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श्री साईं बाबा मध्याह्न आरती (Sai Baba Madhyan Aarti Lyrics in Hindi) - All Sai Baba Madhyan Aarti - BHaktilok

170 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री साईं बाबा मध्याह्न आरती (Sai Baba Madhyan Aarti Lyrics in Hindi) - 


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प्रार्थना (Prarthana Lyrics in Hindi) - 


करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वाऽपराधम् ।

विदितमविदितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करूणाब्धे श्रीप्रभो साईनाथ ।।१।


श्री सच्चिदानंद सद्गुरू साईनाथ महाराज की जय

ॐ राजाधिराज योगिराज परब्रह्म "श्रीसच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज"


श्रीसाईनाथमहिम्नस्तोत्रम

सदा सत्स्वरूपं चिदानंदकंद, जगत्संभवस्थानसंहारहेतुम् ।

स्वभक्तेच्छयामानुषं दर्शयंत, नमामीश्वरं सद्गुरुसाईनाथम् ॥१॥


भवध्वांतविध्वंसमार्तडमीड्यं, मनोवागतीतं मुनीानगम्यम् ।

जगद्व्यापकं निर्मलं निर्गुणं त्वा, नमामी० ॥२॥


भवांभोधिमग्नार्दितानां जनानां, स्वपादाश्रितानां स्वभक्तिप्रियाणाम् ।

समुद्धारणार्थ कलौ संभवत, ॥३॥


सदा निंबवृक्षस्य मूलाधिवासात्सुधास्त्राविणं तिक्तमप्यप्रियं तम् ।

तरूं कल्पवृक्षाधिकं साधयंत, नमामी ||४||


सदा कल्पवृक्षस्य तस्याधिमूले भवद्भावबुद्ध्या सपर्यादिसेवाम् ।

नृणां कुर्वतां भुक्तिमुक्तिप्रदं तं, नमामी० ॥५॥


अनेकाश्रृतातयलीला विलासैः समाविष्कृतेशानभास्वत्प्रभावम् ।

अहंभावहीनं प्रसन्नात्मभावं, नमामी ||६||


सतां विश्रमाराममेवाभिरामं सदा सज्जन: संस्तुतं सन्नमद्धिः।

जनामोदद भक्तभद्रप्रदं तं, नमामी० ॥7॥


अजन्माद्यमेकं परं ब्रम्ह साक्षात्स्वयंसंभवं-राममेवावतीर्णम् ।

भवद्दर्शनात्संपुनीतः प्रभोऽहं, नमामी० ॥८॥


श्रीसाईशकृपानिधेऽखिलनृणां सर्वार्थसिद्धप्रद ।

युष्मत्पादरजः प्रभावमतुलं धातापि वक्ताऽक्षमः ।

सद्भक्त्या शरणं कृतांजलिपुट: संप्रापितोऽस्मि प्रभो,

श्रीमत्साईपरेशपादकमलान्नान्यच्छरण्यं मम ।।९।।


साईरूपधरराघवोत्तम, भक्तकामविबुधदुमं प्रभुम् ।

माययोपहतचित्तशुद्धये, चिंतयाम्यहमहर्निश मुदा ।। १० ।।


शरत्सुधांशुप्रतिमप्रकाश, कृपातपात्रं तव साईनाथ ।

त्वदीयपादाब्जसमाश्रिताना स्वच्छायया तापमपाकरोतु ।।११।।


उपासनादैवतसाइनाथ, स्तवैर्मयो पासनिना स्तुतस्त्वम ।

रमेन्मनो मे तव पादयुग्मे, भृङ्गो, यथाब्जे मकरंदलुब्धः ।। १२ ।।


अनेकजन्मार्जितपापसंक्षयो, भवेद्भवत्पादसरोजदर्शनात् ।

क्षमस्व सर्वानपराध पुंजकान्प्रसीद साईश गुरो दयानिधे ।।१3।।


श्री साईनाथचरणामृतपूतचित्तास्तत्पादसेवनरताः सततं च भक्त्या |

संसारजन्यदुरितौधविनिर्गतास्ते कैवल्यधाम परमं समवाप्नुवन्ति ।।१४।।


स्तोत्रमेतत्पठेद्भक्त्या यो नरस्तन्मना: सदा ।

सद्गुरोः साइनाथस्य कृपापात्रं भवेद् ध्रुवम् ।।15।।


प्रार्थना - ऐसा येई बा (Prayer Esa Yei Ba Lyrics in Hindi) - 


ऐसा येई बा | साई दिगंबरा | अक्षयरूप अवतारा ।

सर्वहि व्यापकतूं । श्रुतिसारा । अनुसयाऽत्रिकुमारा ।।


काशी स्नान जप, प्रतिदिवशीं । कोल्हापुर भिक्षेसी।

निर्मल नदि तुंगा, जल प्राशी । निद्रा माहुर देशीं ।। ऐ० ।।१।।


झोळी लोंबतसे वाम करीं । त्रिशूल डमरू-धारी ।

भक्ता वरद सदा सुखकारी । देशील मुक्ती चारी ।। ऐ० ।।२।।


पायी पादुका । जपमाला कमंडलू मृगछाला ।

धारण करिशी बा । नागजटा मुगुट शोभतो माथां ।। ऐ० ॥३॥


तत्पर तुझ्या या जे ध्यानीं । अक्षय त्यांचे सदनीं ।

लक्ष्मी वास करी दिनरजनीं । रक्षिसि संकट वारूनि ।। ऐ० ॥४॥


या परिध्यान तुझें गुरूराया । दृश्य करी नयनां या ।

पूर्णानंदसुखें ही काया । लाविसि हरिगुण गाया ।। ऐ० ॥५॥


नमस्काराष्टक (Namaskarashtak Lyrics in Hindi) - 


अनंता तुला तें कसें रे स्तवावें।

अनंता तुला तें कसें रे नमावें ।।

अनंत मुखांचा शिणे शेष गातां ।

नमस्कार साष्टांग श्रीसाइनाथा ।।१।।


स्मरावें मनीं त्वत्पदा नित्य भावें ।

उरावें तरी भक्तिसाठी स्वभावें ॥

तरावें जगा तारूनी मायताता । नमस्कार० ।।२।।


वसे जो सदा दावया संतलीला ।

दिसे अज्ञ लोकापरी जो जनाला ॥

परी अंतरी ज्ञान कैवल्यदाता । नमस्कार० ॥३॥


बरा लाधला जन्म हा मानवाचा ।

नरा सार्थका साधनीभूत साचा ।।

धरूं साइप्रेमा गळाया अहंता । नमस्कार ॥४॥


धरावें करींसान अल्पज्ञ बाला।

करावें आम्हां धन्य चुंबोनि गाला ।।

मुखीं घाल प्रेमें खरा ग्रास आतां । नमस्कार ।।५।।


सुरादिक ज्यांच्या पदा वंदिताती ।

शुकादिक ज़्यातें समानत्व देती ।।

प्रयागादि तीर्थेपदीं नम्र होतां ।नमस्कार० ॥६॥


तुझ्या ज्या पदा पाहता गोपबाली ।

सदा रंगली चित्स्वरूपी मिळाली।

करी रासक्रिडासवें । कृष्णनाथा । नमस्कार ।।७।।


तुला मागतों मागणे एक द्यावें ।

करा जोडितों दीन अत्यंत भावें॥

भवी मोहनीराज हा तारिं आतां । नमस्कार ।।८||


पुष्पांजली (Pushpanjali Lyrics in Hindi) - 


ॐ यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।

ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या संति देवाः ।।


ॐ राजाधिराजाय प्रसह्यसाहिने नमो वयं वैश्रवणाय कूर्महे।

स मे कामान्कामकामाय मह्यं कामेश्वरो वैश्रवणो दधातु ।

कुबेराय वैश्रवणाय । महाराजाय नमः । ॐ स्वस्ति ।


साम्राज्यं भौंज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं पारमेष्ठ्य

राज्यं माहाराज्यमाधिपत्यमयं समंतपर्यायी

स्यात्सार्वभौम: सार्वायुष आंतादापरार्धात्

पृथिव्यैसमुद्रपर्यंताया एकराळिति।

तदप्येष श्लोकोऽभिगीतो मरुत: परिवेष्टारो मरुत्तस्यावसन्गृहे।

आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवाः

सभासद इति ॥


नमन - घालीन लोटांगन (Ghalin Lotangan Lyrics in Hindi) - 


घालीन लोटांगन, वंदीन चरण,

डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझें ।।

प्रेमें आलिंगिन, आनंदें पूजिन,

भावें ओवाळिन म्हणे नामा ।।१।।


त्वमेव माता च पिता त्वमेव,

त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,

त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥२॥


कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा

बुध्दयात्मना वा प्रकृतीस्वभावात् ।

करोमी यद्यत्सकलं परस्मै,

नारायणायेति समर्पयामि ।।३।।


अच्युतं केशवं रामनारायणं,

कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् ।

श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,

जानकीनायकं रामचंद्र भजे ।। ४ ।।


अभंग - शिरडी माझें पंढरपूर

शिरडी माझें पंढरपूर। साईबाबा रमावर ॥१॥

शुद्ध भक्ती चंद्रभागा। भाव पुंडलिक जागा ||२||

या हो या हो अवघे जन। करा बाबांसी वंदन ।।३।।

गणू म्हणे बाबा साई। धांव पाव माझे आई ।।४।।


आरती साईबाबा (Aarti Saibaba Lyrics in Hindi) - 


आरती साईबाबा। सौख्यदातार जीवा ।

चरणरजातली । द्यावादासा विसावा, भक्तां विसावा ।। आ० ।।ध्रु०॥


जाळूनियां अनंग । स्वस्वरूपी राहे दंग।

मुमुक्षुजनां दावी । निज डोळां श्रीरंग ।। आ० ॥१॥


जया मनी जैसा भाव । तया तैसा अनुभव।

दाविसी दयाघना । ऐसी तुझी ही माव ।। आ० ।।२।।


तुमचे नाम ध्याता । हरे संसृती व्यथा।

अगाध तव करणी मार्ग दाविसी अनाथा ।। आ० ॥३॥


कलियुगीं अवतार । सगुणब्रह्म साचार।

अवतीर्ण झालासे । स्वामी दत्त दिगंबर ।।द०॥आ० ।।४।।


आठां दिवसां गुरूवारीं । भक्त करिती वारी।

प्रभुपद पहावया । भवभय निवारी ।। आ० ॥५॥


माझा निजद्रव्यठेवा । तव चरणरजसेवा

मागणें हेंचि आतां। तुम्हां देवाधिदेवा ॥आ० ।।६।।


इच्छित दीन चातक । निर्मल तोय निजसुख।

पाजावें माधवा या । सांभाळ आपुली भाक ।। आ० ।।७।।


अभंग - पंचारती (Pancharati Lyrics in Hindi) - 


घेउनियां पंचारती। करूं बाबांसी आरती।।

करूं साईसी० ॥१॥

उठा उठा हो बांधव । ओंवाळू हा रमाधव॥

साई र० ॥ओं० ॥२॥

करूनिया स्थिर मन । पाहूं गंभीर हे ध्यान।

साईंचे हे० ।।पा० ॥३॥

कृष्णनाथा दत्तसाई । जडो चित्त तुझे पायी ।

साई तु०॥ जडो० ॥४॥



आरती (Aarti Sai Baba Ki Lyrics in Hindi) - 


जय देव जय देव दत्ता अवधूता । साई अवधूता ।

जोडूनी कर तव चरणी ठेवितो माथा । जय देव० ।। धु०


अवतरसीं तूं येता धर्मातें ग्लानी ।

नास्तिकांनाही तू लाविसी निजभजनीं।

दाविसी नाना लीला असंख्य रूपांनी ।

हरिसी दीनांचे तू संकट दिनरजनी ।। ज० ।।१।।


यवनस्वरूपी एक्या दर्शन त्वां दिधलें ।

संशय निरसुनियां तद्वैता घालविलें ।

गोपीचंदा मंदा त्वांची उद्धरिलें।

मोमिन वंशी जन्मुनि लोकां तारियलें । ज० ।।२।।


भेद न तत्त्वीं हिंदू यवनांचा कांहीं ।

दावायासी झाला पुनरपि नरदेही ।

पाहसि प्रेमानें तू हिंदू-यवनांही ।

दाविसी आत्मत्वाने व्यापक हा साई ।। ज० ॥ ३॥


देवा साईनाथा त्वत्पदनत भावें ।।

परमायामोहित जनमोचन झणि व्हावें ।

त्वत्कृपयें सकलांचे संकट निरसावें ।

देशिल तरी दे त्वद्यश कृष्णाने गावें ॥ ज० ॥४॥



संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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