीतर छिपे अज्ञान और मूर्खता के अंधेरे को समाप्त कर विवेक और धर्म का प्रकाश भर दीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता,
सा मां पातु भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

(अर्थ: जो देवी कुंद के फूल, चंद्रमा और बर्फ जैसे श्वेत हार से सुसज्जित हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जो श्वेत कमल पर विराजती हैं, और जिनकी वंदना ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देवता सदा करते हैं, वे भगवती सरस्वती हमारी संपूर्ण अड़चनों और मूर्खता को दूर करें।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे (Maa Sharde Tu Mere Kantha Mein Viraje)
गायक / कलाकार मनोज मिश्रा (Manoj Mishra)
आराध्य देवी माँ सरस्वती (भगवती शारदा)
भाषा हिंदी / अवधी
विषय एवं थीम सरस्वती वंदना, विद्या, संगीत और ज्ञान प्राप्ति
भाव भक्ति, विनय, समर्पण और कला साधना
उपयुक्त अवसर बसंत पंचमी, परीक्षा पूर्व, संगीत समारोह, विद्यालय प्रार्थना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय सरस्वती वंदना को प्रसिद्ध भजन गायक मनोज मिश्रा (Manoj Mishra) द्वारा गाया गया है।

इस वंदना को प्रातःकाल की पूजा के समय, अध्ययन शुरू करने से पूर्व, संगीत रियाज से पहले और बसंत पंचमी के पावन पर्व पर गाना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

माँ सरस्वती की पूजा में सात्विकता, पवित्रता और श्वेत वस्त्र धारण करने का विशेष महत्व है। अध्ययन सामग्री, पुस्तकें और वाद्ययंत्रों का सम्मान करना आवश्यक है।

हाँ, यह भजन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है क्योंकि इसके नियमित स्मरण से बुद्धि तीव्र होती है और एकाग्रता बढ़ती है।

इस भजन का मुख्य संदेश अज्ञान रूपي अंधकार को मिटाकर ज्ञान, सत्य और कला के प्रकाश से जीवन को आलोकित करना तथा वाणी में पवित्रता लाना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका और भजन लिरिक्स पाठकों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है। इसमें प्रामाणिक पारंपरिक स्रोतों, लोक परंपराओं और संगीत कला के मानदंडों का पूर्ण ध्यान रखा गया है। किसी भी शुद्धि या सुझाव के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक सनातन संस्कृति एवं लोक भजन परंपरा
  • श्रीमद्भगवद्गीता एवं पुराणों में वर्णित वाग्देवी स्तुति
  • संगीत नाटक अकादमी एवं भजन संग्रह ग्रंथ
  • पंचांग एवं धार्मिक साहित्य संकलन

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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