पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स (Pahile Pahil Ham Kayini Lyrics in Hindi) - Chhath Puja Geet
प्रस्तुति: भक्तिकुल (Bhaktilok.in) | विधा: लोक भक्ति गीत / छठ महापर्व | भाषा: भोजपुरी / हिंदी
लोक आस्था के महापरम पर्व 'छठ' (Chhath Puja) के सुअवसर पर गूंजने वाला सबसे लोकप्रिय, पावन और कर्णप्रिय गीत "पहिले पहिल हम कईनी छठि मइया व्रत तोहार..." आज पूरी दुनिया में सूर्य उपासना और छठी मइया की महिमा का पर्याय बन चुका है। शारदा सिन्हा जी के स्वर में अमर हो चुके इस गीत ने पूर्वांचल की संस्कृति, लोक-परंपरा, और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भाव को वैश्विक पहचान दिलाई है। इस विस्तृत आलेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं इस अमर गीत के सम्पूर्ण बोल (Lyrics), इसका गहरा आध्यात्मिक व सांस्कृतिक अर्थ, व्रत की महिमा, और इस गीत से जुड़े हर एक पहलू की संपूर्ण जानकारी।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
पहिले पहिल हम कईनी, छठि मइया व्रत तोहार,
करिहा छमा मइया भूल चूक गलती हमार...
तुहीं तो सुरूज भइला, तुहीं तो दिनानाथ,
अरघ के बेरिया तोहें रहिअहें साथे साथ...
सोनवा के कटोरिया वा, गँगिया के पानिआ,
केलवा के पात पर उगेलन सुरूज मलिया...
घाट में बाड़े भीड़ भारी, दर्शन दियs ना,
चरणन में पर के, अरगीया ले लs ना...
भिनसरहियs सुरूज भइला, अरघ के बेरिया,
सभे मिलि जोहरी मइया, करs आरती तिनकनिया...
घाट से लौटि के जब, घरवा में अइनी,
चरण पखारि मइया, पूजा संपन्न कईनी...
पहिले पहिल हम कईनी, छठि मइया व्रत तोहार,
करिहा छमा मइया भूल चूक गलती हमार...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह गीत एक नव-साधिका या पहली बार छठ व्रत करने वाली व्रती के मनोभावों, उसकी श्रद्धा, और छठी मैया के प्रति अनन्य समर्पण को अत्यंत सहज और सरल शब्दों में व्यक्त करता है।
गीत के आरंभ में व्रती बहुत ही विनम्रता के साथ छठी मैया से प्रार्थना करती है कि हे मैया! मैंने जीवन में पहली बार आपका यह अत्यंत कठिन और पवित्र व्रत किया है। पूजा-अर्चना के दौरान मुझसे अनजाने में जो भी भूल-चूक या गलती हो जाए, उसे एक माता की तरह क्षमा कर देना। इसके उपरांत, व्रती सूर्य भगवान (जो प्रत्यक्ष देवता हैं और जिन्हें 'दिनानाथ' कहा जाता है) से निवेदन करती है कि वे अर्घ्य के समय अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और हर कदम पर हमारा साथ दें।
गीत के अगले चरणों में लोक संस्कृति की सुंदर छटा बिखेरते हुए सोने के कटोरे में गंगाजल, केले के पत्तों पर सजे प्रसाद और उगते हुए सूर्य देव (मल्लिनाथ/सूर्यनारायण) के अलौकिक दर्शन का वर्णन है। नदी घाट पर उमड़ी भारी भीड़ के बीच व्रती व्याकुल होकर मैया से दर्शन देने और उनके चरणों में समर्पित अर्घ्य को स्वीकार करने की विनती करती है। अंत में, व्रत की पूर्णता और घर लौटने पर चरणों को पखारकर पूजा के समापन का सात्विक आनंद दर्शाया गया है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
- प्रथम प्रयास और समर्पण: जीवन में पहली बार किसी बड़े अनुष्ठान को करने पर मन में व्याप्त जिज्ञासा, पवित्रता का भय और ईश्वर के प्रति संपूर्ण शरणागति का भाव।
- क्षमाशीलता और विनय: मानव स्वभाव की सुलभ कमियों को स्वीकार करते हुए दिव्य शक्ति से क्षमा मांगने की महान भारतीय परंपरा।
- प्रकृति और प्रत्यक्ष देवता की पूजा: जल, सूर्य, अग्नि और पृथ्वी के उन तत्वों के प्रति कृतज्ञता जो हमारे जीवन के आधार हैं।
- पारिवारिक और सामाजिक समरसता: जाति, वर्ग और लिंग भेद से परे समाज के हर वर्ग का घाट पर एक साथ मिलकर सूर्योपासना करना।
छठ महापर्व और इस गीत से जुड़े अन्य प्रेरणादायी प्रसंगों के लिए आप हमारे छठ पूजा गीत संग्रह और व्रत कथाओं को पढ़ सकते हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गीत का नाम | पहिले पहिल हम कईनी (Pahile Pahil Ham Kayini) |
| प्रसिद्धि | पद्म भूषण स्वर कोकिला डॉ. शारदा सिन्हा जी के अमर स्वर द्वारा |
| संगीत शैली | पारंपरिक लोक गीत / छठ पर्व गीत |
| भाषा | भोजपुरी / अंगिका / मैथिली मिश्रित लोक भाषा |
| मुख्य विषय | सूर्य उपासना, छठी मइया की वंदना, और व्रत की पवित्रता |
| अवसर | कार्तिक शुक्ल षष्ठी (छठ महापर्व) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
किसी भी लोकगीत की असली ताकत उसके शब्द और उसका लोक-समर्पण होता है। "पहिले पहिल हम कईनी" गीत को भारत की लोक संस्कृति की धड़कन और बिहार कोकिला के रूप में विख्यात डॉ. शारदा सिन्हा ने अपने जादुई और भावपूर्ण स्वर से सजाया है। उनके द्वारा गाए गए इस गीत के बिना आज भी देश और दुनिया के किसी भी कोने में छठ महापर्व का अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। उनके इस योगदान ने लोकगीतों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शास्त्रीय गरिमा प्रदान की है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| कईनी | किया है | व्रत का अनुष्ठान आरंभ करना |
| दिनानाथ | सूर्य देव | दिव्य ऊर्जा और प्रकाश के देवता |
| अरघ / अरगीया | अर्घ्य | सूर्य भगवान को जल और दूध अर्पित करना |
| भिनसरहियs | भोर का समय / सुबह | प्रातःकालीन सूर्योदय का समय |
| चरण पखारि | चरण धोना | घाट से लौटने के बाद पवित्रता और कृतज्ञता प्रकट करना |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, स्वास्थ्य, संयम और अनुशासन का महाकुंभ है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य और उगते हुए सूर्य दोनों की पूजा की जाती है—जो यह संदेश देता है कि उत्थान के साथ-साथ पतन या संकट के समय भी हमें आदर और धैर्य रखना चाहिए।
यह गीत व्रतियों के अंतर्मन के उस संवाद को प्रकट करता है जो वे छठी मैया (प्रकृति माता का मातृ रूप) और सूर्य नारायण के साथ स्थापित करती हैं। इस गीत को सुनते ही प्रवासी लोग भी सात समंदर पार से अपनी मिट्टी, अपने घाट और अपनी संस्कृति से जुड़ाव महसूस करने लगते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे गोवर्धन पूजा एवं अन्य सनातन पर्वों के लेख पढ़ सकते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- विनम्रता और अहंकार का त्याग: जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सफलता मिले, ईश्वर या प्रकृति के सामने हमेशा विनम्र रहना चाहिए।
- कठिन परिस्थितियों में भी निष्ठा: 36 घंटे के निर्जला उपवास की तरह जीवन के कठिन व्रतों (लक्ष्यों) को पूरी निष्ठा से निभाना।
- परिवार और समाज को जोड़ना: यह पर्व और इसके गीत पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोकर सामूहिक श्रम और सहयोग का पाठ पढ़ाते हैं।
- प्रकृति का संरक्षण: बांस की दउरा, गन्ने, ठेकुआ और मौसमी फलों का प्रसाद यह सिखाता है कि प्रकृति हमें जो देती है, उसे ससम्मान वापस उसी के चरणों में समर्पित करना चाहिए।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को गाया जाता है, जब व्रती महिलाएं और पुरुष नदी या तालाब के घाट पर संध्या अर्घ्य और सुबह के प्रातकालीन अर्घ्य के लिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, घरों में खरना के दिन से लेकर पारण तक लाउडस्पीकर और रेडियो के माध्यम से यह गीत संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना देता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| घटक | विवरण |
|---|---|
| गीत शीर्षक | पहिले पहिल हम कईनी (Pahile Pahil Ham Kayini) |
| संबंधित पर्व | छठ महापर्व (Chhath Puja) |
| मुख्य आराध्य | छठी मइया एवं सूर्य देव (दिनानाथ) |
| लोकप्रिय गायिका | डॉ. शारदा सिन्हा |
| प्रमुख भाव | भक्ति, समर्पण, विनय और उल्लास |
| सांस्कृतिक महत्व | पूर्वांचल की लोक संस्कृति का प्राण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिकुल (Bhaktilok.in) पर प्रस्तुत यह सामग्री सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और प्रामाणिक लोकगीतों के संरक्षण और प्रसार के उद्देश्य से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सटीक एवं उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पूर्वांचल की पारंपरिक लोकगायकी एवं मौखिक परंपराएं
- डॉ. शारदा सिन्हा द्वारा संकलित एवं प्रस्तुत लोकगीत संग्रह
- भारतीय सनातन संस्कृति एवं सूर्य उपासना की शास्त्रीय पद्धतियां
- लोक आस्था के महापर्व छठ से जुड़े प्रामाणिक सांस्कृतिक आलेख
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