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चरण कमल वंदौ सब काहू – हनुमान जी से प्रार्थना और मंगल की कामना (Charan Kamal Vandau Sab Kahu – Prayer to Hanuman for Lord Rama's Love)

241 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 चरण कमल वंदौ सब काहू

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

देहु राम पद नेह निबाहू

मंगलमूर्ति मारुति नंदन – सकल अमंगल मूल निकंदन

🌟 प्रसंग परिचय – हनुमान जी से अटल राम-भक्ति की प्रार्थना

श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड की यह अत्यंत भावपूर्ण चौपाई है – “चरण कमल वंदौ सब काहू, देहु राम पद नेह निबाहू। मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन॥” अर्थात मैं सभी देवताओं और संतों के चरण कमलों को प्रणाम करता हूँ। वे कृपा करके मुझे भगवान श्रीराम के चरणों में अटल प्रेम और भक्ति प्रदान करें। हनुमान जी मंगल के स्वरूप और पवनदेव के पुत्र हैं। वे सभी प्रकार के अमंगल (अशुभ) और दुखों का मूल से नाश करने वाले हैं।

यह चौपाई हनुमान जी की वंदना के साथ-साथ उनसे राम-भक्ति की प्रार्थना है। तुलसीदास जी बताते हैं कि हनुमान जी स्वयं मंगलस्वरूप हैं और उनकी कृपा से साधक को राम-चरणों में अटल प्रेम की प्राप्ति होती है, जो सभी अमंगलों का नाश करने वाला है।

📖 चौपाई का अर्थ (Meaning of the Chaupai)

🕉️ हिंदी अर्थ

चरण कमल वंदौ सब काहू।
“मैं सभी (देवताओं, गुरुजनों, संतों) के चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ।”

देहु राम पद नेह निबाहू॥
“मुझे भगवान राम के चरणों में अटल प्रेम प्रदान करें।”

मंगलमूर्ति मारुति नंदन।
“हे मंगलस्वरूप, पवनपुत्र हनुमान!”

सकल अमंगल मूल निकंदन॥
“आप समस्त अमंगल (अशुभ, दुख) के मूल को नष्ट करने वाले हैं।”

📌 भावार्थ : यह चौपाई एक साथ तीन स्तरों पर प्रार्थना करती है – (1) समस्त दिव्य शक्तियों को नमन, (2) राम-चरणों में अटल प्रेम की याचना, (3) हनुमान जी की स्तुति जो सभी अशुभ का नाश करते हैं। वास्तव में, हनुमान जी की कृपा से ही राम-भक्ति स्थिर होती है और अमंगल दूर होते हैं।

🕉️ रामचरितमानस में संदर्भ (Context in Ramcharitmanas)

यह चौपाई सुन्दरकाण्ड के प्रारंभिक भाग में आती है, जहाँ तुलसीदास जी हनुमान जी की वंदना करते हुए उनसे रामभक्ति की प्रार्थना करते हैं। यह सुन्दरकाण्ड के “मंगलाचरण” का हिस्सा है। इसके माध्यम से वे यह स्पष्ट करते हैं कि हनुमान जी ही वह माध्यम हैं जिनकी कृपा से राम-चरणों में अटल प्रेम प्राप्त होता है।

सुन्दरकाण्ड का आरम्भ ही हनुमान जी की महिमा से होता है, क्योंकि यह काण्ड उनके अद्भुत कर्मों और भक्ति का वर्णन करता है। इस चौपाई में तुलसीदास जी ने स्वयं को हनुमान जी का शरणागत करते हुए उनसे राम-प्रेम की याचना की है।

✨ “मंगलमूर्ति मारुति नंदन” – हनुमान जी का मंगल स्वरूप

  • मंगलमूर्ति : हनुमान जी स्वयं मंगल (कल्याण, शुभ) के प्रतीक हैं। उनका नाम, रूप, गुण सब मंगलमय है।
  • मारुति नंदन : वे पवनदेव के पुत्र हैं – जो प्राणों के देवता हैं। इसलिए वे प्राणशक्ति और साहस के दाता हैं।
  • सकल अमंगल मूल निकंदन : वे समस्त अशुभ, दुख, रोग, भय, ग्रहबाधा आदि का जड़ से नाश करते हैं।
  • रामभक्ति का द्वार : हनुमान जी की कृपा से ही साधक को राम-चरणों में प्रेम स्थिर होता है।
🔱

“सकल अमंगल मूल निकंदन”
हनुमान जी केवल संकट हरते ही नहीं, बल्कि अमंगल की जड़ को ही नष्ट कर देते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि : यह चौपाई हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति की प्राप्ति के लिए हनुमान जी की शरण में जाना आवश्यक है। वे स्वयं मंगल के सागर हैं, उनकी कृपा से सब कुछ मंगलमय हो जाता है। जो उनकी शरण में आता है, उसके सभी अमंगल नष्ट हो जाते हैं और राम-भक्ति स्थिर हो जाती है।

🙏 राम-पद-नेह – अटल प्रेम की प्रार्थना

इस चौपाई का केंद्रीय भाव है – “देहु राम पद नेह निबाहू”। भक्त प्रार्थना करता है कि उसे राम के चरणों में ऐसा प्रेम मिले जो अटल, नित्य और स्थिर हो। यह प्रेम कभी कम न हो, न ही कभी भंग हो।

🌟 राम-पद-प्रेम के लक्षण
  • संसार के सुख-दुख में समान
  • कभी कम न होने वाला
  • सभी बंधनों से मुक्त
  • केवल राम के चरणों में आसक्त
💖 यह प्रेम कैसे प्राप्त हो?

तुलसीदास कहते हैं कि यह प्रेम हनुमान जी की कृपा से मिलता है। हनुमान जी स्वयं राम-भक्ति के सागर हैं, उनकी शरण में जाने से यह प्रेम सहज ही प्राप्त हो जाता है।

🔱 हनुमान जी की महिमा – सकल अमंगल का नाश

हनुमान जी को “संकटमोचन”, “दुःखहर्ता”, “भयहर्ता” आदि नामों से जाना जाता है। यह चौपाई उनकी इसी विशेषता को “सकल अमंगल मूल निकंदन” कहती है – वे अमंगल की जड़ को ही उखाड़ फेंकते हैं।

🕉️
ग्रह बाधा

हनुमान जी की कृपा से शनि, राहु, केतु आदि के अशुभ प्रभाव नष्ट होते हैं।

😨
भय और आतंक

उनका स्मरण मात्र से सभी प्रकार का भय दूर हो जाता है।

💔
दुख और रोग

शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक – सब दुखों का नाश करते हैं।

यही कारण है कि हनुमान जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। उनकी कृपा से सभी अशुभ दूर होते हैं और शुभ की प्राप्ति होती है।

📜 पौराणिक एवं आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य (Mythological & Spiritual Perspective)

यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड के मंगलाचरण का हिस्सा है। तुलसीदास जी सदा हनुमान जी की वंदना से ग्रंथ का आरंभ करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि हनुमान जी की कृपा के बिना राम-कथा का सच्चा आनंद नहीं मिल सकता।

आध्यात्मिक दृष्टि से, “चरण कमल वंदौ सब काहू” से तात्पर्य है कि साधक सबसे पहले समस्त दिव्य शक्तियों को नमन करता है, फिर विशेष रूप से हनुमान जी से राम-प्रेम की याचना करता है। यह प्रार्थना का सही क्रम है – पहले सबका सम्मान, फिर अपने इष्ट से अपने लिए माँगना।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1 : यह चौपाई सुन्दरकाण्ड के किस भाग में आती है?

उत्तर : यह सुन्दरकाण्ड के आरंभिक “मंगलाचरण” में आती है, जहाँ तुलसीदास जी हनुमान जी की वंदना करते हुए राम-भक्ति की प्रार्थना करते हैं।

प्रश्न 2 : क्या इस चौपाई का पाठ करने से सभी अमंगल दूर होते हैं?

उत्तर : हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ इस चौपाई का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा होती है, जो सभी अशुभ, दुख, भय, रोग आदि का नाश करती है। यह हनुमान चालीसा के समान ही प्रभावशाली मानी जाती है।

प्रश्न 3 : “चरण कमल वंदौ सब काहू” – क्या केवल देवताओं को प्रणाम है?

उत्तर : “सब काहू” का अर्थ है – सभी देवताओं, गुरुजनों, संतों, तथा समस्त पूज्य जनों को। यह विनम्रता और कृतज्ञता का भाव है।

प्रश्न 4 : क्या “राम पद नेह निबाहू” के लिए हनुमान जी की कृपा आवश्यक है?

उत्तर : हाँ, तुलसीदास जी इस चौपाई में यही सिखाते हैं कि राम-चरणों में अटल प्रेम हनुमान जी की कृपा से ही स्थिर होता है। हनुमान जी स्वयं राम-भक्ति के सागर हैं, उनकी शरण में जाने से यह प्रेम सहज ही मिल जाता है।

🕉️ जीवन में उतारें यह शिक्षा (Apply in Life)

  • सबको प्रणाम : प्रत्येक दिन की शुरुआत सभी देवताओं, गुरुजनों और संतों को नमन करके करें। यह विनम्रता का भाव देता है।
  • हनुमान जी की शरण : नियमित रूप से हनुमान जी का स्मरण करें, विशेषकर इस चौपाई का पाठ करें। इससे सभी अमंगल दूर होंगे।
  • राम-प्रेम की प्रार्थना : हर दिन प्रार्थना करें कि “मुझे राम के चरणों में अटल प्रेम मिले।” यही सच्ची भक्ति है।
  • मंगल का स्वरूप बनें : हनुमान जी की तरह स्वयं भी मंगलमय बनने का प्रयास करें – दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करें।
🙏 संकल्प : मैं प्रतिदिन इस चौपाई का स्मरण करूँगा और हनुमान जी से राम-चरणों में अटल प्रेम की प्रार्थना करूँगा। मैं जानता हूँ कि उनकी कृपा से सभी अमंगल नष्ट होंगे और जीवन मंगलमय बनेगा।

🙌 महान संतों के विचार (Words of Saints)

“हनुमान जी मंगलमूर्ति हैं। जो उनकी शरण में आता है, उसके सब अमंगल नष्ट हो जाते हैं और राम-भक्ति स्थिर हो जाती है।”

- स्वामी रामसुखदास

“यह चौपाई हमें सिखाती है कि पहले सबका सम्मान करो, फिर हनुमान जी से राम-प्रेम माँगो। यही विनम्रता और भक्ति का मार्ग है।”

- संत तुलसीदास

🙏 जय हनुमान 🙏
चरण कमल वंदौ सब काहू – देहु राम पद नेह निबाहू
श्रेणियां: hanuman Spritual

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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