Shyam Bhajan

मैं लाड़ला खाटू वाले लिरिक्स (Main Ladala Khatu Wale Ka Lyrics In Hindi) - Khatu SHyam Bhajan - Bhaktilok

468 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटू वाले का।

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटु वाले का 

भारत में राजस्थान है

अजी जयपुर जिसकी शान है

जयपुर के पास ही रिंगस है

रिंगस से उठता निशान है

भगतों के पालनहारे का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटू वाले का।

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाड़ला खाटु वाले का 

दुनिया में निराली शान है

कहलाता बाबा श्याम है

कोई फूल चढ़ा ले जाता है

कोई छपन भोग लगाता है

सब को खुश रखने वाले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटू वाले का।

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाड़ला खाटु वाले का 

जो मैंने कभी ना सोचा था

जहाँ कोशिश से ना पहुँचा था

मेरे श्याम ने मुझको बचा लिया

मुझे मंज़िल तक पहुंचा दिया

कन्हैयाँ मुरली वाले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटू वाले का।

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाड़ला खाटु वाले का 

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटू वाले का।

ना गोरे का ना काले का

घनश्याम मुरली वाले का

मैं लाडला खाटु वाले का 

मैं लाड़ला खाटू वाले लिरिक्स (Main Ladala Khatu Wale Ka Lyrics In English) -

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka.

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka 

Bhaarat Mein Raajasthaan Hai

Aji Jayapur Jisaki Shaan Hai

Jayapur Ke Paas Hi Ringas Hai

Ringas Se Uthata Nishaan Hai

Bhagaton Ke Paalanahaare Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka.

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka 

Duniya Mein Niraali Shaan Hai

Kahalaata Baaba Shyaam Hai

Koi Phul Chadha Le Jaata Hai

Koi Chhapan Bhog Lagaata Hai

Sab Ko Khush Rakhane Vaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka.

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka 

Jo Mainne Kabhi Na Socha Tha

Jahaan Koshish Se Na Pahuncha Tha

Mere Shyaam Ne Mujhako Bacha Liya

Mujhe Manzil Tak Pahuncha Diya

Kanhaiyaan Murali Vaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka.

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka 

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka.

Na Gore Ka Na Kaale Ka

Ghanashyaam Murali Vaale Ka

Main Laadala Khaatu Vaale Ka 

*** Singer- Kanhiya Mittal***



सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मैं लाड़ला खाटू वाले लिरिक्स (Main Ladala Khatu Wale Ka Lyrics In Hindi) - Khatu SHyam Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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