सुब्रमण्य अष्टकम (Subramanya Ashtakam in Hindi) - Karavalamba Stotram Sri Subramanya Ashtakam -
सुब्रमण्य अष्टकम (Subramanya Ashtakam in Hindi) -
हे स्वामीनाथ करुणाकर दीना बंधो
श्री परावतीसा मुख पंकजा पद्म बंधो
श्रीसाधि देव गण पूजिता पद पद्म
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंबम ||1||
देवाधि देव सुथा, देवा गणधि नाधा
देवेन्द्र वन्ध्या मृदु पंकजा मंजू पदा
देवर्षि नारद मुनीन्द्र सुगीता कीर्थे
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||2||
नित्यान्ना दाना निरथखिला रोग हारिन
भाग्य प्रधान परिपूर्ण भक्त काम
श्रुत्यगमा प्रणव वाच्य निज स्वरूपा
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||3||
क्रौंच सुरेंद्र परिगंदना शक्ति सूला
चापा थी शास्त्र परिमंदिता दिव्य पनाई
श्री कुंडलीसा द्रुथा थुंडा सिखेन्द्र वाहा
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||4||
देवाधि देव राधा मंडल मध्य मेथ्या
देवेन्द्र पीड़ा नगरं द्रुदा चापा हस्त
सूरं निहथ्य सुरा कोटिभिरद्यमान
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||5||
हीराधि रत्न वर युक्ता किरिदा हारा
केयूर कुंडला लसथ कवचभिरामा
हे वीरा थरका जया अमरा ब्रुंदा वंध्या
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||6||
पंचाक्षरधि मनु मंथृथा गंगा थयोयै
पंचामृतै प्रौधिथेन्द्र मुखैर मुनीन्द्र्यै
पट्टभिषिक्त मघवथ नयसा नाधा
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||7||
श्री कार्तिकेय करुणामृत पूर्ण दृष्ट्य
कामधि रोग कलुषी कृत दृष्टा चित्तम्
सिकथ्वा थू ममावा कला निधि कोटि कंथा
वल्लीसा नाधा मम देहि करावलंभम ||8||
सुब्रह्मण्यष्टकं पुण्यं ये पदंति द्विजोतम
वे सर्वे मुक्तिमयंती सुब्रह्मण्य प्रसादथा
सुब्रह्मण्यष्टकामिधं प्रातः उठाय य पडेथ
कोदि जन्म कृतं पापं तथ क्षणाद तस्य नस्याति
इति श्री सुब्रमण्यम अष्टकं संपूर्णम् ||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "सुब्रमण्य अष्टकम (Subramanya Ashtakam in Hindi) - Karavalamba Stotram Sri Subramanya Ashtakam - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

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