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Mahadev Shiv Bhajan

Trete Mein Ram Na Hote Lyrics (त्रेता में राम न होते) – Jagat Kalyan Na Hota Bhajan 2026

151 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

(Trete Mein Ram Na Hote Lyrics In Hindi) – Jagat Kalyan Na Hota Bhajan 2026

भक्ति भजन || राम-कृष्ण की महिमा

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: भक्ति भजन / राम-कृष्ण भजन
🏷️ श्रेणी: प्रेरक भजन, आस्था भजन
📍 भाव: कृतज्ञता, ईश्वरीय लीलाओं का महत्व

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते,
यदि चारों धाम न होते, जगत कल्याण न होता॥

॥ अंतरा १ (रामायण) ॥

यदि राम-सिया का वन-गमन न होता,
तो दशरथ जी का मरण न होता।
सीता चुराई न जाती, लंका जलाई न जाती,
यदि रावण मरण न होता, तो जग कल्याण न होता॥

॥ अंतरा २ (महाभारत) ॥

यदि अर्जुन के संग श्रीकृष्ण न होते,
तो दुर्योधन भी यूँ हारे न होते।
सारा राज नहीं जाता, सर का ताज नहीं जाता,
यदि महाभारत न होता, तो जग कल्याण न होता॥

॥ अंतरा ३ (हनुमान) ॥

यदि राम के संग में हनुमान न होते,
तो लक्ष्मण जी के प्राण न होते।
कौन संजीवनी लाता, कौन बूटी को पिलाता,
यदि लक्ष्मण जीवित न होते, तो जग कल्याण न होता॥

॥ अंतरा ४ (भक्ति और गुरु) ॥

यदि भक्तों के संग भगवान न होते,
तो सारी उम्र के अरमान न होते।
अरमान नहीं होता, सम्मान नहीं होता,
यदि गुरु का ज्ञान न होता, तो जग कल्याण न होता॥

॥ अंतरा ५ ॥

शिव जी की जटा में, गंगा न समाती,
वो पाप तारने धरती पे न आती।
होते राम नहीं सीता, होती रामायण न गीता,
यही हरि-कीर्तन न होता, जगत कल्याण न होता॥

त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते,
यदि चारों धाम न होते, जगत कल्याण न होता॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत गहन और भावपूर्ण भजन "त्रेता में राम न होते" रामायण, महाभारत और हिंदू धर्म की मूलभूत मान्यताओं के अभाव में जगत के कल्याण की कल्पना करता है। यह हमें बताता है कि भगवान के अवतारों, उनकी लीलाओं और भक्तों की अगाध आस्था ने ही संसार का कल्याण किया है।

"त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते" – यदि त्रेता युग में भगवान राम न होते और द्वापर में कृष्ण (घनश्याम) न होते, और यदि चार धाम (बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी) न होते, तो जगत का कल्याण न होता।

रामायण प्रसंग: यदि राम-सीता का वनवास न हुआ होता, दशरथ का मरण न हुआ होता, सीता हरण और लंका दहन न हुआ होता, और रावण का वध न हुआ होता, तो धर्म की स्थापना नहीं हो पाती और जगत का कल्याण न होता।

महाभारत प्रसंग: यदि अर्जुन के साथ कृष्ण न होते, तो दुर्योधन उस प्रकार हारता भी नहीं। राज्य और सम्मान दोनों ही हाथ से न जाते, परंतु महाभारत युद्ध न होने से धर्म की विजय नहीं होती और जगत का कल्याण न होता।

हनुमान जी का योगदान: यदि राम के साथ हनुमान न होते, तो लक्ष्मण के प्राण न बचते। संजीवनी बूटी कौन लाता और कौन पिलाता? यदि लक्ष्मण जीवित न होते तो जगत कल्याण न होता।

भक्त और गुरु: यदि भक्तों के साथ भगवान न होते, तो मनोरथ पूरे न होते। न अरमान मिलते, न सम्मान। गुरु का ज्ञान न होता तो जगत कल्याण न होता।

शिव, गंगा और भक्ति परंपरा: शिव की जटा में गंगा न समाती, तो वह पाप तारने धरती पर न आती। राम और सीता न होते तो रामायण और गीता न होती, हरि-कीर्तन न होता, और जगत का कल्याण न होता।

🔍 इस भजन का विशेष महत्व

प्रमुख हिंदू मान्यताओं का संकलन: इस भजन में रामायण, महाभारत, हनुमान-लीला, शिव-गंगा, चार धाम, रामायण-गीता-कीर्तन जैसी सभी प्रमुख मान्यताओं का समावेश है।

"जगत कल्याण न होता" की पुनरावृत्ति: हर अंतरे के अंत में यह पंक्ति आती है, जो यह बताती है कि इन ईश्वरीय लीलाओं के अभाव में संसार का कल्याण संभव नहीं था।

त्रेता और द्वापर का संदर्भ: यह भजन हिंदू मान्यता के अनुसार चार युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग) का उल्लेख करता है। त्रेता के अवतार राम और द्वापर के अवतार कृष्ण को केन्द्र में रखा गया है।

भक्ति और गुरु का महत्व: चौथे अंतरे में भक्त-भगवान के संबंध और गुरु के ज्ञान के बिना जगत के कल्याण की असंभवता बताई गई है।

शिव-गंगा की महिमा: पाँचवें अंतरे में शिव द्वारा गंगा को धारण करने की कथा से यह बताया गया है कि गंगा के पाप-तारण स्वरूप के बिना पापियों का उद्धार कठिन होता।

💖 ईश्वरीय लीलाओं का महत्व

🎯 संदेश

यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान के अवतार, उनकी लीलाएँ, भक्तों की सेवा, गुरु का ज्ञान और पवित्र तीर्थ ही इस संसार के कल्याण के आधार हैं। राम के बिना रामायण नहीं होती, कृष्ण के बिना गीता नहीं होती, और हनुमान के बिना लक्ष्मण के प्राण नहीं बचते। इसलिए हमें इन सबके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए और उनके महत्व को समझना चाहिए।

✨ कृतज्ञता का भाव

त्रेता में राम न होते केवल एक भजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि हम जो कुछ भी हैं, उन महान विभूतियों की कृपा से हैं जिन्होंने इस धरा पर धर्म की स्थापना की।

🙏 जय श्री राम || जय श्री कृष्ण || जय हनुमान || हरि-कीर्तन की जय 🙏

॥ राम-कृष्ण भजन ॥
॥ त्रेता में राम न होते, द्वापर घनश्याम न होते, यदि चारों धाम न होते, जगत कल्याण न होता ॥

लोकप्रिय भक्ति भजन | Popular Devotional Bhajan

॥ जगत कल्याण न होता – ईश्वरीय लीलाओं का अभाव ॥

श्रेणियां: Mahadev Shiv Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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