Shri Shani Dev Arati

श्रीमद्भागवतमहापुराण आरती(Shree Madbhaagavatamahaa Puraan Aarati in Hindi) - Bhaktilok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्रीमद्भागवतमहापुराण की आरती सनातन धर्म के उन पावन अनुष्ठानों में से एक है, जो भक्त को साक्षात भगवान श्री कृष्ण के वाङ्मय स्वरूप से जोड़ती है। श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, अपितु स्वयं भगवान का स्वरूप है। इस आरती का गायन और श्रवण करने से जीव के हृदय में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। यह आरती हमें कलयुग के तापों से मुक्ति दिलाने वाली और भगवत्-तत्त्व के रहस्य को प्रकाशित करने वाली है। भक्ति लोक के इस विशेष लेख में हम श्रीमद्भागवतमहापुराण की आरती, उसके भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

आरती अतिपावन पुराण की ।
धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥
महापुराण भागवत निर्मल ।
शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल ॥
परमानन्द सुधा-रसमय कल ।
लीला-रति-रस रसनिधान की ॥
॥ आरती अतिपावन पुरान की ॥

कलिमथ-मथनि त्रिताप-निवारिणि ।
जन्म-मृत्यु भव-भयहारिणी ॥
सेवत सतत सकल सुखकारिणि ।
सुमहौषधि हरि-चरित गान की ॥
॥ आरती अतिपावन पुरान की ॥

विषय-विलास-विमोह विनाशिनि ।
विमल-विराग-विवेक विकासिनि ॥
भगवत्-तत्त्व-रहस्य-प्रकाशिनि ।
परम ज्योति परमात्मज्ञान की ॥
॥ आरती अतिपावन पुरान की ॥

परमहंस-मुनि-मन उल्लासिनि ।
रसिक-हृदय-रस-रासविलासिनि ॥
भुक्ति-मुक्ति-रति-प्रेम सुदासिनि ।
कथा अकिंचन प्रिय सुजान की ॥
॥ आरती अतिपावन पुरान की ॥

॥ इति श्रीमद्भागवतमहापुराण की आरती ॥

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

यह आरती श्रीमद्भागवत पुराण की महिमा का गुणगान करती है। प्रथम पद में इसे 'धर्म, भक्ति और विज्ञान की खान' कहा गया है। यह ग्रंथ शुकदेव जी के मुख से निकला हुआ वेदों का कल्पवृक्ष फल है, जो परमानंद और अमृत के समान रसमय है।

द्वितीय पद में इसे 'कलिमथ-मथनि' कहा गया है, अर्थात यह कलयुग के पापों को नष्ट करने वाली और त्रिताप (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) का निवारण करने वाली है। यह जन्म-मरण के भय को दूर कर हरि-चरित्र का गान करने वाली एक दिव्य औषधि है।

तृतीय पद में बताया गया है कि यह विषय-वासनाओं के मोह को नष्ट करती है और विवेक व वैराग्य को विकसित करती है। यह परमात्मा के रहस्य को प्रकाशित करने वाली परम ज्योति है। चतुर्थ पद में इसे परमहंसों के मन को उल्लासित करने वाली और रसिक भक्तों के हृदय में रास-विलास का आनंद भरने वाली बताया गया है। यह भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करने वाली है।

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
निगम-कल्प-फल वेदों रूपी कल्पवृक्ष का फल भागवत की उत्पत्ति
त्रिताप-निवारिणि तीनों दुखों को मिटाने वाली कष्टों से मुक्ति
अकिंचन जिसके पास कुछ न हो (निःस्वार्थ) भक्त की स्थिति

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल

श्रीमद्भागवत पुराण की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि जहाँ भागवत कथा का पाठ या आरती होती है, वहाँ साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वास होता है। यह आरती मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

आरती करने की सही विधि

आरती के समय शुद्ध घी का दीपक जलाएं। साथ में कपूर, धूप, पुष्प और नैवेद्य (भोग) रखें। आरती करते समय घंटी और शंख का नाद करना चाहिए। आरती को पहले भगवान के चरणों में, फिर नाभि, मुख और अंत में पूरे विग्रह पर घुमाना चाहिए। आरती के बाद 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है।

एक नजर में आरती की जानकारी

आरती का नाम श्रीमद्भागवतमहापुराण आरती
विषय भागवत महापुराण की महिमा
मुख्य भाव भक्ति, ज्ञान, वैराग्य
उपयुक्त अवसर भागवत कथा समापन, नित्य पूजा, एकादशी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: श्रीमद्भागवत आरती कब करनी चाहिए?
    उत्तर: इसे नित्य पूजा के अंत में या भागवत कथा के समापन पर करना चाहिए।
  • प्रश्न: क्या घर पर भागवत आरती की जा सकती है?
    उत्तर: हाँ, घर पर भागवत ग्रंथ को आसन पर विराजमान कर आरती की जा सकती है।
  • प्रश्न: भागवत पुराण को क्या माना जाता है?
    उत्तर: इसे साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वाङ्मय स्वरूप माना जाता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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