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सरस्वती स्तोत्रम् (Shri Saraswati Stotram Lyrics in Hindi) - Saraswati Stotram - Bhaktilok

128 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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सरस्वती स्तोत्रम् (Shri Saraswati Stotram Lyrics in Hindi) - Saraswati Stotram - Bhaktilok


सरस्वती स्तोत्रम् (Shri Saraswati Stotram Lyrics in Hindi) - 


|| विनियोग ||

ॐ अस्य श्री सरस्वतीस्तोत्रमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः।


|| गायत्री छन्द ||

श्री सरस्वती देवता। धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे विनियोगः।

आरूढ़ा श्वेतहंसे भ्रमति च गगने दक्षिणे चाक्षसूत्रं वामे हस्ते च

दिव्याम्बरकनकमयं पुस्तकं ज्ञानगम्या।

सा वीणां वादयंती स्वकरकरजपैः शास्त्रविज्ञानशब्दैः

क्रीडंती दिव्यरूपा करकमलधरा भारती सुप्रसन्ना॥1॥


श्वेतपद्मासना देवी श्वेतगन्धानुलेपना।

अर्चिता मुनिभिः सर्वैर्ऋषिभिः स्तूयते सदा।

एवं ध्यात्वा सदा देवीं वांछितं लभते नरः॥2॥


शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्यापिनीं

वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहम्‌।

हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥3॥


या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमंडितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युतशंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥4॥


ह्रीं ह्रीं हृद्यैकबीजे शशिरुचिकमले कल्पविस्पष्टशोभे

भव्ये भव्यानुकूले कुमतिवनदवे विश्ववन्द्यांघ्रिपद्मे।

पद्मे पद्मोपविष्टे प्रणजनमनोमोदसंपादयित्रि प्रोत्फुल्ल

ज्ञानकूटे हरिनिजदयिते देवि संसारसारे॥5॥


ऐं ऐं ऐं दृष्टमन्त्रे कमलभवमुखांभोजभूते स्वरूपे

रूपारूपप्रकाशे सकल गुणमये निर्गुणे निर्विकारे।

न स्थूले नैव सूक्ष्मेऽप्यविदितविभवे नापि विज्ञानतत्वे

विश्वे विश्वान्तरात्मे सुरवरनमिते निष्कले नित्यशुद्धे॥6॥


ह्रीं ह्रीं ह्रीं जाप्यतुष्टे हिमरुचिमुकुटे वल्लकीव्यग्रहस्ते

मातर्मातर्नमस्ते दह दह जडतां देहि बुद्धिं प्रशस्ताम्‌।

विद्ये वेदान्तवेद्ये परिणतपठिते मोक्षदे परिणतपठिते

मोक्षदे मुक्तिमार्गे मार्गतीतस्वरूपे भव मम वरदा शारदे शुभ्रहारे॥7॥


धीं धीं धीं धारणाख्ये धृतिमतिनतिभिर्नामभिः कीर्तनीये

नित्येऽनित्ये निमित्ते मुनिगणनमिते नूतने वै पुराणे।

पुण्ये पुण्यप्रवाहे हरिहरनमिते नित्यशुद्धे सुवर्णे

मातर्मात्रार्धतत्वे मतिमतिमतिदे माधवप्रीतिमोदे॥8॥


ह्रूं ह्रूं ह्रूं स्वस्वरूपे दह दह दुरितं पुस्तकव्यग्रहस्ते

सन्तुष्टाकारचित्ते स्मितमुखि सुभगे जृम्भिणि स्तम्भविद्ये।

मोहे मुग्धप्रवाहे कुरु मम विमतिध्वान्तविध्वंसमीडे

गीर्गौर्वाग्भारति त्वं कविवररसनासिद्धिदे सिद्दिसाध्ये॥9॥


स्तौमि त्वां त्वां च वन्दे मम खलु रसनां नो कदाचित्यजेथा

मा मे बुद्धिर्विरुद्धा भवतु न च मनो देवि मे यातु पापम्‌।

मा मे दुःखं कदाचित्क्कचिदपि विषयेऽप्यस्तु मे नाकुलत्वं

शास्त्रे वादे कवित्वे प्रसरतु मम धीर्मास्तु कुण्ठा कदापि॥10॥


इत्येतैः श्लोकमुख्यैः प्रतिदिनमुषसि स्तौति यो भक्तिनम्रो

वाणी वाचस्पतेरप्यविदितविभवो वाक्पटुर्मृष्ठकण्ठः।

स स्यादिष्टार्थलाभैः सुतमिव सततं पाति तं सा च देवी

सौभाग्यं तस्य लोके प्रभवति कविता विघ्नमस्तं प्रयाति॥11॥


निर्विघ्नं तस्य विद्या प्रभवति सततं चाश्रुतग्रंथबोधः

कीर्तिस्रैलोक्यमध्ये निवसति वदने शारदा तस्य साक्षात्‌।

दीर्घायुर्लोकपूज्यः सकलगुणानिधिः सन्ततं राजमान्यो

वाग्देव्याः संप्रसादात्रिजगति विजयी जायते सत्सभासु॥12॥


ब्रह्मचारी व्रती मौनी त्रयोदश्यां निरामिषः।

सारस्वतो जनः पाठात्सकृदिष्टार्थलाभवान्‌॥13॥


पक्षद्वये त्रयोदश्यामेकविंशतिसंख्यया।

अविच्छिन्नः पठेद्धीमान्ध्यात्वा देवीं सरस्वतीम्‌॥14॥


सर्वपापविनिर्मुक्तः सुभगो लोकविश्रुतः।

वांछितं फलमाप्नोति लोकेऽस्मिन्नात्र संशयः॥15॥


ब्रह्मणेति स्वयं प्रोक्तं सरस्वत्यां स्तवं शुभम्‌।

प्रयत्नेन पठेन्नित्यं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥16॥

॥इति श्रीमद्ब्रह्मणा विरचितं सरस्वतीस्तोत्रं संपूर्णम्‌॥


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "सरस्वती स्तोत्रम् (Shri Saraswati Stotram Lyrics in Hindi) - Saraswati Stotram - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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