आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
temple

सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर – स्थानीय हनुमान मंदिर, भक्तों का विश्वास केंद्र भदोही (उत्तर प्रदेश)

225 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

स्थानीय हनुमान मंदिर, भक्तों का विश्वास केंद्र – भदोही (उत्तर प्रदेश)

आस्था, चमत्कार और रामभक्ति का प्राचीन केंद्र

🌟 परिचय: सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सदियों से आस्था और चमत्कारों का जीवंत केंद्र रहा है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले भक्तों की असीम आस्था का प्रतीक है।

मान्यता है कि यह मंदिर सिद्धपीठों में से एक है, जहाँ बजरंगबली स्वयं विराजमान हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यहाँ का वातावरण भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। मंदिर परिसर में प्राचीन वट वृक्ष और एक पवित्र कुंड भी है, जो इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

यह स्थल न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए, बल्कि आध्यात्मिक साधना, ध्यान और रामकथा के आयोजनों के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित है, जो अपने हथकरघा और कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भदोही शहर से लगभग 8 किमी दूर ज्ञानपुर मार्ग पर स्थित है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) और प्रयागराज (इलाहाबाद) के मध्य में स्थित।
  • रेल मार्ग: भदोही का अपना रेलवे स्टेशन (भदोही रेलवे स्टेशन) है, जो दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग से जुड़ा है। कई प्रमुख ट्रेनें यहाँ रुकती हैं। गोपीगंज रेलवे स्टेशन भी निकट है (लगभग 12 किमी)।
  • सड़क मार्ग: भदोही सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वाराणसी, इलाहाबाद, प्रयागराज, आजमगढ़ से बसें और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 45-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
🗺️

ज्ञानपुर मार्ग, भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~50 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~95 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय किवदंतियों के अनुसार, त्रेता युग में जब भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में दक्षिण की ओर जा रहे थे, तब हनुमान जी इस क्षेत्र से गुजरे थे। एक वट वृक्ष के नीचे विश्राम करते समय उन्होंने इस स्थान को अपनी उपस्थिति से पवित्र किया। बाद में एक तपस्वी संत को सपने में हनुमान जी ने दर्शन दिए और यहाँ उनकी प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया।

एक अन्य कथा के अनुसार, यहाँ भूमिगत एक प्राचीन हनुमान प्रतिमा मिली थी, जिसे स्थानीय राजा या जमींदार ने प्रकट कर मंदिर की स्थापना की। तभी से यह स्थल सिद्धपीठ के रूप में विख्यात हुआ। समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, और आज यह भदोही क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

मंदिर परिसर में आज भी वह प्राचीन वट वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे हनुमान जी ने विश्राम किया था। भक्त इस वृक्ष पर धागा बांधकर अपनी मन्नतें मांगते हैं।

🌳

"प्राचीन वट वृक्ष के नीचे हुआ था हनुमान जी का विश्राम"

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं।

🏛️ मंदिर की वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मूर्ति का स्वरूप

मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा अत्यंत मनोहारी और अद्भुत है। यह प्रतिमा लगभग 5 फीट ऊंची है, जिसमें बजरंगबली भक्तिभाव से एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में संजीवनी पर्वत लिए हुए हैं। प्रतिमा पर प्रतिदिन फूलों का श्रंगार और सिन्दूर चढ़ाया जाता है, जिससे यह और भी भव्य लगती है।

🌳 प्राचीन वट वृक्ष

मंदिर परिसर का एक प्रमुख आकर्षण यहाँ का विशाल वट वृक्ष है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जाता है। भक्त इस वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और मन्नत के धागे बांधते हैं। यह वृक्ष आस्था और आशीर्वाद का प्रतीक है।

💧 पवित्र कुंड

मंदिर के पास ही एक प्राचीन कुंड है, जिसे हनुमान कुंड कहा जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। कुंड के चारों ओर सीढ़ियां बनी हैं और इसका पानी हमेशा स्वच्छ रहता है।

🛕 भव्य प्रवेश द्वार और सभामंडप

हाल ही में मंदिर के प्रवेश द्वार का पुनर्निर्माण कर एक भव्य द्वार बनाया गया है, जिस पर हनुमान जी के जीवन के दृश्य उकेरे गए हैं। सभामंडप में रामायण और हनुमान चालीसा के पाठ का नियमित आयोजन होता है।

📿 धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियाँ

सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर में नियमित रूप से कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं:

📖

हनुमान चालीसा पाठ

प्रति मंगलवार और शनिवार को सामूहिक हनुमान चालीसा का आयोजन होता है, जिसमें सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं।

🔊

रामायण पाठ

हर रविवार और पूर्णिमा के दिन रामायण के अखंड पाठ का आयोजन किया जाता है।

🪔

भंडारा

विशेष अवसरों और मंगलवार को भक्तों के लिए प्रसाद और भंडारे का आयोजन होता है।

यहाँ बड़ी संख्या में भक्त हनुमान जी पर चोला चढ़ाने और गदा भेंट करने आते हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति: मान्यता है कि यहाँ हनुमान जी का स्मरण करने से आसुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • संतान सुख: निःसंतान दंपत्ति यहाँ आकर विशेष अनुष्ठान करते हैं और हनुमान जी से संतान का आशीर्वाद मांगते हैं।
  • रोग निवारण: कुंड में स्नान और हनुमान जी के दर्शन मात्र से कई असाध्य रोग ठीक होने की मान्यता है।
  • संकट मोचन: भगवान हनुमान संकटमोचक हैं – यहाँ आने वाले हर भक्त के कष्ट दूर होते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: वट वृक्ष पर धागा बांधकर मांगी गई मन्नत पूरी होती है, ऐसी असंख्य श्रद्धालुओं की आस्था है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🙏

हनुमान जयंती

चैत्र पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस महापर्व पर मंदिर में विशेष श्रृंगार, महाआरती और भंडारा होता है। हजारों भक्त दर्शन को आते हैं।

🌿

मंगलवार और शनिवार

सप्ताह के ये दिन हनुमान जी को समर्पित होते हैं। हर मंगल और शनि को मेले जैसा माहौल रहता है, भक्त दूर-दूर से आते हैं।

🌕

बड़ा मंगल

ज्येष्ठ मास में आने वाले बड़े मंगल पर विशाल शोभायात्रा निकलती है और मंदिर को फूलों से सजाया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • बाबा बड़े शिव धाम (गोपीगंज): भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ कमल तालाब और नंदी की विशाल प्रतिमा है। लगभग 15 किमी दूर।
  • सीता समाहित स्थल (भदोही): गंगा तट पर स्थित, जहाँ माता सीता धरती में समाई थीं। यहाँ 110 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा है। लगभग 20 किमी।
  • सेमराध नाथ धाम (भदोही): कुएं में स्थित अनोखा शिव मंदिर, जहाँ प्रकाश पुंज से शिवलिंग प्रकट हुए थे। लगभग 25 किमी।
  • वाराणसी (काशी): काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती, और सारनाथ। लगभग 50 किमी।
  • चुनार किला: मिर्जापुर में ऐतिहासिक किला, लगभग 65 किमी।
  • रामनगर का किला: वाराणसी के पास स्थित किला और संग्रहालय।
  • भदोही शहर: अपने कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध बाजार और हथकरघा केंद्र।
📌 यात्रा टिप: आप एक ही यात्रा में सिधपित हनुमान मंदिर (भदोही), बाबा बड़े शिव धाम (गोपीगंज) और सीता समाहित स्थल (भदोही) तीनों के दर्शन कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे से 20-25 किमी के दायरे में स्थित हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

यहाँ यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है। हनुमान जयंती (मार्च-अप्रैल) और बड़ा मंगल (मई-जून) के अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं, हालांकि गर्मी में भीड़ अधिक हो सकती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंगलवार या शनिवार के दिन दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है।
  • वट वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
  • कुंड में स्नान करने से पूर्व जल की शुद्धता जांच लें।
  • पूजा सामग्री (सिन्दूर, चोला, नारियल) मंदिर परिसर के बाहर आसानी से मिल जाती है।
  • स्वच्छता बनाए रखें और परिसर में प्लास्टिक का उपयोग न करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, भदोही शहर से लगभग 8 किमी दूर ज्ञानपुर मार्ग पर स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की क्या विशेषता है?

उत्तर: यह एक सिद्धपीठ है, जहाँ प्राचीन वट वृक्ष, हनुमान कुंड और चमत्कारी हनुमान प्रतिमा है। मान्यता है कि यहाँ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। हनुमान जयंती और मंगलवार/शनिवार के दिन विशेष रहते हैं।

प्रश्न 5: निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन और गोपीगंज रेलवे स्टेशन दोनों निकट हैं (10-12 किमी)।

प्रश्न 6: क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर के पास कुछ धर्मशालाएं हैं। बेहतर आवास के लिए भदोही शहर या वाराणसी में ठहर सकते हैं।

प्रश्न 7: मंदिर के आसपास और कौन-कौन से धार्मिक स्थल हैं?

उत्तर: सीता समाहित स्थल, सेमराध नाथ धाम, बाबा बड़े शिव धाम (गोपीगंज), वाराणसी आदि प्रमुख हैं।

📝 निष्कर्ष: सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर, भदोही का वह पवित्र स्थल है जहाँ आस्था, इतिहास और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उन लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है जो बजरंगबली को अपना सब कुछ मानते हैं।

यहाँ का प्राचीन वट वृक्ष, पवित्र कुंड, और मनोहारी मूर्ति हर आने वाले को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। यदि आप वाराणसी या प्रयागराज की यात्रा पर हैं, तो इस सिद्धपीठ के दर्शन अवश्य करें और हनुमान जी की असीम कृपा के भागी बनें।

🙏 श्री राम जय राम जय जय राम ।। हनुमान जी की जय ।।

🙏 सिधपित प्राचीन हनुमान मंदिर, भदोही
आस्था और चमत्कारों का प्राचीन केंद्र
श्रेणियां: temple Mandir

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });