होली का पावन पर्व भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की लीलाओं का स्मरण कराता है, किंतु ब्रज की परंपरा में 'रसिया' गायन का विशेष महत्व है। "रसिया को नार बनाओ री" एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण होली गीत है, जिसमें सखियाँ भगवान श्री कृष्ण (रसिया) को श्रृंगार करके 'नार' (स्त्री) का रूप देने की लीला कर रही हैं। यह भजन न केवल ब्रज की लठमार होली और फाग उत्सव की जीवंतता को दर्शाता है, बल्कि इसमें निहित 'सखी भाव' भक्ति की पराकाष्ठा है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के साथ एक अंतरंग और आनंदमयी संबंध स्थापित करते हैं, जहाँ मर्यादा और प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
कटि लहँगा, गल माल, कंचुकी,
वाह रे रसिया, वाह!
चुनरी शीश उढ़ाओ री, रसिया को...
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
बाँह बरा बाजूबन्द सोहे,
बाँह बरा बाजूबन्द सोहे,
नकबेसर पहनाओ री, रसिया को...
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
गाल गुलाल, दृगन बिच काजल,
गाल गुलाल, दृगन बिच काजल,
बेंदी भाल लगाओ री, रसिया को...
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
आरसी-कंगन-छल्ला पहनाओ,
आरसी-कंगन-छल्ला पहनाओ,
पैंजनी पाँव सजाओ री, रसिया को...
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
श्यामसुंदर पे ताली बजा के,
श्यामसुंदर पर ताली बजा के,
यशुमती निकट नचाओ री, रसिया को...
रसिया को नार बनाओ री, रसिया को...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ सखियों द्वारा कृष्ण के प्रति किए गए 'श्रृंगार' और 'लीला' में निहित है। यहाँ 'रसिया' शब्द भगवान श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो रसों के सागर हैं। सखियाँ उन्हें स्त्री का वेश धारण कराकर उनकी सुंदरता को निहारना चाहती हैं। लहँगा, कंचुकी, चुनरी, बाजूबंद और नकबेसर (नाक का आभूषण) पहनाकर वे कृष्ण को एक गोपी का रूप दे रही हैं। यह लीला 'सखी भाव' की भक्ति को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपने भगवान को अपने ही जैसा मानकर उनके साथ खेलता है। अंत में, यशोदा मैया के सामने उन्हें नचाने का भाव यह दर्शाता है कि कृष्ण की बाल-लीलाएँ और उनका यह रूप माँ यशोदा के लिए परम आनंद का स्रोत है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति का प्रकार: यह भजन 'सखी भाव' और 'वात्सल्य भाव' का मिश्रण है।
- सांस्कृतिक महत्व: ब्रज क्षेत्र में होली के दौरान 'रसिया' गायन का विशेष स्थान है, जो लोक संस्कृति और भक्ति का संगम है।
- आनंदमयी भक्ति: यह भजन ईश्वर के साथ एक मित्रवत और आनंदमयी संबंध को प्रोत्साहित करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को होली के दिनों में, फाल्गुन मास की पूर्णिमा के आसपास, या किसी भी 'होली मिलन' समारोह में गाया जा सकता है। इसे ढोलक और मंजीरे की थाप पर गाने से इसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रसिया | भगवान श्री कृष्ण (रसों के स्वामी) |
| नार | स्त्री / नारी |
| कटि | कमर |
| कंचुकी | चोली / ब्लाउज |
| नकबेसर | नाक का आभूषण (नथ) |
| दृगन | आँखों में |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | रसिया को नार बनाओ री |
| आराध्य | भगवान श्री कृष्ण |
| भाषा | ब्रज मिश्रित हिंदी |
| विषय | होली लीला / श्रृंगार |
| अवसर | होली उत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्ति परंपरा और लोक गीतों के आधार पर तैयार की गई है। "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत इसे भक्तों की सुविधा के लिए संकलित किया गया है।
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