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श्री एकदन्त स्तोत्रम् (Shri Ekdant Stotram In Hindi) - Ganesh Stotram Ganesh Bhajan by Shubhangi Joshi - Bhaktilok

161 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री एकदन्त स्तोत्रम् (Shri Ekdant Stotram In Hindi) -


॥ श्री एकदन्त स्तोत्रम् ॥ 

महासुरं सुशांतं वै दृष्ट्वा विष्णुमुखा: सुरा: ।

भ्रग्वादयश्र्च मुनय एकदन्तं समाययु: ।।1।।


प्रणम्य तं प्रपूज्यादौ पुनस्तं नेमुरादरात् ।

तुष्टुवुर्हर्षसंयुक्ता एकदन्तं गणेश्र्वरम् ।।2।।


|| देवर्षय ऊचु:||

सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम् ।

अनादिमध्यांतविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।3।।


अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं ह्मभेदभेदादिविहीनमाद्यम्।

हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।4।।


विश्र्वादिभूतं ह्रदि योगिनां वै प्रत्यक्षरूपेण विभान्तमेकम् ।

सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।5।।


स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तं बिंदुस्वरूपा रचिता स्वमाया ।

तस्या स्ववीर्य प्रददाति यो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।6।।


त्वदीयवीर्येण समर्थभूता माया तया संरचितं च विश्र्वम् ।

नादत्मकं ह्मात्मतया प्रतीतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।7।।


त्वदीयसत्ताधरमेकदन्तं गणेशमेकं त्रयबोधितारम् ।

सेवन्त आपुस्तमजं त्रिसंस्थास्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।8।।


ततस्त्वया प्रेरित एव नादस्तेनेदमेवं रचितं जगद्वैतम्।

आनन्दरूपं समभावसंस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।।9।।


तदेव विश्र्वं कृपया तवैव सम्भूतमाद्यं तमसा विभातम्।

अनेकरूपं ह्मजमेकभूतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।।10।।


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ततस्त्वया प्रेरितमेव तेन सृष्टं सुसूक्ष्मं जगदेकसंस्थम् ।

सत्त्वात्म्कं श्र्वेतमनन्तमाद्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।11।।


तदेव स्वप्नं तपसा गणेशं संसिद्धिरूपं विविधं वभूव ।

तदेकरूपं कृपया तवापि तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।12।।


सम्प्रेरितं तच्य त्वया ह्रदिस्थं तथा सुसृष्टं जगदंशरूपम् ।

तेनैव जाग्रन्मयमप्रमेयं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।13।।


जाग्रत्स्वरूपं रजसा विभातं विलोकितं तत्कृपया यदैव ।

तदा विभिन्नं भवदेकरूपं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।14।।


एवं च सृष्ट्वा प्रक्रतिस्वभावात्तदन्तरे त्वं च विभासि नित्यम् ।

बुद्धिप्रदाता गणनाथ एकस्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।15।।


त्वदाज्ञया भांति ग्रहाश्र्च सर्वे नक्षत्ररूपाणि विभान्ति खे वै ।

आधारहीनानि त्वया धृतानि तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।16।।


त्वदाज्ञया सृष्टिकरो विधाता त्वदाज्ञया पालक एव विष्णु: ।

त्वदाज्ञया संहरते हरोऽपि तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।17।।


यदाज्ञया भूर्जलमध्यसंस्था यदाज्ञयाऽऽप: प्रवहन्ति नद्य: ।

सीमां सदा रक्षति वै समुद्रस्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।18।।


यदाज्ञया देवगणो दिविस्थो ददाति वै कर्मफलानि नित्यम् ।

यदाज्ञया शैलगणोऽचलो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।19।।


यदाज्ञया-शेष इलाधरो वै यदाज्ञया मोहकरश्र्च काल: ।

यदाज्ञया कालधरोऽर्यमा च तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।20।।


यदाज्ञया वाति विभाति वायुर्यदाज्ञयाऽग्निर्जठरादिसंस्थ: ।

यदाज्ञया-वै सचराचरं च तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।21।।


सर्वान्तरे संस्थिततेकगूढं यदाज्ञया सर्वमिदं विभाति ।

अनन्तरूपं ह्रदि बोधकं वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।22।।


यं योगिनो योगबलेन साध्यं कुर्वन्ति तं क: स्तवनेन नौति ।

अत: प्रणामेन सुसिद्धिदोऽस्तु तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।23।।


|| ग्रत्सप्तद उवाच ||

एवं स्तुत्वा च प्रह्लादं देवा: समुनयश्र्च वै ।

तूष्णींभावं प्रपद्येव ननृतुर्हर्षसंयुता: ।।24।।


स तानुवाच प्रोतात्मा ह्मेकदंत: स्तवेन वै ।

जगाद तान्महाभागान्देवर्षीन्भक्तवत्सल: ।।25।।


|| एकदंत उवाच ||

प्रसन्नोस्मि च स्तोत्रेण सुरा: सर्षिगणा: किल ।

वृणुतां वरदोऽहं वो दास्यामि मनसीप्सितम् ।।26।।


भवत्कृतं मदीयं वै स्तोत्रं प्रीतिप्रदं मम ।

भविष्यति न संदेह: सर्वसिद्धिप्रदायकम् ।।27।।


यं यमिच्छति तं तं वै दास्यामि स्तोत्रपाठत: ।

पुत्रपौत्रादिकं सर्वं लभते धनधान्यकम् ।।28।।


गजाश्र्वादिकमत्म्यन्तं राज्यभोगं लभेद्ध्रुवम्।

भुक्तिं मुक्तिं च योगं वै लभते शान्तिदायकम्।।29।।


मारणोंचटनादीनि राज्यबंधादिकं च यत् ।

पठतां श्रृण्वतां न्रणां भवेच्च बंधहीनता।।30।।


एकविंशतिवारं च श्लोकाच्श्रैवैकविंशतिम् ।

पठते नित्यमेवं च दिनानि त्वेकविंशतिम् ।।31।।


न तस्य दुर्लभं किंचित्त्रिषु लोकेशु वै भवेत् ।

असाध्यं साधयेन्मत्र्य: सर्वत्र विजयी भवेत् ।।32।।


नित्यं य: पठेत स्तोत्रं ब्रह्मभूत: स वै नर: ।

तस्य दर्शनत: सर्वे देवा: पूता भवन्ति वै ।।33।।


एवं तस्य वच: श्रुत्वा प्रह्रष्टा देवतर्षय: ।

ऊचु: करपुटा: सर्वे भक्तियुक्ता गजाननम् ।।34।।



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प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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