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बाएँ भुजा असुर दल मारे – हनुमान जी की दो भुजाओं का महत्व (Baaen Bhuja Asur Dal Mare – The Significance of Hanuman's Two Arms)

242 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 बाएँ भुजा असुर दल मारे

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

दाहिने भुजा संतजन तारे (One Arm Destroys Demons, the Other Protects the Saints)

सुर नर मुनि जन आरती उतारें – जय जय जय हनुमान उचारें

🌟 प्रसंग परिचय – हनुमान जी का दिव्य स्वरूप

श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड की यह चौपाई हनुमान जी की महिमा का वर्णन करती है – “बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ सुर नर मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥” अर्थात हनुमान जी अपनी एक भुजा (बाईं) से दुष्ट असुरों के समूह का नाश करते हैं। दूसरी भुजा (दाहिनी) से संतों और भक्तों की रक्षा करते हैं। देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी उनकी आरती उतारते हैं और चारों ओर “जय-जय हनुमान” की ध्वनि गूँज उठती है।

यह चौपाई हनुमान जी के दोहरे स्वरूप को दर्शाती है – एक ओर वे राक्षसों, अहंकार और अधर्म का संहार करने वाले हैं, तो दूसरी ओर वे भक्तों, सज्जनों और शरणागतों के रक्षक हैं। यही कारण है कि समस्त देवता, ऋषि और मनुष्य उनकी आरती उतारते हैं और उनके जय-जयकार से सारा वातावरण गुंजायमान होता है।

📖 चौपाई का अर्थ (Meaning of the Chaupai)

🕉️ हिंदी अर्थ

बाएँ भुजा असुर दल मारे।
“हनुमान जी अपनी बाईं भुजा से दुष्ट असुरों के समूह का संहार करते हैं।”

दाहिने भुजा संतजन तारे॥
“अपनी दाहिनी भुजा से संतों और भक्तों की रक्षा करते हैं।”

सुर नर मुनि जन आरती उतारें।
“देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी उनकी आरती उतारते हैं।”

जय जय जय हनुमान उचारें॥
“सभी ‘जय-जय-जय हनुमान’ का उच्चारण करते हैं।”

🌍 English Meaning

With His left arm, He destroys hordes of demons.
With His right arm, He protects the saints and devotees.

Gods, humans, and sages all perform His aarti (ritual of worship).
They all chant “Victory, victory, victory to Hanuman”.

📌 भावार्थ : यह चौपाई हनुमान जी के द्वैत-स्वरूप को दर्शाती है। बायाँ भाग शक्ति और संहार का प्रतीक है – वे अधर्मियों, असुरों और बाधाओं का नाश करते हैं। दायाँ भाग कृपा और रक्षा का प्रतीक है – वे भक्तों, साधु-संतों की रक्षा करते हैं। इसलिए समस्त लोक उनकी आरती करते हैं और उनके जय-जयकार से सारा वातावरण आनंदित होता है।

🕉️ रामचरितमानस में संदर्भ (Context in Ramcharitmanas)

यह चौपाई सुन्दरकाण्ड में हनुमान जी के लंका प्रवेश और वहाँ के अद्भुत कर्मों के वर्णन के दौरान आती है। तुलसीदास जी हनुमान जी के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताते हैं कि उनकी एक भुजा राक्षसों के दल को नष्ट करने वाली है, तो दूसरी संतों की रक्षा करने वाली। उनके इस अद्वितीय स्वरूप के कारण ही देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी उनकी आरती उतारते हैं और “जय हनुमान” के नाद से सारा वातावरण गूँज उठता है।

यह चौपाई हनुमान जी की सर्वव्यापी महिमा को दर्शाती है – वे केवल राम के भक्त ही नहीं, वरन् समस्त लोकों के रक्षक और पूज्य हैं।

✨ बायीं और दायीं भुजा का प्रतीकात्मक अर्थ

🔴 बायीं भुजा (संहार)

  • असुर दल मारे : अधर्म, अहंकार, भय, बाधाओं का नाश।
  • शत्रुओं का संहार – भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर।
  • विपत्तियों और संकटों का विनाश।
  • राक्षसी प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) को समाप्त करना।

🔵 दाहिनी भुजा (रक्षा)

  • संतजन तारे : भक्तों, साधकों, सज्जनों की रक्षा।
  • शरणागतों को संकटों से पार ले जाना।
  • सद्गुणों, सद्बुद्धि और शुभता की रक्षा।
  • भक्तों को सही मार्ग पर चलाना और उनकी आस्था बनाए रखना।

आध्यात्मिक दृष्टि : यह चौपाई सिखाती है कि हनुमान जी के भक्त को दोनों ही पक्षों का अनुग्रह प्राप्त होता है – वह बुराइयों से मुक्त होता है और अच्छाइयों की रक्षा होती है। इसलिए हनुमान जी की आराधना से साधक का जीवन सुरक्षित और पवित्र हो जाता है।

🙏 “सुर नर मुनि जन आरती उतारें” – सर्वपूज्य हनुमान

हनुमान जी केवल मनुष्यों के ही नहीं, वरन् देवताओं और ऋषि-मुनियों के भी पूज्य हैं। यह चौपाई स्पष्ट करती है कि सुर (देवता), नर (मनुष्य) और मुनि (ऋषि) – सभी उनकी आरती उतारते हैं। आरती का अर्थ है – श्रद्धा, सम्मान और स्तुति।

👼
देवता

इंद्र, वरुण, ब्रह्मा, शिव – सभी ने हनुमान को वरदान दिए और उनकी पूजा की।

🙏
मनुष्य

संसार के कोने-कोने में हनुमान जी की पूजा होती है, उनकी आरती गाई जाती है।

🧘
ऋषि-मुनि

वाल्मीकि, तुलसीदास, आदि संतों ने हनुमान को अपने ग्रंथों में सर्वोच्च स्थान दिया।

🔱 “जय जय जय हनुमान” – जयकार का महत्व

चौपाई के अंत में “जय जय जय हनुमान” का उच्चारण है। यह तीन बार “जय” कहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक “जय” का एक विशेष अर्थ है:

1️⃣
भौतिक विजय

संसार में सफलता, विजय, साहस की प्राप्ति।

2️⃣
मानसिक विजय

मन पर विजय, विकारों पर नियंत्रण, भक्ति में स्थिरता।

3️⃣
आध्यात्मिक विजय

आत्म-साक्षात्कार, मोक्ष, परम पद की प्राप्ति।

इस प्रकार “जय जय जय हनुमान” के उच्चारण से भक्त को तीनों स्तरों पर विजय प्राप्त होती है। यही कारण है कि हनुमान जी की जयकार सबसे अधिक शक्तिशाली मानी जाती है।

📜 पौराणिक एवं आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य (Mythological & Spiritual Perspective)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी ने रामायण काल में अनेक राक्षसों का संहार किया – अहिरावण, कुम्भकर्ण, मेघनाद आदि उनकी भुजाओं से मारे गए। वहीं, उन्होंने भक्तों की रक्षा भी की – जैसे राम-लक्ष्मण को संजीवनी बूटी लाकर बचाया, सीता जी को अशोक वाटिका में सांत्वना दी।

आध्यात्मिक दृष्टि से, हनुमान जी की बायीं भुजा उस शक्ति का प्रतीक है जो हमारे भीतर के राक्षसों (अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश करती है। दाहिनी भुजा उस कृपा का प्रतीक है जो हमारे सद्गुणों (भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सेवा) की रक्षा करती है। जब ये दोनों कार्य होते हैं, तो देवता (इन्द्रियाँ), मनुष्य (शरीर) और ऋषि-मुनि (बुद्धि) – सभी आनंदित होते हैं और “जय हनुमान” का उच्चारण करते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1 : हनुमान जी की बायीं भुजा से असुर मारने और दाहिनी से संतों की रक्षा करने का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

उत्तर : यह हनुमान जी के दोहरे स्वरूप को दर्शाता है – एक ओर वे अधर्म और बुराइयों का नाश करते हैं, तो दूसरी ओर धर्म और भक्तों की रक्षा करते हैं। बायाँ भाग संहार का, दायाँ भाग पालन का प्रतीक है।

प्रश्न 2 : “सुर नर मुनि जन आरती उतारें” – क्या सचमुच देवता हनुमान की आरती उतारते हैं?

उत्तर : पौराणिक मान्यता है कि हनुमान जी को ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित सभी देवताओं ने वरदान दिए और उनका सम्मान किया। आरती का अर्थ है – स्तुति, सम्मान, पूजा। देवता भी उनकी महिमा गाते हैं।

प्रश्न 3 : इस चौपाई का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

उत्तर : इसके पाठ से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। शत्रुओं, बाधाओं और अमंगल का नाश होता है। भक्तों की रक्षा होती है और सभी लोकों में सम्मान मिलता है।

प्रश्न 4 : “जय जय जय” तीन बार क्यों कहा जाता है?

उत्तर : यह तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में विजय का सूचक है। साथ ही तीनों गुणों (सत्त्व, रज, तम) पर विजय और भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर सफलता का प्रतीक है।

🕉️ जीवन में उतारें यह शिक्षा (Apply in Life)

  • बुराइयों का नाश करें : हनुमान जी की बायीं भुजा की तरह अपने भीतर के असुरों (क्रोध, लोभ, अहंकार) का नाश करें।
  • सद्गुणों की रक्षा करें : दाहिनी भुजा की तरह अपने अंदर के संत-भाव (दया, सत्य, सेवा) की रक्षा करें।
  • सबका सम्मान करें : “सुर नर मुनि” सब हनुमान का सम्मान करते हैं। हम भी सभी का सम्मान करना सीखें।
  • जयकार करें : नियमित रूप से “जय हनुमान” का उच्चारण करें – यह मन को शक्ति और सकारात्मकता देता है।
🙏 संकल्प : मैं हनुमान जी की इस चौपाई को स्मरण रखूँगा। उनकी बायीं भुजा की तरह बुराइयों का नाश करूँगा और दाहिनी भुजा की तरह सद्गुणों की रक्षा करूँगा। उनके जय-जयकार से अपने जीवन को आनंदित और सफल बनाऊँगा।

🙌 महान संतों के विचार (Words of Saints)

“हनुमान जी की एक भुजा रक्षा के लिए, एक भुजा संहार के लिए। इसलिए वे सर्वशक्तिमान हैं। उनकी आरती तीनों लोकों में गाई जाती है।”

- स्वामी रामसुखदास

“जय हनुमान का जयघोष ही भक्त के सब संकट हर लेता है। यह चौपाई उसी जयकार का माहात्म्य बताती है।”

- संत तुलसीदास

🙏 जय जय जय हनुमान 🙏
बाएँ भुजा असुर दल मारे – दाहिने भुजा संतजन तारे
श्रेणियां: hanuman Spritual

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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