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श्री कृष्ण शरणम ममः धुन (Shri Krishna Sharanam Mamah Dhun Lyrics in Hindi) - by Hemant Chauhan Krishna Bhajan - Bhaktilok

1,400 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण की भक्ति: श्री कृष्ण शरणम ममः धुन

भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए इस भक्ति गीत का नियमित गायन करें।

 श्री कृष्ण शरणम ममः धुन (Shri Krishna Sharanam Mamah Dhun Lyrics in Hindi) - श्री कृष्ण शरणम ममकदम केरी डालो बोले, श्री कृष्णजमुना केरी पालो बोले, श्री कृष्णव्रज चोरासी कोस बोले, श्री कृष्णकुंद कुंद नी सिदियो बोले, श्री कृष्णकमल कमल पर मधुकर बोले, श्री कृष्णडाल-डाल पर पैक्सी बोले, श्री कृष्णवृन्दावन न वृक्षो बोले, श्री कृष्णगोकलियाणि गायो बोले, श्री कृष्णश्री कृष्ण शरणम ममकुंज कुंज वन उपवन बोले, श्री कृष्णव्रज भूमिना रजकण बोले, श्री कृष्णरास रमता गोपी बोले, श्री कृष्णधेनु चरावता गोप बोले, श्री कृष्णश्री कृष्ण शरणम ममःवाजा ने तबलामा बोले, श्री कृष्णशरणाई ने तम्बूरा बोले, श्री कृष्णनृत्य कराति नारी बोले, श्री कृष्णकेसर केरी क्यारी बोले, श्री कृष्णश्री कृष्ण शरणम मम
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की श्रृंखला भगवान श्री कृष्ण की गोपाल लीला का बखान करती है। शुरुआती पंक्तियाँ, 'श्री कृष्ण शरणम मम' का आशय है कि भक्त भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाता है। यह भक्ति की गहराई को दर्शाती है। इसके माध्यम से भक्त अपनी सम्पूर्ण आस्था श्री कृष्ण में समर्पित करता है। 'जमुना केरी पालो बोले' में यमुना नदी की महिमा का वर्णन किया गया है, जो श्री कृष्ण के लीलाभूमि वृन्दावन की प्रतीक मानी जाती है। आगे 'वृंदावन न वृक्षो बोले' में वृंदावन के उन वृक्षों का उल्लेख है, जिन्होंने श्री कृष्ण की लीलाओं को देखा है। इस गीत की हर पंक्ति में भक्ति भावना की अभिव्यक्ति होती है, जो भक्त की श्री कृष्ण के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

इस भजन में भावनाएँ और अध्यात्म का एक गहरा संबंध है। जब भक्त श्री कृष्ण के प्रति नतमस्तक होते हैं, तो वे उन्हें अपने संकटों से मुक्ति दिलाने वाले, प्रेम और खुशी के प्रवर्तक के रूप में देखते हैं। विशेष रूप से 'गोकलियाणि गायो बोले' का तात्पर्य है कि भगवान जब गोकुल में रहते थे, तब गायों के साथ उनका संबंध कितना मधुर और निकट था। इस संदर्भ में 'धेनु चरावता गोप बोले' पंक्ति से यह दिखता है कि श्री कृष्ण का जीवन आसरामय और भरी लीलाओं से भरा हुआ था। ये पंक्तियाँ भक्त का हृदय श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति से परिपूर्ण करती हैं, जिससे आत्मा को शांति का अनुभव होता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का सुन्दर चित्रण देखने को मिलता है। भक्तों को यह दर्शाया गया है कि वे अपनी संपूर्ण भक्ति श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित करें। भक्ति की इस प्रक्रिया में भक्त को अपने अहंकार को छोड़कर, श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण विश्वास प्रस्तुत करना होता है। 'श्री कृष्ण शरणम ममः' यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि यह नवद्रव्य भक्ति की धारणा है। यहाँ श्री कृष्ण की भक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति अपने जीवन में उनके मार्ग का अनुसरण करके, संपूर्ण सुख और शांति को प्राप्त कर सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में श्री कृष्ण की असीम महिमा और उनके प्रति भक्ति की गूढ़ता को दर्शाता है। पुराणों में श्री कृष्ण को 'राधेश्याम' एवं 'गोपाल' के रूप में दर्षित किया गया है। इस भजन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह भक्तों को श्री कृष्ण की लीलाओं से अवगत कराता है, और भारतीय पौराणिक कथाओं में उनकी विभिन्न लीलाओं को सिद्ध करता है। यह भजन सिर्फ एक साधना नहीं, बल्कि एक साधना के माध्यम से आत्मा के उद्धार का मार्ग है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता, और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह भक्त को निरंतर सकारात्मकता से भरता है, जिससे जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। इस भजन का जाप करने से मन में कृष्ण प्रेम का भाव विकसित होता है और साधक को आत्म ज्ञान की ओर अग्रसर करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सामंजस्य से जाप सुबह या शाम के समय करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा स्थल पर एक दीपक जलाएँ, फूल और फल अर्पित करें, और मन को शांत रखते हुए इस भजन का गान करें। साधना के समय भक्त को ध्यान केंद्रित करने और श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भाव मन में लाने पर ध्यान देना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री कृष्ण शरणम ममः धुन का महत्व क्या है?

यह भजन भगवान श्री कृष्ण की अनेक लीलाओं का प्रदर्शन करता है, जिससे भक्तों का प्रेम और भक्ति बढ़ता है। यह भक्ति का सुन्दर साधन है।

क्या इस भजन का गायन किसी विशेष दिन किया जा सकता है?

इस भजन का गायन हर दिन किया जा सकता है, विशेषकर कृष्ण जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा के समय यह अधिक लाभदायक होता है।

इस भजन को गाने का सही तरीका क्या है?

इस भजन को प्रेम और भक्ति से गाना चाहिए। ध्यान दें कि हर पंक्ति का भाव समझो और उस भाव से गाओ, जिससे आत्मा को शांति मिले।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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