द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया लिरिक्स (Dwar Tere Maa Taj Sansar Mai Aaya Lyrics in Hindi) - Matarani Bhajan Vikas Jain - Bhaktilok
माता रानी की आराधना, उनकी असीम करुणा और सांसारिक बंधनों से मुक्ति पाकर माँ के चरणों में शरण लेने का यह पावन भजन 'द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया' (Dwar Tere Maa Taj Sansar Mai Aaya) एक अत्यंत भावुक और आत्मिक शांति प्रदान करने वाली प्रस्तुति है। प्रसिद्ध गायक एवं लेखक विकास जैन (Vikas Jain) द्वारा रचित और स्वरबद्ध इस भजन में माँ अम्बे, जगदम्बा भवानी की महिमा और उनके दरबार में मिलने वाले परम सुख का अत्यंत सुंदर सजीव चित्रण किया गया है। जब मनुष्य इस भौतिक संसार के दुखों, प्रपंचों और भवसागर के तूफानों से थक-हार जाता है, तब केवल माँ की ममतामयी छांव ही उसे शीतलता और मोक्ष का अनुभव कराती है। राजान वासुदेव की मनमोहक धुन और रामपुर के संगीत संयोजन से सजा यह माता का भजन हर भक्त के हृदय में श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे आप भी माँ भगवती के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव अनुभव कर सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया
मेरे मन उपवन को मैया तूने ही महकाया
माँ तूने ही महकाया...
कितने करे प्रयास माँ अम्बे मैंने इस भव सागर में
माँ मैंने इस भव सागर में
तेरी कृपा का एक सितारा जैसे चमका अम्बर में
माँ जैसे चमका अम्बर में
मेरी नाव को तूफानों से तूने पार लगाया
माँ तूने पार लगाया...
जगह जगह में राह भटकता दर दर ठोकर खाता
माँ दर दर ठोकर खाता
तेरे भवन का मिला जो रस्ता कैसे ना अपनाता
माँ कैसे ना अपनाता
तेरे ही चरणों में मैंने सुख शान्ति को पाया
माँ सुख शांति को पाया...
कितना ताप मैं जन्मो से माँ सेह्ता ही हूँ आया
माँ सेह्ता ही हूँ आया
तेरी प्रेम कृपा को पाकर चन्दन सी हुई काया
माँ चन्दन सी हुई काया
तेरी ही ममता की छाँव में मैंने अमृत पाया
माँ मैंने अमृत पाया...
Song Credits & Information:
Song: Dwar Tere Maa
Singer & Writer: Vikas Jain
Music: Rampal
All Production: Ambience Series Films
Dhun: Rajan Vasudev
Video Editing: Shravan Kumar
Category: Hindi Devotional (Mata Ke Bhajan)
Producers: Ramit Mathur
Label: Yuki
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
विकास जैन द्वारा रचित इस अद्भुत भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर छिपी जिज्ञासा और माँ के प्रति अगाध प्रेम को प्रकट करता है। आइए इस भजन के मर्म को विस्तार से समझें:
मukhda (मुखड़ा): भक्त अपनी इष्ट देवी माँ दुर्गा से कहता है कि हे माँ! इस नश्वर संसार के मोह-माया और बंधनों का त्याग करके मैं केवल तेरे द्वार पर आया हूँ। जिस प्रकार बसंत के आने से उपवन खिल उठता है, उसी प्रकार तेरे चरणों की धूल और तेरी कृपा ने मेरे सूने मन रूपी उपवन को महका दिया है।
प्रथम अंतरा: भक्त स्वीकार करता है कि उसने इस भवसागर (संसार रूपी समुद्र) को पार करने के लिए अपने जीवन में अनगिनत प्रयास किए, किंतु वह असफल रहा। ऐसे संकट के समय, जब जीवन रूपी नैया बीच भंवर में फंस गई थी, तब तेरी कृपा का एक चमकीला सितारा आकाश में प्रकट हुआ। हे माँ! तूने ही मेरी जीवन की नाव को विकट तूफानों से सुरक्षित बाहर निकालकर पार लगाया है।
द्वितीय अंतरा: सांसारिक मोह के पीछे भागते हुए मनुष्य जीवन भर राह भटकता रहता है और दर-दर ठोकरें खाता है। परंतु जब उसे सद्गुरु या माँ के पवित्र भवन का मार्ग मिल जाता है, तो वह उसे सहर्ष अपना लेता है। भक्त कहता है कि हे अम्बे! तेरे ही चरणों में आकर मुझे उस परम सुख और आंतरिक शांति की प्राप्ति हुई है, जिसकी तलाश मुझे उम्र भर थी।
तृतीय अंतरा: मनुष्य अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण जन्म-जन्मांतर से ताप (कष्ट और संताप) सहता चला आ रहा है। किंतु जब माँ की प्रेममयी कृपा का स्पर्श मनुष्य को मिलता है, तो उसकी काया (शरीर) और आत्मा चंदन के समान पवित्र और शीतल हो जाती है। माँ की ममता की शीतल छाया में ही भक्त को वास्तविक अमृत की प्राप्ति होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह एक जीवात्मा की परमात्मा (माता जगदम्बा) के प्रति पुकार है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समर्पण का भाव: यह भजन साधक को अहंकार त्यागकर माँ के चरणों में संपूर्ण समर्पण करने की प्रेरणा देता है।
- भवसागर से मुक्ति: जीवन के दुखों और कठिनाइयों (तूफानों) से उबरने के लिए माता की कृपा को सर्वोपरि बताया गया है।
- शांत और मधुर संगीत: राजान Vasudev की धुन और रामपुर के संगीत ने इस भजन को मानसिक शांति देने वाला बनाया है।
- संसार की असारता: भौतिक सुखों के पीछे भटकने वाले मन को सही राह दिखाने का माध्यम माँ का दरबार है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
माता रानी के इस दिव्य भजन का गायन और श्रवण निम्नलिखित अवसरों पर अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- दैनिक पूजा के समय: सुबह या संध्याकालीन पूजा के दौरान दीप प्रज्वलित करके इस भजन का श्रवण करने से मन को एकाग्रता मिलती है।
- नवरात्रि के पावन दिन: शारदीय या चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में माता के जागरण, चौकी या संध्या आरती के समय यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
- माता के सत्संग में: सामूहिक संकीर्तन और माता के भक्तों की मंडली में इस भजन को गाने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
- मानसिक अशांति के समय: जब भी जीवन में कठिनाइयां आएं, इस भजन को सुनने से आंतरिक संबल प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा (माता अम्बे, जगदम्बा) हैं, जिन्हें आदिशक्ति, महामाया और जगतजननी के रूप में पूजा जाता है। हिंदू सनातन परंपरा में माता को सभी जीवों की माता माना गया है, जो अपने बच्चों की हर पुकार सुनती हैं और उनके संकटों का निवारण करती हैं। इसके रचयिता और गायक विकास जैन हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से इस भक्ति गीत को जीवंत किया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
युकी (Yuki) म्यूजिक लेबल और एम्बिएंस सीरीज फिल्म्स के बैनर तले प्रस्तुत यह भजन आधुनिक भक्ति संगीत शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। गीतकार विकास जैन ने आम भक्त के मन की पीड़ा और माता के प्रति उसकी अटूट निष्ठा को बहुत ही सरल हिंदी शब्दों में पिरोया है। रामपाल जी का संगीत संयोजन इस रचना को एक दिव्य गहराई प्रदान करता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी है, जिसमें काव्यात्मकता का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। 'मन उपवन', 'भव सागर', 'कृपा का एक सितारा', और 'चंदन सी हुई काया' जैसे रूपकों (Metaphors) का सुंदर प्रयोग करके गीत के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा दिया गया है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: जीवन में शांति पाने के लिए 'मैं' और 'मेरे' का भाव छोड़कर माँ के प्रति शरणागति अपनानी चाहिए।
- धैर्य और विश्वास: विपत्तियों के समय घबराने के बजाय माता की कृपा पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- भक्ति ही मार्ग है: संसार की ठोकरों से बचने का एकमात्र उपाय ईश्वर या माता की शरण में जाना है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| तज संसार | संसार का मोह त्याग कर | भौतिक बंधनों से मुक्ति |
| भव सागर | संूसार रूपी दुखों का समुद्र | जीवन की कठिनाइयां |
| ताप | कष्ट, संताप और पीड़ा | जन्मो-जन्मांतर के कर्म फल |
| चंदन सी काया | पवित्र, शीतल और सुगंधित शरीर | माता की कृपा से मिलने वाली शुद्धि |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि भक्त सब कुछ छोड़कर अपनी माता के चरणों में शरण ले रहा है।
"मेरी नाव को तूफानों से तूने पार लगाया..." - कठिन परिस्थितियों में माता ही रक्षक बनकर जीवन की नैया को पार लगाती है।
"तेरे ही चरणों में मैंने सुख शान्ति को पाया..." - वास्तविक शांति भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि माँ के चरणों की भक्ति में है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत लाभकारी होता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया (Dwar Tere Maa Taj Sansar Mai Aaya) |
| आराध्य देवी | माता दुर्गा / अम्बे भवानी |
| गायक एवं लेखक | विकास जैन (Vikas Jain) |
| संगीतकार | रामपाल (Rampal) |
| संगीत लेबल | युकी (Yuki) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित लोक शैली |
| मुख्य भाव | समर्पण, शरणागति और माता की ममता |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
'द्वार तेरे माँ तज संसार मैं आया' भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन के प्रसिद्ध गायक और गीतकार विकास जैन (Vikas Jain) हैं।
यह भजन किस म्यूजिक लेबल के तहत रिलीज किया गया है?
यह भजन प्रसिद्ध भक्ति संगीत लेबल 'युकी' (Yuki) और एम्बिएंस सीरीज फिल्म्स के माध्यम से रिलीज किया गया है।
इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह भजन सिखाता है कि सांसारिक दुखों और भवसागर से पार पाने का एकमात्र मार्ग माता की शरण में जाना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण रखना है।
इस भजन को कब सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?
इसे नवरात्रि के दिनों में, सुबह-शाम की पूजा के समय या जब भी मन अशांत हो, सुना जा सकता है।
इस भजन की धुन किसने तैयार की है?
इस भजन की मनमोहक धुन राजान वासुदेव (Rajan Vasudev) द्वारा तैयार की गई है।
क्या इस भजन को माता की चौकी या जागरण में गाया जा सकता है?
हाँ, यह माता के जागरण, चौकी और संकीर्तन कार्यक्रमों के लिए एक अत्यंत उपयुक्त और लोकप्रिय भजन है।
माता रानी के दर्शन और कृपा पाने के लिए सबसे जरूरी क्या है?
माता रानी की कृपा पाने के लिए अहंकार का त्याग, निर्मल हृदय और उनके चरणों में अटूट विश्वास का होना आवश्यक है।
क्या इस भजन के माध्यम से मानसिक शांति मिल सकती है?
निश्चित रूप से, इस भजन के भावपूर्ण शब्द और संगीत श्रोता को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री (भक्तलोक के उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुसार) पाठकों को माता रानी के भजनों की सही जानकारी, लिरिक्स और उनका आध्यात्मिक अर्थ समझाने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रयुक्त सभी विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कलात्मक और धार्मिक स्रोतों पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक माता के भजन एवं संकीर्तन परंपरा
- युकी म्यूजिक ऑफिशियल रिलीज आर्काइव
- वैदिक सनातन देवी आराधना पद्धतियां
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