साईं बाबा संध्या आरती (Sai Baba Evening Aarti Lyrics in Telugu) -
ఆరతి సాయిబాబా సౌఖ్య దాతార జీవా
చరణరజతాలి ద్యావా దాసాం విసావ భక్తాం విసావా
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
జాళూనియా ఆనంగ స్వస్వరూపీ రాహే దంగ |
ముముక్ష జనదావీ నిజడోళా శ్రీరంగ డోళా శ్రీరంగ
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
జయా మనీ జైసా భావ తయా తైసా అనుభవ |
దావిసి దయా ఘనా ఐసి తుఝీహీ మావ తుఝీహీ మావ
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
తుమచే నామ ధ్యాతా హరే సంస్కృతి వ్యధా |
అగాధ తవకరణి మార్గ దావిసీ ఆనాథా దావిసీ ఆనాథా
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
కలియుగి అవతార సగుణ పరబ్రహ్మా సాచార |
అవతీర్ణ ఝాలాసే స్వామీ దత్తదిగంబర దత్తదిగంబర
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
ఆఠా దివసా గురువారీ భక్తకరీతి వారీ |
ప్రభుపద మహావయా భవభయ నివారీ భయ నివారీ
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
మాఝా నిజద్రవ్య ఠేవా తవ చరణ రజ సేవా |
మాగణే హేచి ఆతా తుమ్హా దేవాధిదేవా దేవాధిదేవా
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
ఇచ్ఛితా దీనచాతక నిర్మలతోయ నిజసూఖ |
పాజవే మాధవాయ సంభాళ అపుళీబాక అపుళీబాక ||
ఆరతి సాయిబాబా సౌఖ్యదా తారా జీవా
చరణా రజతాలి ద్యావా దాసాం విసావ భక్తాం విసావా
|| ఆరతి సాయిబాబా ||
साईं बाबा संध्या आरती (Sai Baba Evening Aarti Lyrics in Hindi) -
आरती साईबाबा सौख्य दातारा जीवा
चरणराजतालि द्याव दशम विसव भक्तम विसव
|| आरती साईं बाबा ||
जालुनिया अनंगा स्वस्वरूपि रहे डांगा |
मुमुक्षा जनदावी निजादोला श्रीरंगा डोला श्रीरंगा
|| आरती साईं बाबा ||
जया धन जैसा भव तैसा अनुभव |
डेविसि दया घना आईसी तुजहि मऊ तुजहि मऊ
|| आरती साईं बाबा ||
तुमचे नाम ध्याता हरे संस्कृति व्याधा |
अगाधा तवकरणी मार्गा डेविसि अनाथा डेविसि अनाथा
|| आरती साईं बाबा ||
कलियुगी अवतार सगुण परब्रह्म सचरा |
अवतीर्न झलासे स्वामी दत्तदिगम्बरा दत्तदिगम्बरा
|| आरती साईं बाबा ||
अथ दिवस गुरूवार भक्तिवार |
प्रभुपाद महावाय भवभाय निवारी भय निवारी
|| आरती साईं बाबा ||
माझा निजद्रव्य थेव तव चरण राजा सेवा |
मगने हेचि अता तुम्हा देवाधिदेवा देवाधिदेवा
|| आरती साईं बाबा ||
इच्छिता दीनाचटाका निर्मलतोया निजसुखा |
पजावे माधवाय सम्भला आपुलीबका आपुलीबका ||
आरती साईबाबा सौख्यदा तारा जीवा
चरण राजतलि द्याव दशम विसव भक्तम विसव
|| आरती साईं बाबा ||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "साईं बाबा संध्या आरती (Sai Baba Evening Aarti Lyrics in Telugu) - Sai Aarti - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें