आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Krishna Bhajan

Kalyug Ki Sachai Lyrics (कलयुग की सच्चाई साँच कहूँ सूं सांवरिया) – Shyam Bhajan 2026 | Bin Matlab Ke

244 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 कलयुग की सच्चाई – साँच कहूँ सूं सांवरिया

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Kalyug Ki Sachai Lyrics In Hindi) – Shyam Bhajan 2026 | Bin Matlab Ke

भीमसैन कृत भजन

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: श्याम भजन / खाटू श्याम भजन
🏷️ श्रेणी: भक्ति गीत, प्रेरक भजन
📍 भाव: कलयुग की सच्चाई, निस्वार्थ भक्ति

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

साँच कहूँ सूं सांवरिया मैं,
झूठ बताता ना,
बिन मतलब तो, बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा १ ॥

झूठ कपट राखें सै मन में,
छप्पन भोग लगावे,
सवामणी का लालच देकर,
काम कराना चावे,
शृद्धा से करमां सा खींचड़,
कोई खुवाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा २ ॥

धन दौलत और कोठी बंगला,
माँगे सोना चांदी,
माँगे सोना चांदी, माँगे सोना चांदी,
माया के चक्कर में दुनियाँ,
कितनी हो रही आँधी,
कितनी हो रही आँधी, कितनी हो रही आँधी,
अरे सुदामा सा यार किते कोई टोये (खोजे) पाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा ३ ॥

एक मुट्ठी का दान करें सै,
और एड (अड्वॅरटाइजमेन्ट) करे सै भारी,
नहीं तेरेते लुखमाँ (छिपा हुआ) तू जाणे सै सारी,
मीरा नरसी जैसे बनके,
कोई दिखाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा ४ ॥

आजकाल कुछ भगत श्याम तेरे,
हो रहे घणे खुदगर्जी,
मान चाहे मत मान श्याम,
आगे तेरी मरजी,
बिन मतलब तो "भीमसैन" तेरे भजण बनाता ना,
बिन मतलब तो श्याम तेरे कोई भजन सुनाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

साँच कहूँ सूं सांवरिया मैं,
झूठ बताता ना,
बिन मतलब तो, बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

✍️ रचनाकार :- भीमसैन (भीमसैन कृत)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "कलयुग की सच्चाई" आज के समय की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। भक्त सांवरिया (श्याम) से सच कह रहा है कि आज के कलयुग में कोई भी बिना मतलब के श्याम के दरबार में नहीं आता।

"झूठ कपट राखें सै मन में, छप्पन भोग लगावे" – भक्त बताते हैं कि लोग मन में छल-कपट रखते हैं, दिखावे के लिए छप्पन भोग लगाते हैं और सवामणी (मन्नत) का लालच देकर अपना काम निकलवाना चाहते हैं। सच्ची श्रद्धा से कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता।

"धन दौलत और कोठी बंगला, माँगे सोना चांदी" – आज की दुनिया केवल माया के चक्कर में पागल हो रही है। लोग केवल भौतिक सुख-सुविधाएं मांगते हैं। कोई सुदामा जैसा निस्वार्थ मित्र नहीं खोजता जिसने बिना कुछ मांगे केवल प्रेम दिया।

"एक मुट्ठी का दान करें सै, और एड करे सै भारी" – लोग थोड़ा सा दान करके उसका बड़ा प्रचार करवाते हैं, लेकिन छिपे हुए भावों को श्याम ही जानते हैं। मीरा और नरसी जैसे सच्चे भक्त आज कोई दिखाई नहीं देते।

"आजकाल कुछ भगत श्याम तेरे, हो रहे घणे खुदगर्जी" – आज के भक्त स्वार्थी हो गए हैं। अंत में रचनाकार भीमसैन कहते हैं कि वह भी बिना मतलब के भजन नहीं बना रहे - यह कलयुग की सच्चाई को उजागर करने का उनका प्रयास है।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

कलयुग का आईना: यह भजन आज के समाज का दर्पण है जहाँ हर रिश्ता, हर भक्ति स्वार्थ से प्रेरित है। यह हमें आत्ममंथन करने का अवसर देता है कि हम किस भावना से भगवान के पास जाते हैं।

"बिन मतलब" की पुनरावृत्ति: पूरे भजन में बार-बार आने वाली पंक्ति "बिन मतलब तो श्याम कोई तेरे दर पे आता ना" इस सच्चाई को रेखांकित करती है कि आज की भक्ति में निस्वार्थ भाव लगभग समाप्त हो गया है।

सुदामा, मीरा और नरसी का संदर्भ: भक्ति के इन आदर्श चरित्रों का उल्लेख करके भजन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति कैसी होती थी - निस्वार्थ, प्रेमपूर्ण और बिना किसी अपेक्षा के।

राजस्थानी भाषा का प्रभाव: "साँच कहूँ सूं", "सवामणी", "खींचड़", "खुदगर्जी" जैसे शब्द इस भजन को राजस्थानी लोक शैली से जोड़ते हैं और इसे और अधिक प्रामाणिक बनाते हैं।

💖 निस्वार्थ भक्ति की सीख

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि सच्ची भक्ति बिना किसी स्वार्थ के होनी चाहिए। भगवान से केवल लेने की भावना नहीं, बल्कि देने और समर्पण की भावना होनी चाहिए। जैसे सुदामा, मीरा और नरसी ने बिना किसी अपेक्षा के प्रेम किया, वैसे ही हमें भी भक्ति करनी चाहिए।

✨ आत्मचिंतन का अवसर

कलयुग की सच्चाई केवल एक भजन नहीं, बल्कि हम सभी के लिए आत्मचिंतन का अवसर है। यह हमसे पूछता है - क्या हम सच में निस्वार्थ भाव से श्याम के दरबार में जाते हैं या केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए? यह भजन हमें अपनी भक्ति की परख करने की प्रेरणा देता है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ भीमसैन कृत भजन ॥
॥ साँच कहूँ सूं सांवरिया, झूठ बताता ना ।।
श्रेणियां: Krishna Bhajan krishna

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });