श्री साईनाथ महिम्नस्तोत्र सदा सत्स्वरूपं (Shri Sainath Mahimna Stotra Sada Satswarupam Lyrics in Hindi) -
सदासत्स्वरूपं चिदानन्दकन्दं
जगत्सम्भवस्धान संहार हेतुं ।
स्वभक्तेच्छया मानुषं दर्शयन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। १ ।।
भवध्वान्त विध्वंस मार्ताण्डमीड्यं
मनोवागतीतं मुनिर् ध्यान गम्यं ।
जगद्व्यापकं निर्मलं निर्गुणं त्वां
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। २ ।।
भवाम्भोदि मग्नार्धितानां जनानां
स्वपादाश्रितानां स्वभक्ति प्रियाणां ।
समुद्दारणार्धं कलौ सम्भवन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ३ ।।
सदानिम्ब वृक्षस्यमुलाधि वासात्
सुधास्राविणं तिक्त मप्य प्रियन्तं ।
तरुं कल्प वृक्षाधिकं साधयन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ४ ।।
सदाकल्प वृक्षस्य तस्याधिमूले
भवद्भावबुद्ध्या सपर्यादिसेवां ।
नृणां कुर्वतां भुक्ति–मुक्ति प्रदन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ५ ।।
अनेका शृता तर्क्य लीला विलासै:
समा विष्कृतेशान भास्वत्र्पभावं ।
अहम्भावहीनं प्रसन्नात्मभावं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ६ ।।
सतां विश्रमाराम मेवाभिरामं
सदासज्जनै संस्तुतं सन्नमद्भि: ।
जनामोददं भक्त भद्र प्रदन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ७ ।।
अजन्माद्यमेकं परम्ब्रह्म साक्षात्
स्वयं सम्भवं राममेवावतीर्णं ।
भवद्दर्शनात्सम्पुनीत: प्रभोहं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं ।। ८ ।।
श्री साईंशकृपानिधे खिलनृणां सर्वार्थसिद्धिप्रद ।
युष्मत्पादरज: प्रभावमतुलं धातापि वक्ताक्षम: ।
सद्भक्त्या शरणं कृताञ्जलिपुट: संप्रापितोस्मि प्रभो
श्रीमत्साईपरेश पाद कमलान्यानछरणयं मम ।। ९ ।।
साईरूपधर राघवोत्तमं
भक्तकाम विबुध द्रुमं प्रभुं ।
माययोपहत चित्त शुद्धये
चिंतयाम्यह महर्निशं मुदा ।। १० ।।
शरत्सुधांशु प्रतिमं प्रकाश
कृपातपत्रं तव साईनाथ ।
त्वदीयपादाब्जसमाश्रितानां
स्वच्छयया तापमपाकरोतु ।। ११ ।।
उपसनादैवत साईनाथ
स्तवैमर्यो पासनिना स्तुतस्वम ।
रमेन्मनो मे तव पाद्युग्मे
भ्रुङ्गो यथाब्जे मकरंदलुब्ध: ।। १२ ।।
अनेकजन्मार्जितपापसंक्षयो
भवेद्भावत्पाद सरोज दर्शनात ।
क्षमस्व सर्वानपराध पुंजकान्
प्रसीद साईश सद्गुरो दयानिधे ।। १३ ।।
श्री साईनाथ चरणांमृतपूतचित्तास्
तत्पादसेवानरता: सततं च भक्त्या ।
संसारजन्य दुरितौध विनिर्गतास्ते
कैवल्यधाम परमं समवाप्नुवन्ति ।। १४ ।।
स्तोत्रमेतत्पठेद्भक्त्या यो नरस्तन्मना: सदा ।
सदगुरो: साइनाथस्य कृपापात्रं भवेद ध्रुवम ।। १५ ।।
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री साईनाथ महिम्नस्तोत्र सदा सत्स्वरूपं (Shri Sainath Mahimna Stotra Sada Satswarupam Lyrics in Hindi) - Sai Stotram - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।
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