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Aayo Faganiyo Mere Shyam Dhani Ko Lyrics (आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को) – Yash Khadaria Ji Shyam Bhajan 2026 | Khatu Jawan Re

186 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को – खाटू जावां रे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Aayo Faganiyo Mere Shyam Dhani Ko Lyrics In Hindi) – Yash Khadaria Ji Shyam Bhajan 2026 | Khatu Jawan Re

लेखक: यश खदरिया जी || तर्ज: धमाल || फागुन श्याम भजन

📝 भजन विवरण

✍️ लेखक: यश खदरिया जी (Yash Khadaria Ji)
🎵 तर्ज: धमाल (Dhamal)
🏷️ श्रेणी: फागुन भजन / श्याम होली भजन
📍 भाव: फागुन उत्सव, श्याम मेले का उत्साह
🎨 विशेष: खाटू यात्रा का वर्णन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

खाटूवाले श्याम जी, मेरे मन में उठी उमंग,
फागुन के त्यौहार में, मैं नाचू तोरे संग॥

॥ स्थायी ॥

आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को,
खाटू जावां रे… आयो फागणियो,
ओ… खाटू जावां खाटू जावां, मन ललचावे रे…
आयो फागणियो…

तर्ज – धमाल

॥ अंतरा १ ॥

हाथा में निशान लेकर, चंग बजाता आवां रे…
सब घरघा संग पैदल चलकर, भजन सुनाता आवां रे…
गाता और बजाता आवां, श्याम रिझावां रे…
आयो फागणियो…

॥ अंतरा २ ॥

ध्वजा नारियल सवा रूपया, अर्जी सागे ल्यावां रे…
रिगंस से खाटू तक बाबा, हसतां खिलता आवां रे…
तोरण पे यो शीश झुकाकर, श्याम स्यू मिलस्या रे…
आयो फागणियो…

॥ अंतरा ३ ॥

ज्यूँ-ज्यूँ मन्दिर दिखे है म्हाने, म्हारो मन हर्षावे रे…
धीरे-धीरे आगे बड़ता जावां, जय-जयकार लगावां रे…
मोटो यो दरबार देखकर (खुब भरयो दरबार देखकर), सुध बिसराया रे…
आयो फागणियो…

॥ अंतरा ४ ॥

भांत – भांत का भोग लगाकर, खुब तन्ने जिमावां रे…
माखन मिश्री खीर चुरमो, खुब तन्ने यो भावे रे…
दाल-बाटकी साग या रोटी, भर-भर खावे रे…
आयो फागणियो…

आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को,
खाटू जावां रे… आयो फागणियो…

✍️ लेखक :- यश खदरिया जी (Yash Khadaria Ji)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह फागुन विशेष श्याम भजन "आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को" यश खदरिया जी द्वारा रचित है। यह भजन फागुन (होली) के महीने में खाटू श्याम बाबा के दरबार में जाने के उत्साह और उमंग को दर्शाता है।

"आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को" – फागणियो (फागुन का त्यौहार) आ गया है, मेरे श्याम धणी (मालिक) के लिए। भक्त कहता है कि मुझे खाटू जाना है, मन ललचा रहा है।

"हाथा में निशान लेकर, चंग बजाता आवां रे" – भक्त कहता है कि मैं हाथ में निशान (ध्वज) लेकर, चंग (एक वाद्य) बजाता हुआ आऊंगा। सब घरघा (रिश्तेदारों/समूह) के साथ पैदल चलकर, भजन सुनाता हुआ आऊंगा। गाता और बजाता हुआ आऊंगा, श्याम को रिझाऊंगा।

"ध्वजा नारियल सवा रूपया, अर्जी सागे ल्यावां रे" – ध्वजा, नारियल, सवा रुपया और अर्जी (मन्नत) साथ लाऊंगा। रिगंस (शायद रेवासा या कोई स्थान) से खाटू तक, बाबा, हंसता-खिलता आऊंगा। तोरण (द्वार) पर शीश झुकाकर, श्याम से मिलूंगा।

"ज्यूँ-ज्यूँ मन्दिर दिखे है म्हाने, म्हारो मन हर्षावे रे" – जैसे-जैसे मुझे मंदिर दिखता है, मेरा मन हर्षित होता है। धीरे-धीरे आगे बढ़ता जाऊं, जय-जयकार लगाऊं। इतना बड़ा दरबार देखकर, मुझे सुध-बुध भूल गई।

"भांत-भांत का भोग लगाकर, खुब तन्ने जिमावां रे" – तरह-तरह के भोग लगाकर, मैं तुझे खूब खिलाऊंगा। माखन-मिश्री, खीर-चूरमा, तुझे बहुत पसंद है। दाल-बाटी, साग या रोटी, भर-भर खाऊंगा।

🔍 इस फागुन भजन का विशेष महत्त्व

"फागणियो" का अर्थ: फागणियो फागुन (फाल्गुन) महीने का त्यौहार है, जिसे हम होली के नाम से जानते हैं। यह महीना रंगों और उत्सव का होता है। इस भजन में भक्त फागुन के महीने में श्याम बाबा के पास खाटू जाने की इच्छा व्यक्त कर रहा है।

तर्ज "धमाल": यह भजन "धमाल" नामक लोकप्रिय तर्ज पर बनाया गया है। यह तर्ज बहुत ही उत्साहपूर्ण और नृत्य-प्रधान है, जो इस भजन को और भी जीवंत बनाती है।

खाटू यात्रा का वर्णन: इस भजन में खाटू यात्रा का सजीव वर्णन है – हाथ में निशान लेकर, चंग बजाते हुए, पैदल चलते हुए, भजन सुनाते हुए खाटू जाने का उत्साह। यह उन लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा का प्रतिबिंब है जो पैदल ही खाटू धाम जाते हैं।

निशान, नारियल और अर्जी: खाटू श्याम के भक्त निशान (ध्वज), नारियल और सवा रुपया चढ़ाते हैं। "अर्जी" का अर्थ है मन्नत या प्रार्थना। भक्त कहता है कि वह यह सब साथ लाएगा।

भोग का वर्णन: भजन में श्याम बाबा को चढ़ाए जाने वाले विभिन्न भोगों का वर्णन है – माखन-मिश्री, खीर-चूरमा, दाल-बाटी, साग-रोटी। यह राजस्थानी व्यंजन हैं जो श्याम बाबा को विशेष रूप से प्रिय हैं।

यश खदरिया जी की रचना: लेखक यश खदरिया जी ने इस भजन के माध्यम से फागुन में खाटू यात्रा के उत्साह और श्याम भक्ति के अनूठे रंग को बखूबी उकेरा है। उनकी सरल भाषा और भावपूर्ण शब्द इस भजन को विशेष बनाते हैं।

💖 फागुन में खाटू यात्रा का उत्साह

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि फागुन के महीने में खाटू श्याम बाबा के दरबार में जाने का उत्साह अलग ही होता है। भक्त हाथ में निशान लेकर, चंग बजाते हुए, पैदल चलकर, भजन गाते हुए खाटू जाते हैं। वहाँ पहुंचकर वे श्याम बाबा को विभिन्न प्रकार के भोग लगाते हैं और उनके दर्शन कर आनंदित होते हैं। यह भजन हर उस श्याम भक्त के दिल की आवाज़ है जो फागुन में बाबा के पास जाने का सपना देखता है।

✨ उत्सव और भक्ति का संगम

आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को केवल एक भजन नहीं, बल्कि उत्सव और भक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। यह भजन हमें सिखाता है कि फागुन का त्यौहार केवल रंगों से नहीं, बल्कि श्याम प्रेम से भी मनाया जाता है। खाटू जाना, निशान चढ़ाना, भजन गाना, भोग लगाना – यह सब भक्ति के अंग हैं और इनमें भक्त को अपार आनंद मिलता है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। फागुन के त्यौहार में, मैं नाचू तोरे संग।।

॥ यश खदरिया जी कृत श्याम फागुन भजन ॥
॥ आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को, खाटू जावां रे ॥

लेखक: यश खदरिया जी | Yash Khadaria Ji | तर्ज: धमाल

॥ खाटू जावां खाटू जावां, मन ललचावे रे ॥

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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