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Sai Baba

साईं बाबा षेज आरती लिरिक्स (Sai Baba Shej Aarti Lyrics in Hindi) - Shirdi Sai Baba Shej Aarti - Bhaktilok

164 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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साईं बाबा षेज आरती लिरिक्स (Sai Baba Shej Aarti Lyrics in Hindi) -  


ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।

पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥


निर्गुणाचीस्थिति कैसि आकारा आली बाबा आकारा आली ।

सर्वाघटी भरूनि उरली सायी मा ऊली ॥


ओवालु आरती माझ्या सद्गुरुनाथा माझा सायिनाथा ।

पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥


रजतमसत्वतिघेमाया प्रसावली बाबा मायाप्रसावली ।

माये चीया पोटी कैसी माया उद्भवली ॥


ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।

पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥


सप्त सागरी कैसा खेल माण्डिला बाबा खेल माण्डिला ।

खेलूनीया खेल अवघा विस्तारकेला ॥


ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।

पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥


ब्रह्माण्डीची रचना कैसी दाखविली डोला बाबा दाखविलीडोला ।

तुकाह्मणे माझा स्वामी कृपालू भोला ॥


ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।

पाञ्चही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥


आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।

सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।

आरति ज्ञान राजा ।


लोपले ज्ञान जागी । हित नेणति कोणी ।

अवतार पाण्डुरङ्गा । नाम ठेविले ज्ञानी ।

आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।

सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।

आरति ज्ञान राजा ।


कनकाचे ताटकारी । उभ्या गोपिकानारी ।

नारद तुम्बरहो । साम गायक करी ।

आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।

सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।

आरति ज्ञान राजा ।


प्रगट गुह्यबोले । विश्वब्रह्मचि केले ।

राम जनार्दनी । पायि मस्तक ठेविले ।

आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।

सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।

आरति ज्ञान राजा ।


आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।

सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।

आरति तुकरामा ।


राघवे सागराता । पाषाण तारीले ।

तैसेतु कोबाचे । आभङ्ग रक्षीले ।

आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।

सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।

आरति तुकरामा ।


तूकी ततुलनेसि । ब्रह्म तुकासि आले ।

ह्मणोनि रामेश्वरे । चरणि मस्तक ठेविले ।

आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।

सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।

आरति तुकरामा ।


जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।

आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।


रञ्जविसी तू मधुर बोलुनी माय जशी निजमुलाहे ॥

भोगिसि व्याधी तू चहरुनिया निजसेवकदुःखालाहो ॥

धावुनिभक्त व्यसन हरीसी दर्शन दे शीत्या लाहो ॥


झाले असतिल कष्ट अतीशयतुमचे यादे हाल हो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।

आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।


क्षमाशयन सुन्दर ही शोभासुमन शेजत्या परीहो ॥

घ्यावी धोडीभक्त जनाञ्ची पूजनादि सा करीहो ॥

ओवालीतो पञ्चप्राण ज्योती सुमती करीहो ॥


सेवा किङ्कर भक्त प्रीति अत्तर परिमल वारिहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।

आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।


सोडुनि जाया दुःखवाटते बाबाञ्चा चरणासिहो

सोडुनि जाया दुःखवाटते सायीञ्चा चरणासिहो

आज्ञेस्तवहा आशिर प्रसाद घेवुनि निजसदनासिहो ॥

जातो आता येवु पुनरपि तवचरणाचे पाशिहो ॥


उदवूतु जलासायि मावुले निजहित सादायासिहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।

आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।

जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।


अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।

वैराग्याचा कुञ्च घेवुनि चौक झाडिला बाबा चौकझाडिला ।

तयावरी सुप्रिमाचा शिडकावादिधला ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


पायघड्याघातल्या सुन्दर नवविधा भक्ति बाबा नवविधा भक्ती ।

ज्ञानाञ्च्या समयालावुनि उजलल्याज्योति ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


भावार्था चा मञ्चक हृदयाकाशी टाङ्गिला हृदयाकाशी टाङ्गिला

मनाचि सुमने करूनि केलेशेजेला ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


द्वैताचे कपाटलावुनि एकत्रकेले बाबा एकत्रकेले ।

दुर्बुद्दीञ्च्या गाण्ठी सोडुनि पडदे सोडिले ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


आशा तृष्णा कल्पनेचा सोडुनि गल्‍बला बाबा सोडुनि गल्‍बला ।

दया क्षमा शान्ति दासी उभ्य़ासेवेला ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


अलक्ष उन्मनी घेवुनि नाजुक दुश्शाला बाबा नाजुक दुश्शाला ।

निरञ्जन सद्गुरु स्वामि निजविलशेजेला ।

अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।

चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।


सद्गुरु सायिनाथ महराज की जै ।

श्री गुरुदेव दत्त ।


पाहे प्रसादा चीवाट। द्यावेदु ओनिया ताटा ।

शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।

झालो एकसवा। तुह्म आलं विया देवा ।

शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।

तुकाह्मणे चित्ता करुनि ॥ राहीलो निवाण्टा ।

तुकाह्मणे चित्ता करुनि ॥ राहीलो निवाण्टा ।

शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।


पावला प्रसाद आता विठोनिजावे बाबा आता निजावे ।

आपुलातो श्रम कलौ य़ेतसे भावे ।

अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।

पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।


तुह्मासी जागावु आह्मी आपुल्या चाडा बाबा आपुल्य़ा चाडा ।

शुभाशुभ कर्मे दोष हरावया पीडा ।

अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।

पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।


तुकाह्मणे दिधिले उच्चिष्टाचे भोजन उच्छिष्टाचे भोजन ।

नाहि निवडिले आह्म आपुल्याभिन्न ।

अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।

पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।


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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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