रब मेरा सतगुरु बन के आया लिरिक्स
रब्ब मेरा सतगुरु बन के
आया मैनू वेख लें दे।
मैनू वेख लैन दे
मथ्था टेक लैन दे॥
बूटे बूटे पानी पावे
सूखे बूटे हरे बनावे।
नी ओ आया माली बन के
मैनू वेख लें दे॥
जिथ्थे वी ओह चरण छुआवे
पत्थर वी ओथे पिघलावे।
नी ओह आया तारणहारा
मैनू वेख लैन दे॥
गुरां दी महिमा गाई ना जाए
त्रिलोकी इथे झुक जावे।
नी ओ आया पार उतारण
मैनू वेख लैन दे॥
ब्रह्म गायन दी मय पिलावे
जो पी जावे ओह तर जावे।
एह ब्रह्म दा रस स्वरूप
मैनू वेख लैन दे॥
गुरां दी सूरत रब दी सूरत
कर दे मुरादे सब दी पुराण।
नी ओह रब दा पूरण स्वरूप
मैनू वेख लैन दे॥
गुरां दी चरनी तीरथ सारे
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे।
नी ओह आया पार उतारण
मैनू वेख लैन दे॥
जनम मरण दे चक्क्कर कटदे
जेहड़े इसदे दर दे चुकदे।
नी ओह रब्ब डा पूरण रूप
मैनू देख लैन दे॥
नाम दी इसने प्याऊ लगाईं
हरी ॐ नाल दुनिया झुमाई।
एहदे नाम दा अमृत पी के
मैनू वेख लैन दे॥
सत्संग एस दा बड़ा निराला
जीवन विच करदा है उजाला।
मेरे रब्ब दा ज्योति स्वरूप
मैनू वेख लैन दे॥
प्रीत है उसदी बड़ी अनोखी
नाम दी दौलत कदे ना फुट्दी।
नी ओह आया जग नू झुमावन
मैनू वेख लैन दे॥
घट घट सब दे ज्योत जगावे
मोह माया दे भरम मिटावे।
एह मिठ्ठी निगाह बरसावे
मैनू वेख लैन दे॥
हरी ॐ दी बोली प्यारी
गंगा जी वी बनी पुजारी।
सब तीरथ होए निहाल
मैनू वेख लैन दे॥
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "रब मेरा सतगुरु बन के आया लिरिक्स " सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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