श्री लक्ष्मी नृसिंह द्वादश नाम स्तोत्रम् (shree lakshmee nrsinh dvaadash naam stotram):-
श्री लक्ष्मी नृसिंह द्वादश नाम स्तोत्रम् (shree lakshmee nrsinh dvaadash naam stotram) :-
अस्य श्री लक्ष्मीनृसिंहद्वादशनामस्तोत्र महामन्त्रस्य वेदव्यासो भगवान् ऋषिः
अनुष्टुप् छन्दः , श्री लक्ष्मीनृसिंहो देवता, श्री लक्ष्मीनृसिंहप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः
प्रथमं तु महाज्वालो द्वितीयं तूग्रकेसरी।
तृतीयं वज्रदंष्ट्रश्च चतुर्थं तु विशारदः ॥१॥
पञ्चमं नारसिंहशच षष्ठः कश्यपमर्दनः।
सप्तमो यातुहंता च अष्टमो देववल्लभः॥२॥
ततः प्रह्लादवरदो दशमोऽनंतहंतकः।
एकादशो महारुद्रः द्वादशो दारुणस्तथा॥३॥
द्वादशैतानि नृसिंहस्य महात्मनः।
मन्त्रराज इति प्रोक्तं सर्वपापविनाशनम् ॥४॥
क्षयापस्मारकुष्ठादि तापज्वर निवारणम्।
राजद्वारे महाघोरे संग्रामे च जलांतरे ॥५॥
गिरिगह्वरकारण्ये व्याघ्रचोरामयादिषु।
रणे च मरणे चैव शमदं परमं शुभम्॥६॥
शतमावर्तयेद्यस्तु मुच्यते व्याधिबन्धनात्।
आवर्तयन् सहस्रं तु लभते वाञ्छितं फलम् ॥७॥
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🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री लक्ष्मी नृसिंह द्वादश नाम स्तोत्रम् (shree lakshmee nrsinh dvaadash naam stotram) - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

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