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Ghoomar Ghal Re Bhaya Lyrics (घूमर घाल रे भाया) – Jayant Sarada Shyam Bhajan 2026 | Aaj Ude Anand Shyam Ko

167 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 घूमर घाल रे भाया – आज उड़े आनंद श्याम को

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Ghoomar Ghal Re Bhaya Lyrics In Hindi) – Jayant Sarada Shyam Bhajan 2026 | Aaj Ude Anand Shyam Ko

लेखक: जयंत सारदा (जीतू) जी || राजस्थानी शैली

📝 भजन विवरण

✍️ लेखक: जयंत सारदा (जीतू) जी
🎤 शैली: राजस्थानी लोक भजन
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन / उत्सव भजन
📍 भाव: आनंद, उत्सव, श्याम दर्शन की खुशी
🎨 विशेष: राजस्थानी भाषा में श्याम प्रेम

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी-राजस्थानी मिश्रित)

॥ स्थायी ॥

घूमर घाल रे भाया, घूमर घाल रे भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ॥

॥ अंतरा १ ॥

घणा दिना स्यू दिकता यो, आनंद उत्सव आयो,
घणा दिना स्यू दिकता यो, आनंद उत्सव आयो,
सजकर बेठ्यो श्याम हमारो, देख यो मन हर्षायो,
दर्शन करले रे भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ॥

॥ अंतरा २ ॥

भांति भांति का इतर लगाया, महक रयो दरबार,
आज बड़ो ही मूलक रयो है, श्याम धणी दातार,
प्रेम से देख ले भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ॥

॥ अंतरा ३ ॥

भाव देखकर प्रेमियों को, खोल दियो भण्डारो,
खुद हाथां से लुटा रयो है, बाबो खाटू वालो,
'जीतू' लूट ले भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ॥

घूमर घाल रे भाया, घूमर घाल रे भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ॥

✍️ लेखक :- जयंत सारदा (जीतू) जी (Jayant Sarada Jeetu Ji)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह राजस्थानी शैली का श्याम भजन "घूमर घाल रे भाया" जयंत सारदा (जीतू) जी द्वारा रचित है। यह भजन खाटू श्याम बाबा के दरबार में मनाए जाने वाले आनंद और उत्सव का वर्णन करता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त का है जो दूसरे भक्त (भाया) से कह रहा है कि आज श्याम के आनंद की घूमर (उमंग, उल्लास) घालो (मनाओ), मौज लो।

"घूमर घाल रे भाया" – "घूमर" राजस्थानी लोक नृत्य का एक प्रसिद्ध रूप है, और यहाँ इसका अर्थ उल्लास और उत्सव से है। भक्त कहता है कि आज श्याम के आनंद की घूमर (उत्सव) मनाओ, मौज लो।

"आज उड़े आनंद श्याम को" – आज श्याम के आनंद की बयार बह रही है, खुशियाँ उड़ रही हैं।

"घणा दिना स्यू दिकता यो, आनंद उत्सव आयो" – बहुत दिनों से जिस आनंद उत्सव का इंतजार था, वह आ गया। हमारा श्याम सजकर बैठा है, जिसे देखकर मन हर्षित हो रहा है। भक्त कहता है कि दर्शन कर ले भाया।

"भांति भांति का इतर लगाया, महक रयो दरबार" – दरबार में तरह-तरह के इत्र लगाए गए हैं, पूरा दरबार महक रहा है। आज श्याम धणी (मालिक) दातार (दाता) बहुत ही उदार (मूलक) हैं। प्रेम से देख ले भाया।

"भाव देखकर प्रेमियों को, खोल दियो भण्डारो" – भक्तों के प्रेम भाव को देखकर, बाबा खाटू वाले ने अपना भण्डार खोल दिया है और खुद हाथों से लुटा रहे हैं। लेखक जीतू कहते हैं कि भाया, लूट ले (इस अवसर का लाभ उठा ले)।

🔍 इस आनंद भजन का विशेष महत्त्व

"घूमर" का प्रतीकात्मक अर्थ: राजस्थानी संस्कृति में घूमर एक प्रमुख लोक नृत्य है जो उल्लास और उत्सव का प्रतीक है। यहाँ "घूमर घाल" कहकर भक्त श्याम बाबा के दरबार में आनंद और उत्सव मनाने का आह्वान कर रहा है।

राजस्थानी भाषा का प्रयोग: इस भजन में "घूमर", "घाल", "भाया", "घणा दिना स्यू दिकता", "महक रयो", "बड़ो मूलक", "धणी", "भण्डारो", "लुटा रयो" जैसे राजस्थानी शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो इसे प्रामाणिक और लोक संस्कृति से जोड़ता है।

दरबार की सजावट और सुगंध: "भांति भांति का इतर लगाया, महक रयो दरबार" – यह पंक्ति श्याम बाबा के दरबार की भव्य सजावट और वहाँ फैली सुगंध का वर्णन करती है। यह उत्सव के माहौल को जीवंत करती है।

प्रेमियों पर कृपा: "भाव देखकर प्रेमियों को, खोल दियो भण्डारो" – यह पंक्ति बताती है कि श्याम बाबा अपने भक्तों के प्रेम भाव से इतने प्रसन्न होते हैं कि वे अपना पूरा भण्डार खोल देते हैं और स्वयं हाथों से लुटाते हैं। यह उनकी उदारता और दयालुता का प्रतीक है।

"जीतू" लूट ले: लेखक जयंत सारदा (जीतू) जी ने अपने नाम का उल्लेख करते हुए स्वयं को भी इस आनंद और कृपा का भागीदार बताया है। वे कहते हैं कि भाया, इस अवसर को लूट लो, क्योंकि बाबा खुद हाथों से लुटा रहे हैं।

💖 श्याम दरबार में आनंद का उत्सव

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्याम बाबा का दरबार हमेशा आनंद और उत्सव से भरा रहता है। बहुत दिनों के इंतजार के बाद जब वह उत्सव आता है, तो पूरा दरबार सज जाता है, महक उठता है, और बाबा खुद अपने भक्तों पर कृपा की वर्षा करते हैं। भक्तों को चाहिए कि वे इस अवसर को लूट लें, दर्शन करें, प्रेम से देखें, और श्याम के आनंद में मौज लें।

✨ राजस्थानी लोक भक्ति की झलक

घूमर घाल रे भाया केवल एक भजन नहीं, बल्कि राजस्थानी लोक संस्कृति और श्याम भक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। जयंत सारदा (जीतू) जी ने अपनी इस रचना में राजस्थानी भाषा, लोक संगीत और श्याम प्रेम को इस तरह पिरोया है कि भजन सुनने वाला भी उस आनंद और उत्सव का हिस्सा बन जाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि श्याम बाबा का प्रेम और उनकी कृपा हमेशा हमारे लिए उपलब्ध है, बस हमें उसे लूटने की जरूरत है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया।।

॥ जयंत सारदा (जीतू) जी कृत श्याम भजन ॥
॥ घूमर घाल रे भाया, आज उड़े आनंद श्याम को ॥

लेखक: जयंत सारदा (जीतू) जी | Jayant Sarada (Jeetu) Ji

॥ 'जीतू' लूट ले भाया, आज उड़े आनंद श्याम को ॥

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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