Ram Bhajan

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये लिरिक्स || Jaahi vidhi raakhe raam taahi vidhi rahiye lyrics in hindi || Bhaktilok

398 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री राम की भक्ति का आलंबन

इस भजन के माध्यम से भक्त राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये॥मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में, तू अकेला नहिं प्यारे, राम तेरे साथ में।विधि का विधान जान हानि लाभ सहिये जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये।किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा, होगा प्यारे वही जो, रामजी को भायेगा।फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये॥सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये।ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के, महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे। धन्यवाद निर्विवाद राम कहते रहिये, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये॥सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये।आशा एक रामजी से, दूजी आशा छोड़ दे, नाता एक रामजी से, दूजे नाते तोड़ दे।साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये, काम रस त्याग प्यारे, राम रस पगिये॥सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का केंद्रीय संदेश यह है कि ईश्वर तीव्रता से भक्त के साथ होते हैं। 'जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये' शब्दों में व्यक्त किया गया है कि हमें सदा उस विधि में संतुष्ट रहना चाहिए जिसके द्वारा राम हमें रखते हैं। हर समय हमें राम के नाम का जाप करना चाहिए। भजन की इस पंक्ति में यह संकेत किया गया है कि राम की सेवा और नाम का जप अप्रतिम शक्ति है जो भक्त को अकेला नहीं छोड़ता। राम का नाम जपना, उनके साथ रहने का संकेत है, और यह हमें सिखाता है कि हमें सदैव अच्छे कार्यों का पालन करना चाहिए और आत्माभिमान से बचना चाहिए, क्योंकि 'किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा।'

भजन में संतोष और समर्पण का भाव महत्वपूर्ण है। भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण कर देना, जीवन के सभी पहलुओं को उनके हाथों में सौंप देना है। 'जिन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के', इस पंक्ति के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि जब हम अपने जीवन को राम के हाथों में रखते हैं तो हमें किसी भी प्रकार की चिंता या भय नहीं रह जाता है। अध्यात्म में सिर्फ एक आशा, राम में निहित है, अन्य सभी अपेक्षाएँ छोड़ देने के लिए कहा गया है। यह भक्ति का पथ ऐसी भावनाओं से भरा हुआ है जो हमें आधुनिकता और सांसारिकता के बंधनों से मुक्त करती हैं।

इस भजन के माध्यम से भक्तिभाव की गहराई को दर्शाया गया है। राम भक्ति का मार्ग न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें जीवन की सच्चाईयों, क्रियाकलापों में संतुलन साधने का पाठ भी पढ़ाता है। भक्ति में निष्ठा, साधना और ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम है। यहाँ पर साधू-जनों या सत्संग का महत्व भी बताया गया है, जिनसे मिलकर हम राम रंग में रंग सकते हैं। यही राम का वास्तविक रस है, जो जीवन को मधुरता और उमंग प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का उल्लेख भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। रामायण, जिसके रचयिता वाल्मीकि हैं, में भगवान राम को पूर्णता और आदर्श का प्रतीक माना गया है। राम की भक्ति में अनेक पंथों ने अपने अपने दृष्टिकोण से मार्गदर्शन किया है, जिसमें वैभव, धर्म और भक्ति मिलकर एक समान रूप से चलते हैं। उपासना का यह तरीका हमें सिखाता है कि जब हम भगवान राम के प्रति सच्ची भक्ति रखते हैं, तब हमारे जीवन में हर चुनौती संभव होती है। भगवान राम से प्रेरित होकर अनेक भक्तों ने कठिनाइयों का सामना किया है और भक्ति के माध्यम से अज्ञानता के अंधकार से निकलने की प्रेरणा पाई है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का नियमित रूप से गायन मानसिक शांति और स्थिरता लाता है। भक्ति के इस अनुभव से ना केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करने में सहायता मिलती है। राम का ध्यान लगाने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात: काल या संध्या समय में करना श्रेष्ठ होता है। पूजा स्थल पर दीप जलाकर, राम के चित्र या मूर्ति के समक्ष बैठकर भजन का पाठ करने से सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। ध्यान लगाकर और संयमित मन से पढ़ना इस साधना का एक आवश्यक हिस्सा है। भक्तिपूर्वक समर्पण के साथ इसमें ध्यान लगाना अत्यंत फलदायी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने से क्या Spiritual लाभ होते हैं?

इस भजन को गाने से भक्त को मानसिक सुख, आत्मिक संतोष और राम के प्रति गहरी भक्ति की भावना प्राप्त होती है। इससे जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है और समस्याएँ कम होती हैं।

इस भजन का सही समय और विधि क्या है?

इस भजन का पाठ प्रातील और संध्या काल में करना चाहिए। भगवान राम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर दीप जलाएं, और भक्तिभाव से गाएँ।

क्या यह भजन सिर्फ रामभक्तों के लिए है?

नहीं, यह भजन सभी के लिए है जो ईश्वर की भक्ति में विश्वास रखते हैं। इसे गाने से किसी भी धर्म का व्यक्ति शांति और सुख का अनुभव कर सकता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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