आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
khatu shayam bhajan

Kar De Re Aas Poori Kar De Lyrics (कर दे रे आस पूरी कर दे) – Surbhi Sharma Shyam Bhajan 2026 | Main Aaya Khatu Mein

181 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 कर दे रे आस पूरी कर दे – मैं आया खाटू में

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Kar De Re Aas Poori Kar De Lyrics In Hindi) – Surbhi Sharma Shyam Bhajan 2026 | Main Aaya Khatu Mein

गायिका: सुरभि शर्मा || गीतकार: राहुल शर्मा || तर्ज: रिमझिम के गीत

📝 भजन विवरण

🎤 गायिका: सुरभि शर्मा (Surbhi Sharma)
✍️ गीतकार: राहुल शर्मा (Rahul Sharma)
🎵 तर्ज: रिमझिम के गीत
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन
📍 भाव: श्रद्धा, समर्पण, दर्शन की आस

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

कर दे रे आस पूरी कर दे, कर दे,
मैं आया खाटू में, मैं आया खाटू में॥

तर्ज – रिमझिम के गीत

॥ अंतरा १ ॥

रूप तेरा मन बसाया,
गलियां तेरे लिए है सजाया,
नैना प्यासी करके छोड़ा,
ना तू आया ना बताया,
दर्शन की आस पूरी कर दे,
कर दे,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥

॥ अंतरा २ ॥

है भंवर में फसी नैया,
तू तो है इस जगत का खिवैया,
मैं तो हारा तू सहारा,
तूने सबको गले से लगाया,
चरणों में दास को अब रख ले,
रख ले,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥

॥ अंतरा ३ ॥

मैं दीवाना तेरा प्यारा,
श्याम छोडूं ना दर मैं तिहारा,
तू बुलाया मैं खाटू आया,
'सुरभी राहुल' को दिल में बसाया,
झूमूँ रे आज झूमु नाचू नाचू,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥

कर दे रे आस पूरी कर दे, कर दे,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥

🎤 गायिका :- सुरभि शर्मा (Surbhi Sharma)

✍️ गीतकार :- राहुल शर्मा (Rahul Sharma)

तर्ज: रिमझिम के गीत पर आधारित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "कर दे रे आस पूरी कर दे" सुरभि शर्मा की सुरीली आवाज़ में खाटू श्याम बाबा के प्रति एक भक्त की व्याकुलता और दर्शन की उत्कट अभिलाषा को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की पुकार है जो खाटू धाम आया है और श्याम बाबा से दर्शन देने और उसकी आस पूरी करने की प्रार्थना कर रहा है।

"रूप तेरा मन बसाया, गलियां तेरे लिए है सजाया" – भक्त कहता है कि उसने अपने मन में श्याम बाबा के रूप को बसाया है और उनके स्वागत के लिए गलियों को सजाया है। लेकिन नैनों को प्यासा करके छोड़ दिया, न तो वे स्वयं आए और न ही कुछ बताया। इसलिए भक्त दर्शन की आस पूरी करने की प्रार्थना करता है।

"है भंवर में फसी नैया, तू तो है इस जगत का खिवैया" – भक्त की जीवन रूपी नैया भंवर में फंसी हुई है और श्याम बाबा इस संसार के खिवैया (नाविक) हैं जो नैया पार लगाते हैं। भक्त हारा हुआ है और बाबा ही उसका एकमात्र सहारा हैं। उन्होंने सबको गले से लगाया है, इसलिए भक्त प्रार्थना करता है कि उसे भी अपने चरणों में रख लें।

"मैं दीवाना तेरा प्यारा, श्याम छोडूं ना दर मैं तिहारा" – भक्त श्याम का दीवाना और प्यारा है और वह कसम खाता है कि वह श्याम का दर नहीं छोड़ेगा। बाबा ने बुलाया तो वह खाटू आ गया। अंत में गीतकार राहुल शर्मा और गायिका सुरभि शर्मा अपने नाम का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि बाबा ने 'सुरभी राहुल' को दिल में बसाया है और आज वे खुशी से झूम रहे हैं, नाच रहे हैं।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

तर्ज: रिमझिम के गीत: यह भजन प्रसिद्ध फिल्मी गीत "रिमझिम के गीत" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत मधुर और लोकप्रिय है, जिससे यह भजन और भी आकर्षक और यादगार बन गया है।

"मैं आया खाटू में" की पुनरावृत्ति: पूरे भजन में "मैं आया खाटू में" की पंक्ति बार-बार आती है, जो भक्त के खाटू धाम पहुंचने की खुशी और उसके विश्वास को दर्शाती है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जो हर श्याम भक्त करना चाहता है।

खिवैया के रूप में श्याम: "तू तो है इस जगत का खिवैया" – इस पंक्ति में श्याम बाबा को जगत का खिवैया (नाविक) कहा गया है। यह उनके उस स्वरूप को दर्शाता है जो संसार रूपी सागर में डूबते-उतराते भक्तों की नैया पार लगाते हैं।

सुरभि शर्मा का गायन: सुरभि शर्मा ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम है।

राहुल शर्मा के बोल: गीतकार राहुल शर्मा ने इस भजन में श्याम प्रेम को बड़े ही सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में पिरोया है। अंतिम अंतरे में "सुरभी राहुल" का उल्लेख करके उन्होंने अपनी और गायिका की भक्ति को भी इस भजन में शामिल कर लिया है।

💖 श्याम दरबार में भक्त की पुकार

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्याम बाबा के दरबार में आने वाला हर भक्त उनसे दर्शन की आस लगाए बैठा है। जब कोई सहारा नहीं होता, तब श्याम ही खिवैया बनकर नैया पार लगाते हैं। भक्त की व्याकुलता और प्रेम ही उसे श्याम के दर तक खींच लाता है, और वहाँ पहुंचकर वह झूम उठता है, नाच उठता है।

✨ खाटू आने की खुशी

कर दे रे आस पूरी कर दे केवल एक भजन नहीं, बल्कि हर उस श्याम भक्त की आवाज़ है जो खाटू धाम पहुंचने की खुशी और श्याम बाबा से मिलन की व्याकुलता को व्यक्त करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से पुकारने पर श्याम बाबा अपने भक्तों के दिल में बसते हैं और उनकी हर आस पूरी करते हैं।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ राहुल शर्मा कृत श्याम भजन ॥
॥ मैं आया खाटू में, मैं आया खाटू में ॥

गायिका: सुरभि शर्मा | गीतकार: राहुल शर्मा

तर्ज: रिमझिम के गीत | Tune: Rimjhim Ke Geet

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });