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Aaj Tere Darbar Jag Se Haar Ke Aaya Hoon Lyrics (आज तेरे दरबार जग से हार के आया हूं) – Mukesh Bagda Ji Shyam Bhajan 2026 | Sun Lo Mere Sarkar

150 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 आज तेरे दरबार – जग से हार के आया हूं

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Aaj Tere Darbar Jag Se Haar Ke Aaya Hoon Lyrics In Hindi) – Mukesh Bagda Ji Shyam Bhajan 2026 | Sun Lo Mere Sarkar

गायक: मुकेश बगड़ा जी || रचनाकार: पवन

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: मुकेश बगड़ा जी (Mukesh Bagda Ji)
✍️ रचनाकार: पवन (Pavan)
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

आज तेरे दरबार, जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार, जग से हार के आया हूं॥

॥ अंतरा १ ॥

मजबूरी गर ना होती तो,
मैं नहीं आता मैं नहीं आता,
दिन और रात तेरा दरवाजा,
मैं नहीं खूड़काता,
पड़ी वक्त की मार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं॥

॥ अंतरा २ ॥

पहले तो सोचा खुद ही,
नैया संभालू नैया संभालू,
इस मझधार में फंसी ये नैया,
खुद ही पार लगा लू,
करता हूं स्वीकार,
हार मजधार से आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं॥

॥ अंतरा ३ ॥

कहता 'पवन' के तुम ही बताओ,
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां मैं,
ठोकर खाते खाते बाबा,
आया हूं यहां मैं,
जाऊं किसके द्वार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं॥

आज तेरे दरबार,
जग से हार के आया हूं,
सुन लो मेरे सरकार,
जग से हार के आया हूं॥

🎤 गायक :- मुकेश बगड़ा जी (Mukesh Bagda Ji)

✍️ रचनाकार :- पवन (Pavan)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "आज तेरे दरबार जग से हार के आया हूं" मुकेश बगड़ा जी की भावपूर्ण आवाज़ में खाटू श्याम बाबा के प्रति एक भक्त की मार्मिक पुकार है। भजन का मूल स्वर एक ऐसे भक्त की व्यथा है जो संसार से हारकर, निराश होकर, अंतिम सहारे के रूप में श्याम बाबा के दरबार में आया है।

"आज तेरे दरबार, जग से हार के आया हूं" – भक्त कहता है कि वह संसार से हारकर आज श्याम बाबा के दरबार में आया है। वह उनसे विनती करता है कि हे मेरे सरकार, मेरी सुन लो।

"मजबूरी गर ना होती तो, मैं नहीं आता" – भक्त स्वीकार करता है कि अगर मजबूरी न होती तो वह शायद नहीं आता। वह दिन-रात बाबा का दरवाजा नहीं खटखटाता। लेकिन वक्त की मार पड़ी है, इसलिए वह हारकर आया है।

"पहले तो सोचा खुद ही नैया संभालू" – भक्त ने पहले सोचा कि वह खुद ही अपनी जीवन रूपी नैया को संभालेगा, इस मझधार में फंसी नैया को खुद ही पार लगाएगा। लेकिन अब वह स्वीकार करता है कि वह हार गया है और मझधार से हारकर बाबा के पास आया है।

"कहता पवन के तुम ही बताओ, जाऊं कहां मैं" – रचनाकार पवन कहते हैं कि हे बाबा, तुम ही बताओ कि मैं और कहां जाऊं? ठोकरें खाते-खाते आखिर में तुम्हारे पास ही आया हूं। अब और किसके द्वार पर जाऊं? संसार से हारकर तो बस तुम्हारे दरबार में ही आया हूं।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

"हार के आने" का भाव: यह भजन उस स्थिति का वर्णन करता है जब मनुष्य संसार के सभी सहारों से हारकर, अंतिम सहारे के रूप में भगवान के पास आता है। यह भक्ति का वह स्वरूप है जहाँ अहंकार नहीं, बल्कि पूर्ण विनम्रता और समर्पण होता है।

"मजबूरी" का स्वीकार: भक्त स्पष्ट स्वीकार करता है कि मजबूरी में वह बाबा के पास आया है। यह ईमानदारी भक्ति की एक अद्भुत मिसाल है। वह दिखावा नहीं करता कि वह बिना किसी लालच के आया है, बल्कि अपनी विवशता को सच्चाई से प्रस्तुत करता है।

"नैया संभालने" का प्रयास: "पहले तो सोचा खुद ही नैया संभालू" – यह पंक्ति मानवीय अहंकार और आत्मनिर्भरता के प्रयास को दर्शाती है। लेकिन जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं, तब मनुष्य को एहसास होता है कि वास्तव में खिवैया (नाविक) तो श्याम ही हैं।

पवन जी की रचना: रचनाकार पवन ने अपने नाम के साथ "कहता पवन" कहकर इस भजन को व्यक्तिगत और हृदयस्पर्शी बना दिया है। उनके शब्द सीधे हृदय में उतर जाते हैं।

मुकेश बगड़ा जी का गायन: मुकेश बगड़ा जी ने अपनी भावपूर्ण और करुण आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह दर्द और वह समर्पण साफ सुनाई देता है जो एक हारे हुए भक्त के मन में होता है।

"सुन लो मेरे सरकार": यह पंक्ति भक्त की अंतिम पुकार है। जब सारी दुनिया सुनने को तैयार नहीं, तब वह श्याम बाबा से विनती करता है कि वे उसकी सुन लें।

💖 हारे का सहारा

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्याम बाबा हारे के सहारा हैं। जब संसार से हारकर, सभी दरवाजे बंद हो जाएं, तब भी श्याम का दरवाजा खुला है। भक्त बिना किसी दिखावे के, अपनी मजबूरी और विवशता के साथ बाबा के पास आ सकता है। बाबा उसकी सुनते हैं, उसकी नैया पार लगाते हैं। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन की मझधार में फंसकर हार मान चुका है।

✨ समर्पण की पराकाष्ठा

आज तेरे दरबार जग से हार के आया हूं केवल एक भजन नहीं, बल्कि समर्पण की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने अहंकार को त्यागकर, पूरी विनम्रता के साथ प्रभु के सामने आ खड़ा होता है। यह भजन सिखाता है कि श्याम बाबा के दरबार में हारे हुए लोगों का स्वागत है, और वहीं से नई आशा और नई शुरुआत मिलती है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ पवन कृत श्याम भजन ॥
॥ सुन लो मेरे सरकार, जग से हार के आया हूं ॥

गायक: मुकेश बगड़ा जी | रचनाकार: पवन

॥ आज तेरे दरबार, जग से हार के आया हूं ॥

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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