सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी (Sab Sukhiyan Ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhavani Lyrics in Hindi) -
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।
दुर्गा अम्बे काली कहत हो
दुर्गा अम्बे काली कहत हो
दुर्गा अम्बे काली कहत हो
दुर्गा अम्बे काली कहत हो
नवरात्रि महारानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।
विनती कर फ़रियाद लगावे
विनती कर फ़रियाद लगावे
विनती कर फ़रियाद लगावे
विनती कर फ़रियाद लगावे
घट घट आप समानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी
ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे
ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे
ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे
ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे
आदि शक्ति महारानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।
महिषासुर दलन हारी मैया
महिषासुर दलन हारी मैया
महिषासुर दलन हारी मैया
महिषासुर दलन हारी मैया
अष्ट भुजी महारानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की खानी सुनो मैया आदि भवानी।।
परदेसी तोरे चरण डरो है
परदेसी तोरे चरण डरो है
परदेसी तोरे चरण डरो है
परदेसी तोरे चरण डरो है
कर दो मीठी वाणी सुनो मैया आदि भवानी
कर दो मीठी वाणी सुनो मैया आदि भवानी।।
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी
सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।
*** Singer : Rakesh Tiwari ***
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी (Sab Sukhiyan Ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhavani Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
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