आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Puran

संतान प्राप्ति: पद्म पुराण में व्रत-उपाय (Childbirth Remedies & Fasts in Padma Purana)

309 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

👶 संतान प्राप्ति: पद्म पुराण में व्रत-उपाय

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

पुत्र प्राप्ति के चमत्कारी उपाय (Proven Childbirth Remedies from Padma Purana)

पद्म पुराण के अनुसार नि:संतान दंपति के लिए सर्वोत्तम मार्गदर्शन

🌟 पद्म पुराण: संतान सुख का दिव्य मार्ग

संतान की प्राप्ति हर गृहस्थ के जीवन की सबसे बड़ी अभिलाषा होती है। जब यह इच्छा अधूरी रह जाती है, तो मन व्याकुल हो उठता है। ऐसे समय में हमारे धार्मिक ग्रंथ और पुराण ही सहारा बनते हैं। पद्म पुराण, जो अठारह महापुराणों में द्वितीय स्थान रखता है, में संतान प्राप्ति के अनेक अचूक व्रत और उपायों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह पुराण न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी व्यक्ति को आशा और विश्वास प्रदान करता है।

पद्म पुराण के पाताल खण्ड, सृष्टि खण्ड और अन्य भागों में संतान से जुड़े विविध उपाय बताए गए हैं। चाहे वह पुत्रदा एकादशी का व्रत हो, संतान गोपाल मंत्र का जाप हो, या राजा ऋतंभर की कथा, ये सभी उपाय समय के साथ असंख्य दंपतियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं।

🌙 पुत्रदा एकादशी: पद्म पुराण में वर्णित प्रमुख व्रत

पद्म पुराण में सबसे प्रभावी संतान प्राप्ति व्रत के रूप में पुत्रदा एकादशी का उल्लेख मिलता है। इस एकादशी का महात्म्य विशेष रूप से पौष और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आता है।[reference:0][reference:1]

📅 कब रखें व्रत?

  • पौष पुत्रदा एकादशी: पौष मास (दिसंबर-जनवरी) के शुक्ल पक्ष की एकादशी
  • श्रावण पुत्रदा एकादशी: श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के शुक्ल पक्ष की एकादशी

✨ व्रत का फल

  • संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है
  • पुत्र की दीर्घायु और सद्बुद्धि की प्राप्ति
  • वंश वृद्धि और कुल का उद्धार
  • सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति[reference:2]
📌 पद्म पुराण का वचन: "पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।"[reference:3]

📿 पुत्रदा एकादशी व्रत विधि: चरणबद्ध मार्गदर्शन

1

दशमी तिथि की तैयारी

एकादशी से एक दिन पहले (दशमी) को एक बार भोजन करें। रात में सात्विक भोजन ग्रहण करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।

2

एकादशी प्रातःकाल

सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें: "मैं संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत कर रहा हूँ।"

3

पूजन सामग्री

भगवान विष्णु या बाल गोपाल (बाल कृष्ण) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजन के लिए: पंचामृत, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) एकत्र करें।[reference:4]

4

विधिवत पूजन

भगवान विष्णु/बालकृष्ण का आवाहन करें। पंचामृत से अभिषेक करें। पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।[reference:5]

5

कथा पाठ एवं मंत्र जाप

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। विशेष रूप से संतान गोपाल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।[reference:6]

6

रात्रि जागरण एवं भजन

रात्रि में भगवान के भजन-कीर्तन करें। भगवद् चिंतन में समय बिताएं।

7

द्वादशी को पारण

अगले दिन द्वादशी तिथि को उचित मुहूर्त में व्रत का पारण करें। किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।[reference:7]

⚠️ विशेष सुझाव: यह व्रत पति-पत्नी दोनों मिलकर करें तो अधिक फलदायी माना जाता है। पत्नी को निराहार रहना चाहिए और पति फलाहार कर सकता है।[reference:8]

📖 पौराणिक कथा: राजा ऋतंभर और जावलि मुनि (Padma Purana Story)

🌟 कथा का सारांश

पद्म पुराण के पाताल खण्ड में राजा ऋतंभर की एक अद्भुत कथा आती है। राजा ऋतंभर अत्यंत धर्मात्मा और प्रजावत्सल थे। उनकी अनेक रानियाँ थीं, लेकिन वृद्धावस्था तक राजा की कोई संतान नहीं हुई।[reference:9]

एक दिन राजा अत्यंत दुखी मन से जावलि मुनि के पास पहुँचे और बोले, "हे मुनिवर! मेरे पास सब कुछ है - धन, वैभव, राज्य, लेकिन एक संतान के अभाव में यह सब व्यर्थ है। कृपया मुझे संतान प्राप्ति का कोई उपाय बताइए।"

राजा का व्याकुल स्वर सुनकर जावलि मुनि ने कहा, "राजन! संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले मनुष्य के लिए तीन प्रकार के उपाय हैं: गो सेवा (गाय की सेवा), तुलसी पूजन और एकादशी व्रत।"[reference:10]

मुनि के निर्देशानुसार राजा ऋतंभर ने नियमित रूप से गायों की सेवा की, तुलसी के पौधे में जल चढ़ाया और विधिपूर्वक एकादशी का व्रत किया। उनकी श्रद्धा और निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति का आशीर्वाद दिया।[reference:11]

📌 कथा का नैतिक संदेश

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण के साथ किए गए उपाय अवश्य फलित होते हैं। विलंब से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि धैर्य और विश्वास के साथ साधना जारी रखनी चाहिए। भगवान अपने भक्तों की पुकार को अवश्य सुनते हैं।

📖 पौराणिक कथा: राजा दशरथ और पुत्रकामेष्टि यज्ञ (Ramayana Connection)

🌟 कथा का सारांश

यद्यपि यह कथा मुख्य रूप से रामायण से संबंधित है, पद्म पुराण में भी पुत्रकामेष्टि यज्ञ की महिमा का उल्लेख मिलता है। अयोध्या के महाराज दशरथ की कोई संतान नहीं थी। वृद्धावस्था में पुत्र की कामना से व्याकुल होकर राजा न�षि वशिष्ठ से परामर्श किया।

ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को पुत्रकामेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी। इस यज्ञ का फल यह था कि राजा दशरथ को चारों पुत्र - राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति हुई।[reference:12]

📌 कथा का नैतिक संदेश

यह कथा बताती है कि पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ और अनुष्ठान अत्यंत प्रभावी होते हैं। इसके अलावा, इसे पद्म पुराण के संदर्भ में देखें तो यह सिद्ध होता है कि पुराणों में बताए गए उपाय युगों-युगों से सिद्ध और सफल हैं।

🔊 संतान गोपाल मंत्र: पद्म पुराण का महामंत्र

पद्म पुराण के खण्ड 5, अध्याय 160 में संतान गोपाल मंत्र का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह मंत्र संतान सुख से वंचित दंपतियों के लिए दिव्य औषधि के समान है।[reference:13]

🌿 संतान गोपाल मंत्र 🌿

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥

या संक्षिप्त मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

📿 मंत्र जाप विधि

  • समय: सुबह-सायं, विशेष रूप से एकादशी के दिन
  • संख्या: प्रतिदिन कम से कम 108 बार, सवा लाख (125,000) जाप अत्यंत फलदायी[reference:14]
  • अवधि: 21 दिन, 40 दिन या जब तक संतान प्राप्ति न हो जाए
  • विशेष: पति-पत्नी दोनों मिलकर मंत्र जाप करें[reference:15]

✨ मंत्र का फल

  • शीघ्र संतान प्राप्ति
  • गर्भधारण में आ रही बाधाओं का निवारण
  • संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि
  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि

🌿 पद्म पुराण के अन्य संतान प्राप्ति उपाय

पद्म पुराण में संतान प्राप्ति के लिए कुछ अन्य सरल उपाय भी बताए गए हैं:

🐄

गो सेवा

राजा ऋतंभर की कथा के अनुसार गाय की सेवा, दान और पूजन से संतान की प्राप्ति होती है।[reference:16]

🌿

तुलसी पूजन

नियमित रूप से तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने और पूजन करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और संतान सुख प्रदान करती हैं।[reference:17]

🍎

फलों का दान

पद्म पुराण के अनुसार, नियमित रूप से आम, नारियल, अनार जैसे फलों का दान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।[reference:18]

📖

भागवत पाठ

श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ करने से नि:संतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है।[reference:19]

🕉️

मंगला गौरी व्रत

यह विशेष व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, विशेष रूप से मंगलवार के दिन।[reference:20]

🪷

पंचमी व्रत

पंचमी तिथि पर माँ स्कंदमाता की साधना करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।[reference:21]

🕉️ पद्म पुराण के श्लोक एवं प्रमाण

🌿 पद्म पुराण (सृष्टिखण्ड 47/11) में वर्णन है:

"पुत्रकामो नरो नित्यं पुत्रदायै नमः सदा। एकादशीं समाश्रित्य पुत्रमाप्नोत्यसंशयम्॥"

अर्थ: जो मनुष्य पुत्र की कामना से पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है, उसे निस्संदेह पुत्र की प्राप्ति होती है।

🌿 पद्म पुराण (पाताल खण्ड) में उल्लेख:

"गवां सेवा च तुलसी पूजनं च विशेषतः। एकादशी व्रतं चैव पुत्रदं नात्र संशयः॥"

अर्थ: गाय की सेवा, तुलसी का पूजन और विशेष रूप से एकादशी का व्रत - ये तीनों संतान प्रदान करने वाले हैं, इसमें कोई संदेह नहीं।

📌 गरुड़ पुराण का प्रमाण: गरुड़ पुराण के 15वें अध्याय में भी संतान प्राप्ति के उपायों का वर्णन मिलता है, जो पद्म पुराण की पुष्टि करता है।[reference:22]

💡 वास्तविक जीवन से जुड़ाव: आस्था और विज्ञान का समन्वय

आधुनिक युग में कई लोग पौराणिक उपायों को केवल अंधविश्वास समझकर दूर कर देते हैं, लेकिन शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इन उपायों के पीछे गहरा मनोवैज्ञानिक तर्क है:

🔬 मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • व्रत: शरीर को विश्राम और डिटॉक्सीफिकेशन का अवसर मिलता है
  • मंत्र जाप: मस्तिष्क को शांति मिलती है, स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं
  • सकारात्मक सोच: आशा और विश्वास से तनाव कम होता है, जो गर्भधारण में सहायक है

🏥 चिकित्सा परामर्श

  • पौराणिक उपायों के साथ-साथ योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें
  • इन उपायों को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प न समझें, बल्कि पूरक मानें
  • श्रद्धा और विज्ञान का संतुलन सफलता की कुंजी है
✨ प्रेरणादायक तथ्य: विश्व के अनेक भागों में किए गए अध्ययन बताते हैं कि नियमित ध्यान, मंत्र जाप और योग से गर्भधारण की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। पद्म पुराण के उपाय इसी वैज्ञानिक सत्य पर आधारित हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या पद्म पुराण के उपाय केवल पुत्र प्राप्ति के लिए हैं या पुत्री के लिए भी?

उत्तर: पद्म पुराण में वर्णित अधिकांश उपाय "संतान" प्राप्ति के लिए हैं, जिसमें पुत्र और पुत्री दोनों सम्मिलित हैं। यदि विशेष रूप से पुत्र की कामना हो तो पुत्रदा एकादशी विशेष रूप से लाभकारी है।

प्रश्न 2: क्या ये उपाय करते समय डॉक्टर का इलाज जारी रखना चाहिए?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। पद्म पुराण के उपाय आस्था और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं, लेकिन ये चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। दोनों को समानांतर जारी रखना चाहिए।

प्रश्न 3: पुत्रदा एकादशी का व्रत कौन कर सकता है?

उत्तर: यह व्रत कोई भी संतान की कामना रखने वाला दंपति कर सकता है। विशेष रूप से पति-पत्नी दोनों मिलकर यह व्रत करें तो अधिक फलदायी माना जाता है।

प्रश्न 4: क्या संतान गोपाल मंत्र का जाप बिना दीक्षा के किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, संतान गोपाल मंत्र एक सार्वभौमिक मंत्र है जिसे बिना दीक्षा के किसी भी व्यक्ति द्वारा जपा जा सकता है। शुद्धता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 5: क्या गो सेवा और तुलसी पूजन वास्तव में संतान प्रदान करते हैं?

उत्तर: पद्म पुराण में राजा ऋतंभर की कथा इसका प्रमाण है। आध्यात्मिक दृष्टि से, गो सेवा और तुलसी पूजन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो गर्भधारण के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।

📝 निष्कर्ष: आस्था और विश्वास के साथ करें उपाय

पद्म पुराण में वर्णित संतान प्राप्ति के उपाय सदियों से चली आ रही हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। ये केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और आध्यात्मिक दृष्टि से गहरा अर्थ छिपा है। व्रत, मंत्र, दान और सेवा - ये सभी साधन हमारे मन को शांत करते हैं, हमारी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और हमें संतान प्राप्ति के योग्य बनाते हैं।

हालाँकि, यह याद रखना भी आवश्यक है कि ये उपाय आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं, बल्कि इसके सहायक हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ इन उपायों को करें, लेकिन साथ ही डॉक्टर की सलाह भी लेते रहें।

पद्म पुराण के श्लोक में कहा गया है कि विधिपूर्वक किए गए उपायों का फल अवश्य मिलता है। धैर्य रखें, सकारात्मक रहें और अपनी साधना जारी रखें।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏

सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

👶 संतान प्राप्ति: पद्म पुराण में व्रत-उपाय
पुत्र प्राप्ति के चमत्कारी उपाय (Proven Childbirth Remedies from Padma Purana)
श्रेणियां: Puran

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });