आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Puran

पाताल लोक: रहस्यमयी सातों लोकों का वर्णन और वहाँ के निवासी (Patal Lok: Description of the Seven Netherworlds and Their Inhabitants)

2,158 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🐉 पाताल लोक: सातों पातालों का रहस्य

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

वहाँ के निवासी, सुंदरता और रहस्य (Mystical Netherworlds)

नाग-दानवों की अद्भुत नगरी

🌟 पाताल लोक का परिचय: पृथ्वी के नीचे का संसार

पाताल लोक हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार चौदह लोकों में से एक है। यह पृथ्वी के नीचे स्थित सात लोकों (अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल) का समूह है। इसे नागलोक या दैत्यों का निवास स्थान भी कहा जाता है।

आम धारणा के विपरीत पाताल लोक को नर्क नहीं माना जाता। श्रीमद्भागवत और अन्य पुराणों के अनुसार यह लोक अत्यंत सुंदर, वैभवशाली और भोग-विलास से परिपूर्ण है। यहाँ नाग, दैत्य, दानव, और राक्षस निवास करते हैं जो सुख-सुविधाओं में देवताओं से भी बढ़कर हैं।

पाताल लोक के निवासी साधारणत: परोपकारी, विद्वान और धर्मात्मा होते हैं। यहाँ वास करने वाले प्रमुख नागों में शेषनाग, वासुकी, तक्षक आदि हैं, तो दैत्यों में बलि, प्रह्लाद, विरोचन जैसे महान राजा हुए हैं।

🔱 सात पाताल: क्रमानुसार वर्णन (सबसे ऊपर से नीचे)

1

अतल (Atala)

इस लोक का स्वामी बल नामक असुर है। यहाँ से मद-विद्या (माया) का प्रादुर्भाव हुआ। अतल में रहने वाले योगिनियाँ तीन प्रकार की स्त्रियाँ उत्पन्न करती हैं - स्वैरिणी, कामिनी और पुंश्चली, जो पुरुषों को भोग में व्यस्त रखती हैं।

2

वितल (Vitala)

इस लोक के अधिपति हाटकेश्वर (भगवान शिव का रूप) हैं। यहाँ स्वर्ण (हाटक) की उत्पत्ति होती है। भगवान शिव यहाँ भैरव रूप में रहते हैं और चित्रा नामक गण के साथ आनंदित रहते हैं।

3

सुतल (Sutala)

यह सबसे प्रसिद्ध पाताल है क्योंकि यहाँ महाराज बलि निवास करते हैं। भगवान वामन ने बलि को सुतल का स्वामी बनाया था। यह लोक धन-धान्य से परिपूर्ण है और यहाँ बलि की न्यायप्रिय सरकार है। वामन (विष्णु) स्वयं इस लोक के द्वारपाल हैं।

4

तलातल (Talatala)

इस लोक के स्वामी असुरों के गुरु शुक्राचार्य हैं। उनकी मायावी शक्तियों से यह लोक रक्षित है। यहाँ माया का सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त होता है।

5

महातल (Mahatala)

यह कुण्डलिनी शक्ति का स्थान है। यहाँ अनेक सिरों वाले नाग निवास करते हैं - कुहक, तक्षक, कालिय, सुषेण आदि। ये नाग शांतिप्रिय और धर्मात्मा हैं, लेकिन इनका विष अत्यंत तीक्ष्ण है।

6

रसातल (Rasatala)

यहाँ दैत्य, दानव और राक्षस रहते हैं - नमुचि, शंबर, द्विमूर्धा, विप्रचित्ति आदि। ये सभी देवताओं के शत्रु हैं लेकिन ब्रह्माजी के वरदान से अभय हैं। वे सुख-विलास में लीन रहते हैं।

7

पाताल (Patala)

सबसे निचला और सबसे वैभवशाली लोक। यहाँ शेषनाग (अनंत) निवास करते हैं, जो अपने फन पर सारे ब्रह्मांड को धारण किए हैं। यहाँ असंख्य मणियाँ और रत्न हैं। इस लोक में 100 करोड़ योजन विस्तृत नगर हैं, जहाँ नाग-कन्याएँ नृत्य करती हैं और स्वर्ण-महल हैं।

💎 पुराण वचन: श्रीमद्भागवत (5.24.8-9) के अनुसार पाताल लोक सातों पातालों में सर्वश्रेष्ठ है। वहाँ के उद्यान, विमान और नाग-कन्याओं का सौंदर्य अलौकिक है।

🐍 पाताल लोक के प्रमुख निवासी (Inhabitants)

🐉

नाग (Serpents)

  • शेषनाग (आदिशेष): सभी नागों के राजा। भगवान विष्णु की शय्या और पृथ्वी का आधार।
  • वासुकी: समुद्र मंथन में रस्सी का काम किया। शिव के गले में नाग।
  • तक्षक: क्षत्रियों के विनाश के लिए प्रसिद्ध, परीक्षित को दंश दिया।
  • कालिय: यमुना में विष फैलाया, कृष्ण ने दमन किया।
  • कर्कोटक: नल को विकृत रूप दिया।
👹

दैत्य-दानव (Demons)

  • महाराज बलि: दैत्यराज, प्रह्लाद के पौत्र, सुतल के अधिपति। अत्यंत दानी और धर्मात्मा।
  • प्रह्लाद: भक्त शिरोमणि, विष्णु भक्त।
  • हिरण्यकशिपु: भक्त प्रह्लाद के पिता, नरसिंह द्वारा वध।
  • विप्रचित्ति: रसातल के प्रमुख दानव।
  • मय दानव: महान वास्तुकार, राक्षसों के गुरु।
🧚

नाग-कन्याएँ (Nagakanyas)

पाताल की अप्सराएँ। अत्यंत सुंदर, दिव्य गंध और अलौकिक शक्तियों से युक्त। इनका विवाह अक्सर मनुष्यों या देवताओं से होता है (जैसे उलूपी का अर्जुन से विवाह)।

निवासी समूह प्रमुख नाम विशेषता
नाग शेष, वासुकी, तक्षक, कार्कोटक दिव्य, ज्ञानी, धन-रत्नों के स्वामी
दैत्य बलि, प्रह्लाद, विरोचन धर्मात्मा, शक्तिशाली, देवताओं से बड़े
दानव विप्रचित्ति, हयग्रीव योद्धा, तामसी प्रवृत्ति के
यक्ष-गंधर्व गुह्यक, किंनर कला, संगीत, धन के रक्षक

🔬 क्या पाताल लोक केवल मिथक है? वैज्ञानिक दृष्टि

कुआलालम्पुर विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि पृथ्वी के अंदर बड़ी-बड़ी गुफाएँ, जल-कुंड और जीवन-योग्य क्षेत्र हो सकते हैं। 2021 में मेक्सिको में 1000 मीटर गहरी चीवा गुफा में नई प्रजातियाँ मिली हैं।

  • भूमिगत सागर: रूस में 12 किमी गहरा कुआँ खोदने पर जीवाश्म मिले।
  • अंधेरे में जीवन: समुद्र की गहराइयों में बिना प्रकाश के जीव मिले हैं।
  • गुफा सभ्यताएँ: कप्पाडोकिया (तुर्की) में 20 मंजिल गहरा भूमिगत शहर है।
  • तिब्बती पांडुलिपियाँ: अगरथी नामक भूमिगत सभ्यता का उल्लेख मिलता है।

हो सकता है पाताल लोक का वर्णन इन्हीं भूमिगत गुफाओं और उनकी अद्भुत सभ्यताओं पर आधारित हो। नागों का वर्णन साँपों की पूजा करने वाली प्राचीन जनजातियों से जुड़ा हो सकता है।

🌍

पृथ्वी की गहराई
केंद्र तक 6371 किमी

⬇️

पाताल?
70-300 किमी गहराई

💡 रोचक: 2020 में ऑस्ट्रेलिया में 1.6 किमी गहरी गुफा मिली, जहाँ अनोखे कीट-पतंगे रहते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं पृथ्वी के अंदर अज्ञात जैव-विविधता है।

✨ पाताल लोक का वैभव (Splendor of Patala)

  • 💎 रत्न-मणियाँ: नागों के फनों में मणियाँ (नागमणि) जो अंधेरे में प्रकाश फैलाती हैं।
  • 🏰 स्वर्ण महल: पद्मराग मणियों से जड़े विमान और भवन।
  • 🌺 दिव्य उद्यान: सुरभि वृक्ष, पारिजात जैसे पुष्प, सदाबहार बाग।
  • 🍷 भोग-विलास: मैरेय मदिरा, स्वादिष्ट भोजन, नाग-कन्याओं का नृत्य-संगीत।
  • 🎨 चित्रशालाएँ: दिव्य चित्र और मूर्तियाँ, कलात्मक सज्जा।
💠

शेषनाग का वास

सबसे निचले पाताल में शेषनाग के 1000 फन हैं। प्रत्येक फन पर एक ग्रह या लोक टिका है। उनके मुख से निकलने वाली ज्वाला से रुद्र रूपी कालाग्नि प्रकट होती है।

🐍

"न तत्र सूर्यो न च चन्द्रतारकं न विद्यते द्यौर्न च भूर्न वायुना। स्वयं ज्योतिर्भास्वरतेजसां पदं पद्मैर्विचित्रैरुपशोभितं वरम्॥"

(अर्थ: वहाँ न सूर्य, न चंद्र-तारे हैं; न आकाश-पृथ्वी। वहाँ स्वयं प्रकाशमान तेजस्वी रत्नों का प्रकाश है, जो कमलों से सुशोभित है।)

📜 पुराणों में पाताल लोक का वर्णन

पुराण/ग्रंथ विवरण
श्रीमद्भागवत (स्कंध 5, अध्याय 24) सातों पातालों का विस्तार से वर्णन। बलि को सुतल का राज्य। नागों के नाम और गुण।
विष्णु पुराण (अंश 2, अध्याय 5) पातालों के नाम और वहाँ के निवासियों की सूची। रसातल में दैत्य-दानवों का वर्णन।
ब्रह्म पुराण (अध्याय 214-215) पातालों की भौगोलिक स्थिति, नागों के वंश और मणियों का वर्णन।
पद्म पुराण (सृष्टि खंड) पाताल में स्थित भगवान विष्णु के आदिवराह अवतार का मंदिर और शिवलिंग।
महाभारत (आदि पर्व) नागों की उत्पत्ति, जनमेजय के सर्प सत्र और आस्तीक ऋषि की कथा। अर्जुन का पाताल गमन।

📖 प्रमुख पौराणिक कथाएँ (Mythological Stories)

महाभारत के अनुसार अर्जुन ने द्रौपदी के साथ किए गए करार के अनुसार तीर्थयात्रा की। इसी दौरान वे पाताल लोक पहुँचे। वहाँ उनका स्वागत नागराज वासुकी ने किया। अर्जुन ने नाग-कन्या उलूपी से विवाह किया और उनसे इरावान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। उलूपी ने अर्जुन को नागलोक की अमोघ विद्याएँ और शक्तियाँ प्रदान कीं।

दैत्यराज बलि ने यज्ञ कर देवताओं से तीनों लोक छीन लिए। देवताओं ने विष्णु से रक्षा माँगी। विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप धरा और बलि से तीन पग भूमि दान माँगी। बलि ने दान दे दिया। वामन ने विराट रूप धरकर एक पग में स्वर्ग, दूसरे में पृथ्वी नाप ली। तीसरा पग रखने के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर विष्णु ने उसे पाताल (सुतल) का राज्य दे दिया और स्वयं उसके द्वारपाल बन गए। आज भी बलि सुतल में निवास करते हैं और धर्मपूर्वक राज्य करते हैं।

कालिय नाग रमणक द्वीप (पाताल के एक भाग) का निवासी था। गरुड़ के भय से वह यमुना नदी में जा बसा। उसके विष से यमुना का जल दूषित हो गया। एक दिन बाल कृष्ण यमुना तट पर आए और कालिय के फन पर नृत्य किया। कालिय की अहंकार-शक्ति समाप्त हो गई। तब कालिय की पत्नियों ने कृष्ण से प्रार्थना की। कृष्ण ने कालिय को क्षमा किया और उसे वापस पाताल लोक भेज दिया, साथ ही वरदान दिया कि अब गरुड़ उस पर आक्रमण नहीं करेगा क्योंकि कृष्ण के चरण-चिह्न उसके फन पर अंकित हैं।

समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला, तो असुर राहु ने देवों का रूप धरकर अमृतपान किया। सूर्य-चंद्र ने पहचान कर विष्णु को बताया। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर अमृत प्रभाव से अमर हो गया और ग्रह बना। यह सिर (राहु) और धड़ (केतु) पाताल लोक में निवास करते हैं। राहु ग्रहण के समय सूर्य-चंद्र को ग्रसता है। केतु भी पाताल में रहता है और अशुभ फल देता है।

🕉️ पाताल लोक का आध्यात्मिक महत्व

🧬

कुण्डलिनी शक्ति

तंत्र शास्त्र के अनुसार पाताल लोक मूलाधार चक्र का प्रतीक है। यहाँ नागिनी (कुण्डलिनी) कुंडली मारकर सोई है। पाताल के नाग और नागिनियाँ इसी शक्ति के बाह्य रूप हैं। मूलाधार जागरण से साधक पाताल लोक के रहस्यों को जान सकता है।

🐉

नाग पूजा

भारत में नाग पंचमी पर नागों की पूजा होती है। नागों को धन, ज्ञान और सुख का दाता माना गया है। पाताल के नागों की कृपा से मनुष्य को भय (विष) से मुक्ति मिलती है और धन की प्राप्ति होती है। नागों के दर्शन या स्वप्न को शुभ माना जाता है।

🙏 प्रार्थना

"नागानां चैव सर्पाणां ये च पातालवासिनः। तेभ्यः सर्वेभ्यः कुर्वन्ति नमस्कारं दिने दिने॥"

(अर्थ: नागों और सर्पों की, जो पाताल में वास करते हैं, उन सबको हम प्रतिदिन नमस्कार करते हैं।)

🙏 पाताल लोक में देवता (Deities in Patala)

🐗

वराह अवतार

पद्म पुराण के अनुसार सबसे निचले पाताल में भगवान विष्णु का आदिवराह रूप निवास करता है। वे पृथ्वी को धारण किए हैं।

🕉️

हाटकेश्वर (शिव)

वितल लोक के अधिपति हाटकेश्वर भैरव हैं। यहाँ सोने की उत्पत्ति शिव के पसीने से बताई गई है।

🚪

वामन (विष्णु)

सुतल लोक के द्वारपाल भगवान वामन हैं। वे महाराज बलि के रक्षक हैं।

❓ पाताल लोक: मिथक और सच्चाई

मिथक (Myth) सच्चाई (Truth)
पाताल का अर्थ नर्क (Hell) है। ✅ पाताल नर्क नहीं, बल्कि देवताओं से भी अधिक सुख-सुविधा वाला लोक है। नर्क अलग स्थान है जहाँ पापियों को दंड मिलता है।
पाताल में केवल राक्षस रहते हैं। ✅ यहाँ नाग, दैत्य, दानव, यक्ष, गंधर्व और ऋषि भी रहते हैं। अधिकांश धर्मात्मा हैं।
पाताल अंधकारमय है। ✅ पाताल नागमणियों और रत्नों के प्रकाश से जगमगाता है। वहाँ सूर्य-चंद्र की आवश्यकता नहीं।
पाताल पृथ्वी के नीचे ही है। ✅ पुराणों के अनुसार पाताल भौतिक पृथ्वी के नीचे स्थित है, लेकिन यह दिव्य लोक है, साधारण गुफाएँ नहीं।
नाग लोक केवल कल्पना है। ✅ वैज्ञानिक दृष्टि से संभव है कि भूमिगत गुफाओं में सर्प-पूजक जनजातियाँ रहती हों, जिन्हें नाग कहा गया।

❓ पाताल लोक से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या पाताल लोक और नर्क एक ही हैं?

उत्तर: नहीं, पाताल और नर्क बिल्कुल अलग हैं। पाताल सात लोकों में से एक है, जो सुख-ऐश्वर्य का स्थान है। नर्क (यमलोक) पापियों के दंड का स्थान है, जो पृथ्वी से भिन्न आयाम में है।

प्रश्न 2: सबसे प्रसिद्ध पाताल निवासी कौन हैं?

उत्तर: महाराज बलि (सुतल के राजा) और शेषनाग (सबसे निचले पाताल के स्वामी)। प्रह्लाद, वासुकी, तक्षक भी प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 3: क्या पाताल लोक में जाना संभव है?

उत्तर: पुराणों के अनुसार तपस्या और दैवीय वरदान से ही पाताल जाया जा सकता है। सामान्य मनुष्य नहीं जा सकता। अर्जुन, सहदेव जैसे वीर गए थे।

प्रश्न 4: क्या नाग वास्तव में पाताल में रहते हैं?

उत्तर: हिंदू आस्था के अनुसार हाँ। नाग दिव्य सर्प हैं जो मणियों से युक्त हैं और मनुष्य रूप धारण कर सकते हैं। उनके राज्य पाताल में हैं।

प्रश्न 5: पाताल लोक कितना गहरा है?

उत्तर: श्रीमद्भागवत के अनुसार पाताल (सबसे निचला) पृथ्वी से 70,000 योजन (लगभग 8-9 लाख किमी) नीचे है। लेकिन यह खगोलीय माप है, भौतिक नहीं।

प्रश्न 6: क्या पाताल लोक में स्त्रियाँ रहती हैं?

उत्तर: हाँ, नाग-कन्याएँ, दैत्य-दानव स्त्रियाँ, ऋषि पत्नियाँ आदि। ये अत्यंत सुंदर और सुशील होती हैं। उलूपी नाग-कन्या थीं।

प्रश्न 7: क्या पाताल लोक में कोई मंदिर है?

उत्तर: हाँ, पुराणों में वराह भगवान और शिव (हाटकेश्वर) के मंदिरों का उल्लेख है। नाग भी भगवान विष्णु के भक्त हैं।

📝 निष्कर्ष: पाताल लोक का महत्व

पाताल लोक हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान का एक अद्भु� अंग है। यह केवल राक्षसों का निवास नहीं, बल्कि एक संपूर्ण सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैभवशाली लोक है, जहाँ धर्म, न्याय, सुख और ऐश्वर्य का अद्भुत संगम है। महाराज बलि, प्रह्लाद, शेषनाग जैसे चरित्र हमें सिखाते हैं कि भले ही कोई असुर योनि में हो, लेकिन भक्ति, दान और धर्म से वह देवताओं से भी बढ़कर पूजनीय बन सकता है।

पाताल लोक का वर्णन हमारी संस्कृति में न केवल रोमांच और कल्पना का स्रोत है, बल्कि यह हमें यह भी बताता है कि सृष्टि विविध और रहस्यमयी है। पृथ्वी के नीचे भी जीवन हो सकता है - यह विचार आधुनिक विज्ञान की भूमिगत जीवन की संभावनाओं से मेल खाता है।

पाताल के नाग और दैत्य हमें स्मरण दिलाते हैं कि सृष्टि में केवल देवता ही श्रेष्ठ नहीं हैं, बल्कि जो धर्म पर चलता है, वही पूज्य है - चाहे वह स्वर्ग में हो या पाताल में।

🙏 ॐ नागेन्द्राय नमः। सर्वे भवन्तु सुखिनः।।

🐉 पाताल लोक और वहाँ के निवासी
भूलोक से भी सुंदर, रहस्यमयी दुनिया
श्रेणियां: Puran

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });