Shri Shani Dev Arati

श्री शारदा माँ आरती (Shri Sharada Mata Aarati in Hindi) - Bhaktilok

168 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री शारदा माँ आरती (Shri Sharada Mata Aarati in Hindi) - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

माँ शारदा, जिन्हें साक्षात जगजननी, विद्या की देवी माँ सरस्वती और ज्ञान-विज्ञान की अधिष्ठात्री माना जाता है, उनकी उपासना सनातन धर्म में अनादिकाल से चली आ रही है। 'श्री शारदा माँ आरती' केवल कुछ पंक्तियों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक साधक के अंतःकरण से उठने वाली वह पावन पुकार है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर प्रज्ञा और चेतना के प्रकाश से जीवन को आलोकित कर देती है। मैहर (मध्य प्रदेश) स्थित त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माँ शारदा देवी के दरबार से जुड़ी यह आरती भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। संध्या बेला में जब भक्त पूरी श्रद्धा और तल्लीनता के साथ इस आरती का गान करते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो जाता है और मन को असीम शांति की अनुभूति होती है। इस लेख में हम श्री शारदा माँ आरती के संपूर्ण पाठ, उसका विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे साधक को माँ की कृपा प्राप्त करने में सुगमता हो सके।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Shri Sharada Mata Aarti Lyrics

भुवन विराजी शारदा, महिमा अपरम्पार।

भक्तों के कल्याण को, धरो मात अवतार ॥

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ।

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ।

नित गाऊँ मैया नित गाऊँ।

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

श्रद्धा को दीया प्रीत की बाती, असुअन तेल चढ़ाऊँ।

श्रद्धा को दीया प्रीत की बाती, असुअन तेल चढ़ाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

मन की माला आँख के मोती, भाव के फूल चढ़ाऊँ।

मन की माला आँख के मोती, भाव के फूल चढ़ाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

बल को भोग स्वांस दिन राती, कंधे से विनय सुनाऊँ।

बल को भोग स्वांस दिन राती, कंधे से विनय सुनाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

तप को हार कर्ण को टीका, ध्यान की ध्वजा चढ़ाऊँ।

तप को हार कर्ण को टीका, ध्यान की ध्वजा चढ़ाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

माँ के भजन साधु सन्तन को, आरती रोज सुनाऊँ।

माँ के भजन साधु सन्तन को, आरती रोज सुनाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

सुमर-सुमर माँ के जस गावें, चरनन शीश नवाऊँ।

सुमर-सुमर माँ के जस गावें, चरनन शीश नवाऊँ॥

दरश तोरे पाऊँ,

मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

श्री शारदा माँ की यह आरती अत्यंत भावुक और आत्मीय है। इसमें भौतिक पदार्थों (जैसे सोने-चांदी के आभूषण या महंगे पकवान) के स्थान पर भक्त अपनी आंतरिक भावनाओं, तपस्या, समर्पण और श्रद्धा को माँ के चरणों में अर्पित करता है।

आरती की शुरुआत में भक्त कहता है कि हे त्रिभुवन में विराजमान माँ शारदा, आपकी महिमा अपरंपार है। आप भक्तों के कल्याण के लिए ही अवतार धारण करती हैं। भक्त की इच्छा है कि वह निरंतर आपके दरबार में हाजिर होकर आपकी आरती गाता रहे।

अगले चरण में भक्त समर्पण की पराकाष्ठा दिखाते हुए कहता है कि उसने 'श्रद्धा' का दीया बनाया है, अपने हृदय की 'प्रीत' (प्रेम) की बाती जलाई है और अपनी विरह या भक्ति के 'असुअन' (आंसुओं) का तेल उसमें चढ़ाया है। वह किसी बाह्य वस्तु की अपेक्षा अपने भीतर के पवित्र भावों से माँ की आराधना कर रहा है। मन को माला बनाकर, आँखों के मोतियों और पवित्र भावों के फूलों से वह माँ का पूजन करता है। अपनी सांसों को ही माँ का भोग और अपने जीवन की प्रत्येक श्वास को उनकी सेवा में समर्पित कर रहा है।

भक्त आगे कहता है कि उसने अपनी तपस्या को ही माँ के लिए हार और ध्यान को ध्वजा के रूप में अर्पित किया है। संत महात्माओं के बीच बैठकर माँ के यश का गान करना और उनके चरणों में शीश नवाना ही उसका सबसे बड़ा सौभाग्य है। इस प्रकार यह आरती एक साधारण प्रार्थना न होकर आत्म-समर्पण का एक जीवंत दस्तावेज है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
भुवन लोक / ब्रह्मांड समस्त लोकों में व्याप्त चैतन्य शक्ति
अपरम्पार असीम / जिसकी कोई सीमा न हो माँ की अनंत कृपा और महिमा
असुअन आँसू भक्ति के आनंद या विरह में निकलने वाले पवित्र अश्रु
विनय प्रार्थना / नम्रता माँ के समक्ष भक्त का आत्मसमर्पण
ध्वजा पताका / झंडा विजय और उच्च आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक

आरती में वर्णित देवी माँ शारदा की महिमा | Glory of Goddess Sharada

माँ शारदा को विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और विवेक की देवी माना जाता है। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्थित माँ शारदा का ऐतिहासिक मंदिर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है, जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि आल्हा और उदल जैसे महान योद्धाओं ने सबसे पहले माँ शारदा की कठोर तपस्या कर उनकी कृपा प्राप्त की थी। माँ शारदा की शरण में आने से साधक की बुद्धि का विकास होता है, अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो छात्र, शोधकर्ता, संगीतकार और साहित्यकार माँ शारदा की नियमित आराधना करते हैं, उन्हें अपनी कला और विद्या मेंार अभूतपूर्व सफलता प्राप्त होती है।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Benefits

संध्या काल में माँ शारदा की आरती करने से घर में सकारात्मकता आती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। विद्या प्राप्ति के मार्ग में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से वाणी में शुद्धि और मधुरता आती है। बच्चों की स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि के लिए माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ संध्या समय इस पावन आरती का गान करें। यह आरती साधक को अहंकार से मुक्त कर विनम्रता का पाठ पढ़ाती है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

माँ शारदा की आरती करने के लिए प्रातःकाल या संध्याकाल का समय सबसे उत्तम माना जाता है। पूजा की थाली में निम्नलिखित सामग्रियां रखनी चाहिए:

  • शुद्ध घी का दीपक (जो श्रद्धा और प्रीत का प्रतीक है)
  • कपूर
  • धूप या अगरबत्ती
  • ताजे पुष्प (गेंदा, गुलाब या सफेद कमल जो माँ को अति प्रिय है)
  • रोली, अक्षत (चावल) और चंदन
  • नैवेद्य या फल का भोग

सबसे पहले माँ शारदा की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से पवित्र कर रोली-चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप प्रज्वलित करें। फिर श्रद्धापूर्वक हाथ में आरती की थाली लेकर घड़ी की सुई की दिशा में (clockwise) धीरे-धीरे घुमाते हुए इस आरती का सस्वर गान करें।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti Rules

घर में माता शारदा की आरती करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • पूजा स्थान पूर्णतः स्वच्छ और शांत होना चाहिए।
  • आरती गाते समय उच्चारण स्पष्ट और भावपूर्ण होना चाहिए।
  • दीपक या कपूर जलाते समय अग्नि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
  • आरती संपन्न होने के बाद दोनों हाथों से आरती की ज्योति को अपनी आँखों से लगाएं और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
  • श्री हनुमान चालीसा या अन्य देव स्तुति की तरह ही नियमितता और अनुशासन का पालन करें।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

श्री शारदा माँ की यह आरती हमें सिखाती है कि ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए किसी महंगे आभूषण या आडंबर की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्चे प्रेम, पवित्र भावनाओं और समर्पण की आवश्यकता होती है। जब हम अपने अहंकार का त्याग कर अपनी सांसों और कर्मों को माँ को समर्पित कर देते हैं, तो जीवन स्वतः ही सफल हो जाता है। यह आरती हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखने और निरंतर विद्या एवं सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

एक नजर में आरती की जानकारी | Aarti Quick Information

विवरण तथ्य
आरती का नाम श्री शारदा माँ आरती (Shri Sharada Mata Aarati)
ाराध्य देवी माँ शारदा / माँ सरस्वती
प्रमुख पीठ मैहर, मध्य प्रदेश (त्रिकूट पर्वत)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक भाषा
मुख्य भाव समर्पण, श्रद्धा, विनय और भक्ति
उपयुक्त अवसर संध्या वंदन, नवरात्रि, बसंत पंचमी, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस आरती का मुख्य उद्देश्य माँ शारदा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा, प्रेम और समर्पण व्यक्त करना तथा उनसे विद्या, बुद्धि और ज्ञान का वरदान प्राप्त करना है।

माँ शारदा का विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर नगर में त्रिकूट पर्वत पर स्थित है।

हाँ, इस पावन आरती को प्रातः काल अथवा संध्या काल की दैनिक पूजा के समय नियमित रूप से गाया जा सकता है। विशेषकर नवरात्रि और बसंत पंचमी पर इसका विशेष महत्व है।

माँ शारदा विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी उपासना करने से बुद्धि तीक्ष्ण होती है, एकाग्रता बढ़ती है और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है।

आरती के समय शुद्धता, स्पष्ट उच्चारण, मन की एकाग्रता और पूरी श्रद्धा का होना आवश्यक है। साथ ही दीपक को सही दिशा में घुमाते हुए आरती गाएं।

हाँ, आप अपने घर के पूजा स्थल पर माँ शारदा या माँ सरस्वती का चित्र अथवा मूर्ति स्थापित कर विधि-विधान से उनकी आरती कर सकते हैं।

इसका मुख्य संदेश बाह्य आडंबरों से दूर रहकर आंतरिक प्रेम, भक्ति और समर्पण के साथ ईश्वर की आराधना करना है।

बसंत पंचमी का दिन माँ शारदा (सरस्वती) के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष पूजा, हवन और आरती करने से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तीलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन ग्रंथों, लोक परंपराओं और भक्तों के अनुभवों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, सरल और उपयोगी धार्मिक सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस लेख में भाषा की शुद्धता और सांस्कृतिक मर्यादा का पूर्ण ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं देवी भागवत पुराण
  • मैहर क्षेत्र की स्थानीय लोक कथाएं एवं पारंपरिक भजन संग्रह
  • भारतीय संगीत और भक्ति साहित्य परंपरा

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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