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Khatu Jo Jakar Aai Ekli Lyrics (खाटू जो जाकर आई एकली) – Shyam Bhajan 2026 | O Mhari Nandoli

164 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 खाटू जो जाकर आई एकली – म्हारे से नाराज़ हो गई

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Khatu Jo Jakar Aai Ekli Lyrics In Hindi) – Shyam Bhajan 2026 | O Mhari Nandoli

तर्ज: ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ || राजस्थानी शैली

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: राजस्थानी लोक भजन
🎵 तर्ज: ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन / मेला भजन
📍 भाव: प्रेम, रूठना, मनाना, श्याम मेले का उत्साह
🎨 विशेष: राजस्थानी लोक संस्कृति का प्रतिबिंब

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी-राजस्थानी मिश्रित)

॥ स्थायी ॥

ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ॥

तर्ज – ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ

॥ अंतरा १ ॥

ओ म्हारे पीहर का के मन में तो खटास हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ॥

॥ अंतरा २ ॥

ओ म्हारे बालम से खरी-खोटी बात हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ॥

॥ अंतरा ३ ॥

ओ म्हाने ताणा मारण ने सगला भेड़ा हो गया,
बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली,
अरे तू तो बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली ॥

॥ अंतरा ४ ॥

हो इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो,
नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली,
अरे मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली,
ओ सुन लियो, नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली,
अरे मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली ॥

ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई,
खाटू जो जाकर आई एकली,
ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अनूठा राजस्थानी शैली का श्याम भजन "खाटू जो जाकर आई एकली" एक भक्त महिला (नंदोली) की कहानी बताता है जो खाटू श्याम के मेले में अकेली चली गई थी। भजन में उसके परिवार की प्रतिक्रिया और उसकी बातचीत को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

"ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई, खाटू जो जाकर आई एकली" – यहाँ नंदोली (भक्त महिला) अपने परिवार से कह रही है कि वह खाटू के मेले में अकेली चली गई थी, जिससे उसके अपने नाराज हो गए।

"ओ म्हारे पीहर का के मन में तो खटास हो गई" – उसके मायके वालों के मन में खटास (कड़वाहट) आ गई कि वह अकेली मेले में चली गई।

"ओ म्हारे बालम से खरी-खोटी बात हो गई" – उसके पति (बालम) से भी उसकी खरी-खोटी बात (तकरार) हो गई, क्योंकि वह अकेली गई थी।

"ओ म्हाने ताणा मारण ने सगला भेड़ा हो गया, बोल्या क्यूँ मेलो देखी एकली" – उसके सभी रिश्तेदार (सगला) उसे ताना मारने लगे कि वह अकेली मेला देखने क्यों चली गई।

"हो इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो, नईं तो मैं ओज्यो जासूं एकली" – अब वह अगले मेले के लिए सभी को तैयार रहने को कहती है, नहीं तो वह फिर से अकेली चली जाएगी। जवाब में कोई कहता है "मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली" – मैं भी चलूंगा, अकेली मत जाना।

यह भजन बड़े ही हास्यपूर्ण और हृदयस्पर्शी ढंग से श्याम मेले के प्रति लोगों के प्रेम और परिवार के रिश्तों को दर्शाता है।

🔍 इस अनूठे भजन का विशेष महत्त्व

राजस्थानी लोक शैली: यह भजन पूरी तरह से राजस्थानी लोक शैली में रचा गया है, जिसमें "म्हारी", "पीहर", "बालम", "सगला" जैसे राजस्थानी शब्दों का प्रयोग हुआ है। यह राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतिबिंब है।

तर्ज: "ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ": यह भजन प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत "ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत लोकप्रिय और मधुर है, जिससे यह भजन और भी आकर्षक बन गया है।

मेले का उत्साह: यह भजन खाटू श्याम के मेले के प्रति लोगों के उत्साह और प्रेम को दर्शाता है। नंदोली का अकेले मेले में चले जाना दिखाता है कि श्याम भक्ति का आकर्षण इतना गहरा है कि लोग अकेले भी मेले में चले जाते हैं।

पारिवारिक रिश्तों का चित्रण: इस भजन में पारिवारिक रिश्तों का बड़ा ही सुंदर चित्रण है – मायके वालों की खटास, पति से तकरार, रिश्तेदारों के ताने, और अंत में पति का यह कहना कि "मैं भी जावांगा, मत न जाजे एकली"। यह सब बड़े ही मनोरंजक और हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

"इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो": यह पंक्ति अगले मेले के लिए सभी को तैयार रहने का संदेश देती है। यह एक प्रकार का निमंत्रण है कि अब सब मिलकर मेले में चलेंगे, कोई अकेला नहीं जाएगा।

श्याम भक्ति में रूठना-मनाना: यह भजन श्याम भक्ति के एक अनूठे पहलू को दिखाता है – जैसे परिवार में रूठना-मनाना होता है, वैसे ही भक्त भी श्याम मेले को लेकर रूठते और मनाते हैं। यह भक्ति में मानवीय भावनाओं का सुंदर समावेश है।

💖 श्याम मेले का उत्साह और पारिवारिक प्रेम

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्याम बाबा के प्रति प्रेम और उनके मेले के प्रति उत्साह इतना गहरा होता है कि भक्त अकेले भी वहाँ चला जाता है। साथ ही, यह भजन पारिवारिक रिश्तों की मिठास और प्रेम को भी दर्शाता है। परिवार वाले रूठते हैं, ताने मारते हैं, लेकिन अंत में सब साथ चलने को तैयार हो जाते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि श्याम भक्ति परिवार को जोड़ने का काम करती है, और हर सदस्य उस मेले का हिस्सा बनना चाहता है।

✨ राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक

खाटू जो जाकर आई एकली केवल एक भजन नहीं, बल्कि राजस्थानी लोक संस्कृति की एक जीवंत झलक है। इसमें हम देखते हैं कि कैसे एक महिला अपने परिवार के साथ रूठती-मनाती है, और कैसे अंत में सब एक साथ मेले में चलने का निर्णय लेते हैं। यह भजन हमें राजस्थान की भाषा, संस्कृति, और पारिवारिक मूल्यों से परिचित कराता है। यह सच्चे अर्थों में लोकरंग में रंगा हुआ भजन है जो श्याम प्रेम और पारिवारिक प्रेम दोनों को दर्शाता है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। इबके मेले पे सगला ही तैयार रहिजो।।

॥ राजस्थानी शैली में श्याम भजन ॥
॥ ओ म्हारी नंदोली म्हारे से नाराज़ हो गई ॥

तर्ज: ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ

॥ खाटू जो जाकर आई एकली, ओ मैं तो खाटू जो जाकर आई एकली ॥

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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