आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
khatu shayam bhajan

Kyun Karun Main Fikar Lyrics (क्यों करूं मैं फिकर मुझको काहे का डर) – Ratan Azad Shyam Bhajan 2026 | Haare Ka Sahara

216 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 क्यों करूं मैं फिकर – मुझको काहे का डर

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Kyun Karun Main Fikar Lyrics In Hindi) – Ratan Azad Shyam Bhajan 2026 | Haare Ka Sahara

गायक: रतन आज़ाद || गीतकार: नरेश नरसी जी || तर्ज: मेरे रश्के क़मर

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: रतन आज़ाद (Ratan Azad)
✍️ गीतकार: नरेश नरसी जी (Naresh Narsi Ji)
🎵 तर्ज: मेरे रश्के क़मर
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन
📍 भाव: विश्वास, समर्पण, कृतज्ञता

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया,
हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई,
जिंदगी का गुजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

तर्ज – मेरे रश्के क़मर

॥ अंतरा १ ॥

जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा,
श्याम भजनों में मन को, लगाने लगा,
एक लहर सी बदन में, यूँ उठने लगी,
स्वर्ग जैसा नजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा २ ॥

गम का मारा था मैं, बेसहारा था मैं,
उस घड़ी अपने, जीवन से हारा था मैं,
खुद ब खुद ये कदम, खाटू बढ़ने लगे,
श्याम परिवार सारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा ३ ॥

मुझको जीवन में, जो कुछ भी दौलत मिली,
सांवरे वो तुम्हारी, बदौलत मिली,
मैं भिखारी बना, जब से दरबार का,
सांवरे का इशारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा ४ ॥

हर मुसीबत से 'नरसी', निकाला मुझे,
नैया जो डगमगाई, संभाला मुझे,
डूबने जो लगा, हाथ पकड़ा मेरा,
डूबते को किनारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया,
हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई,
जिंदगी का गुजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

🎤 गायक :- रतन आज़ाद (Ratan Azad)

✍️ गीतकार :- नरेश नरसी जी (Naresh Narsi Ji)

तर्ज: मेरे रश्के क़मर पर आधारित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "क्यों करूं मैं फिकर मुझको काहे का डर" रतन आज़ाद की सुरीली आवाज़ में खाटू श्याम बाबा के प्रति अटूट विश्वास और कृतज्ञता को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त का है जिसे श्याम बाबा का सहारा मिल गया है और अब उसे किसी बात की चिंता या डर नहीं है।

"क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर" – भक्त कहता है कि अब वह चिंता क्यों करे, उसे किस बात का डर? क्योंकि उसे "हारे का सहारा" मिल गया है। श्याम बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है, और भक्त को वह सहारा मिल गया है।

"हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई" – बाबा के मिलने से हर खुशी मिल गई और हर मुसीबत टल गई। जिंदगी का गुजारा (जीवनयापन का साधन) भी मिल गया।

"जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा" – भक्त बताता है कि जब से वह श्याम बाबा के कीर्तन में आने लगा और श्याम भजनों में मन लगाने लगा, उसके शरीर में एक लहर सी उठने लगी और उसे स्वर्ग जैसा नजारा मिल गया।

"गम का मारा था मैं, बेसहारा था मैं" – भक्त स्वीकार करता है कि वह दुखों से मारा हुआ था, बेसहारा था, और जीवन से हार चुका था। लेकिन फिर खुद-ब-खुद उसके कदम खाटू की ओर बढ़ने लगे और उसे पूरा श्याम परिवार मिल गया।

"मुझको जीवन में, जो कुछ भी दौलत मिली, सांवरे वो तुम्हारी, बदौलत मिली" – भक्त कहता है कि जीवन में जो कुछ भी उसे धन-दौलत मिली, वह सब सांवरे (श्याम बाबा) की बदौलत मिली। वह जब से दरबार का भिखारी बना, उसे सांवरे का इशारा मिल गया।

"हर मुसीबत से नरसी, निकाला मुझे" – गीतकार नरेश नरसी जी अपने नाम का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि बाबा ने उन्हें हर मुसीबत से निकाला, डगमगाती नैया को संभाला, और डूबते हुए को किनारा मिल गया।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

"हारे का सहारा" – श्याम बाबा की पहचान: खाटू श्याम बाबा को "हारे का सहारा" कहा जाता है। यह भजन इसी विशेषता को केंद्र में रखकर बनाया गया है। भक्त कहता है कि उसे वह सहारा मिल गया है, इसलिए अब उसे किसी बात की चिंता नहीं।

तर्ज: "मेरे रश्के क़मर": यह भजन प्रसिद्ध गज़ल "मेरे रश्के क़मर" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत मधुर और लोकप्रिय है, जिससे यह भजन और भी आकर्षक और यादगार बन गया है।

कीर्तन का महत्व: "जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा" – यह पंक्ति सामूहिक कीर्तन के महत्व को दर्शाती है। कीर्तन में आने और भजनों में मन लगाने से आध्यात्मिक अनुभूति होती है, एक लहर सी उठती है।

खाटू की ओर खिंचाव: "खुद ब खुद ये कदम, खाटू बढ़ने लगे" – यह पंक्ति बताती है कि जब बाबा बुलाते हैं, तो भक्त के कदम खुद-ब-खुद खाटू की ओर बढ़ने लगते हैं। यह दैवीय खिंचाव का प्रतीक है।

श्याम परिवार: "श्याम परिवार सारा, मुझे मिल गया" – यह भजन में आने वाले सभी भक्तों को श्याम परिवार के रूप में संबोधित करता है। श्याम भक्ति में एक बड़ा परिवार मिल जाता है।

नरसी जी की रचना: गीतकार नरेश नरसी जी ने "नरसी" नाम का उल्लेख करके इस भजन को व्यक्तिगत और हृदयस्पर्शी बना दिया है। वे स्वयं को उस भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हैं जिसे बाबा ने हर मुसीबत से निकाला।

रतन आज़ाद का गायन: गायक रतन आज़ाद ने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह विश्वास और समर्पण साफ सुनाई देता है जो इस भजन का मूल स्वर है।

💖 हारे का सहारा – श्याम बाबा

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि जिसे श्याम बाबा का सहारा मिल जाए, उसे किसी बात की चिंता या डर नहीं रहता। बाबा हारे हुए, बेसहारा, गम से मारे हुए लोगों को उठाते हैं, उनकी नैया पार लगाते हैं, डूबते हुए का हाथ पकड़ते हैं और उन्हें किनारा देते हैं। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में हार मान चुका है और एक सहारे की तलाश में है।

✨ कृतज्ञता का भाव

क्यों करूं मैं फिकर मुझको काहे का डर केवल एक भजन नहीं, बल्कि कृतज्ञता की वह अभिव्यक्ति है जो एक भक्त के हृदय से निकलती है जब उसे एहसास होता है कि श्याम बाबा ने उसे कितना कुछ दिया है। यह भजन हमें सिखाता है कि बाबा की कृपा से हर खुशी मिलती है, हर बला टलती है, और जीवन का हर गुजारा उन्हीं की बदौलत है। जब बाबा का सहारा मिल जाए, तो फिर चिंता और डर का कोई स्थान नहीं रहता।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ नरेश नरसी जी कृत श्याम भजन ॥
॥ हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया ॥

गायक: रतन आज़ाद | गीतकार: नरेश नरसी जी

तर्ज: मेरे रश्के क़मर | Tune: Mere Rashke Qamar

श्रेणियां: khatu shayam bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });