gurudev Bhajan

ले गुरु का नाम ले गुरु का नाम (Le guru ka naam le guru ka naam Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

165 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"ले गुरु का नाम ले गुरु का नाम" एक अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायक भजन है, जो साधक को संसार की नश्वरता से हटाकर गुरु के शाश्वत चरणों में समर्पित होने का मार्ग दिखाता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो अपने जीवन की पतवार को सद्गुरु के हाथों में सौंपकर भवसागर से पार होना चाहते हैं। गुरु की महिमा अपरंपार है, और यह भजन उसी करुणा और दयालुता का गुणगान करता है। इस भजन का भाव 'शरणागति' (Surrender) है, जहाँ भक्त यह स्वीकार करता है कि इस संसार में गुरु ही एकमात्र सहारा हैं जो दीन-दुखियों के दामन को खुशियों से भर सकते हैं। सत्संग, गुरु पूर्णिमा, या दैनिक ध्यान के समय इस भजन का गायन मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ले गुरु का नाम ले गुरु का नाम,
बंदे यही तो सहारा है।
ले गुरु का नाम ले गुरु का नाम,
ये जग का पालनहारा है॥

तारीफ़ क्या करूं इस दीन दाता की,
दयालु नाम है।
दीन दुखियों के दामन को,
भर देना गुरु का काम है।
लाखों की तकदीर को,
इस मालिक ने संवारा है,
ये जग का पालनहारा है॥

क्या भरोसा है इस जिंदगानी का,
गुरु को याद कर।
क्या सोचता है अनमोल जीवन को,
ना तू बर्बाद कर।
सौंप दे पतवार फिर,
तो पास में किनारा है,
ये जग का पालनहारा है॥

कौन है तेरा क्या साथ जाएगा,
गुरु का ध्यान कर।
व्यर्थ है काया धोखे की है माया,
गुरु से पहचान कर।
बनवारी नादान तूने,
गुरु क्यों बिसारा है,
ये जग का पालनहारा है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल संदेश 'गुरु-भक्ति' है। भजन की पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि यह संसार क्षणभंगुर है। यहाँ कोई भी वस्तु या व्यक्ति स्थायी नहीं है। कवि 'बनवारी' जी के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मनुष्य अपनी व्यर्थ की चिंताओं और माया के जाल में फंसकर अपने अनमोल जीवन को नष्ट कर रहा है।

भजन का भावार्थ यह है कि जब हम अपने जीवन की डोर (पतवार) गुरु को सौंप देते हैं, तो वे हमें इस संसार रूपी सागर से सुरक्षित पार लगा देते हैं। गुरु 'दीन-दाता' हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने भक्तों के दुखों को हर लेते हैं। यह भजन हमें आत्म-चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है कि अंत समय में केवल गुरु का नाम और उनके प्रति हमारा समर्पण ही हमारे साथ जाएगा।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन पूर्णतः समर्पण और शरणागति के भाव पर आधारित है।
  • जीवन का सार: यह भजन जीवन की नश्वरता और गुरु की महत्ता को स्पष्ट करता है।
  • मानसिक शांति: नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करने से मन में व्याप्त चिंताएं दूर होती हैं और गुरु के प्रति विश्वास दृढ़ होता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का एक सुंदर उदाहरण है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप अपनी दैनिक पूजा, संध्या वंदन, या गुरु के ध्यान के समय गा सकते हैं। इसे गाने का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के पश्चात का समय है। भजन गाते समय मन को शांत रखें और गुरु के स्वरूप का ध्यान करें। यदि संभव हो, तो गुरु की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके इसे गाएं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन किसी विशिष्ट गुरु या संत को समर्पित हो सकता है, परंतु व्यापक रूप से यह शिरडी के साईं बाबा, समर्थ सद्गुरु, या किसी भी आत्मज्ञानी गुरु के प्रति समर्पित माना जाता है। गुरु को ईश्वर का साक्षात स्वरूप माना गया है, जैसा कि कहा गया है—"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ
दीन दाता गरीबों और दुखियों को दान देने वाला (गुरु)
पतवार नाव चलाने का साधन (जीवन की दिशा)
बिसारा भुला देना
माया संसार का भ्रम
काया शरीर

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ले गुरु का नाम
विषय गुरु महिमा एवं शरणागति
भाषा हिंदी
भाव समर्पण
उपयुक्त अवसर गुरु पूर्णिमा, सत्संग, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि गुरु ही इस संसार में एकमात्र सत्य और सहारा हैं, और उनकी शरण में जाने से ही जीवन का कल्याण संभव है।

यह भजन किसी भी सद्गुरु के लिए गाया जा सकता है। यह गुरु-तत्व की महिमा का गुणगान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!