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Hanuman Bhajan

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (हनुमान जन्मोत्सव) भजन लिरिक्स | Shri Ram Janaki Baithe Hain Mere Seene Mein Lakhbir Singh Lakkha Lyrics

318 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

(Shri Ram Janaki Baithe Hain Mere Seene Mein) – हनुमान जन्मोत्सव भजन

🎤 गायक: लखबीर सिंह लक्खा | हनुमान सीना फाड़ प्रसंग

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: लखबीर सिंह लक्खा
🏷️ श्रेणी: हनुमान भजन / राम भक्ति / जन्मोत्सव
🎶 प्रसंग: हनुमान जी का सीना फाड़कर राम-सीता का दर्शन कराना
📀 भाव: आत्मसमर्पण, राम-प्रेम, भक्ति में मस्ती, हृदय में बसे राम-जानकी

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ प्रस्तावना – विभीषण का ताना और हनुमान का उत्तर ॥

श्री रामचंद्र जी महाराज के भरे दरबार में विभीषण ने ताना मारा—
“ऐ बजरंगी, क्या तेरे मन में भी राम हैं?”
हनुमान जी ने श्रीराम का नाम लिया और सीना फाड़ दिया,
बोले— “ले देख, जय श्री राम!”

नहीं चलाओ बाण व्यंग के,
ऐ विभीषण, ताना न सह पाऊँ।
क्यों तोड़ी है माला,
तुझे ऐ लंकापति बतलाऊँ।
मुझमें भी है, तुझमें भी है,
सबमें है— समझाऊँ।
ऐ लंकापति विभीषण,
ले देख, मैं तुझको आज दिखाऊँ॥
(और वीर बजरंगबली ने सीना चीर दिया, और बोले— “ये ले देख!”)
जय-जय श्री राम, जय-जय श्री राम॥

॥ स्थायी ॥

श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।
देख लो मेरे दिल के नगीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

॥ अंतरा १ – राम नाम का रस ॥

मुझको कीर्ति, न वैभव, न यश चाहिए,
राम के नाम का मुझको रस चाहिए।
मुझको कीर्ति, न वैभव, न यश चाहिए,
राम के नाम का मुझको रस चाहिए॥
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

॥ अंतरा २ – राम रसिया, अनमोल राम-छवि ॥

राम रसिया हूँ, मैं राम सुमिरण करूँ,
सिया राम जी का सदा चिंतन करूँ।
राम रसिया हूँ, मैं राम सुमिरण करूँ,
सिया राम का सदा ही मैं चिंतन करूँ॥
अनमोल कोई भी चीज़ मेरे काम की नहीं,
ऐ विभीषण, दिखती अगर उसमें छवि मेरे सिया-राम की नहीं॥
सच्चा आनंद है ऐसे ही जीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

॥ अंतरा ३ – भक्ति में मस्ती, सीना फाड़ दिखाया ॥

फाड़ सीना है, सबको ये दिखला दिया,
भक्ति में मस्ती है, बेधड़क दिखला दिया।
फाड़ सीना है, सबको ये दिखला दिया,
भक्ति में मस्ती है, बेधड़क दिखला दिया॥
कोई मस्ती न सागर के मीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।
देख लो मेरे दिल के नगीने में,
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (मेरे राम),
श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में (मेरे श्री राम)॥

🎤 गायक : लखबीर सिंह लक्खा

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध हनुमान भजन हनुमान जी के सीना फाड़ने के अमर प्रसंग पर आधारित है। जब विभीषण ने हनुमान जी से प्रश्न किया कि क्या उनके मन में भी राम हैं, तो हनुमान जी ने अपना सीना फाड़कर दिखा दिया कि उनके हृदय में श्री राम-जानकी विराजमान हैं।

“श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” – यह भजन का मूल मंत्र है। हनुमान जी के हृदय में सीता-राम का वास है, यही उनकी भक्ति की पराकाष्ठा है। वे कहते हैं कि देख लो मेरे दिल के नगीने में – अर्थात हृदय रूपी रत्न में राम-जानकी विराजमान हैं।

पहले अंतरे में हनुमान जी कहते हैं कि उन्हें कीर्ति, वैभव या यश नहीं चाहिए, बल्कि केवल राम नाम का रस चाहिए। उनके लिए राम नाम का अमृत पीना ही सबसे बड़ा सुख है।

दूसरे अंतरे में वे कहते हैं – “राम रसिया हूँ, मैं राम सुमिरण करूँ”। वे सदा सिया-राम का चिंतन करते हैं। उनके लिए कोई भी चीज़ अनमोल नहीं है जिसमें राम-सीता की छवि न हो। यह विभीषण को संबोधित एक चुनौती भी है।

तीसरे अंतरे में – “फाड़ सीना है, सबको ये दिखला दिया, भक्ति में मस्ती है, बेधड़क दिखला दिया”। हनुमान जी की भक्ति निर्भीक है, वे अपने प्रभु के प्रति अपने प्रेम को सबके सामने प्रकट करने में संकोच नहीं करते। कोई भी मस्ती सागर के मोती (मीन) में नहीं है, जितनी हनुमान जी की भक्ति में है।

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति का अर्थ है प्रभु को अपने हृदय में बसाना, और उस प्रेम को निःसंकोच व्यक्त करना।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

हनुमान सीना फाड़ प्रसंग: यह रामकथा का एक अत्यंत प्रसिद्ध प्रसंग है जो हनुमान जी की राम के प्रति अनन्य भक्ति को दर्शाता है। इस भजन में उसी प्रसंग को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

भक्ति में निर्भीकता: “बेधड़क दिखला दिया” पंक्ति बताती है कि सच्चे भक्त को अपने प्रभु के प्रति प्रेम दिखाने में किसी प्रकार का भय या लज्जा नहीं होती।

राम नाम का रस: “राम के नाम का मुझको रस चाहिए” – यह पंक्ति भक्ति के उच्चतम स्तर की ओर संकेत करती है जहाँ सांसारिक सुख-वैभव का कोई महत्व नहीं रह जाता।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

सच्चा भक्त वह है जिसके हृदय में प्रभु बसे हों। हनुमान जी की तरह यदि हम अपने हृदय में राम-सीता को बसा लें तो कोई ताना या व्यंग्य हमें विचलित नहीं कर सकता।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष रूप से गाया जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी केवल राम के दूत नहीं, बल्कि राम-सीता के स्थायी निवास स्थान हैं – उनका हृदय।

🙏 जय श्री राम ।। जय सीता राम ।। जय हनुमान ।।

॥ इति लखबीर सिंह लक्खा कृत भजनम् ॥
॥ श्री राम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में – देख लो मेरे दिल के नगीने में ॥
श्रेणियां: Hanuman Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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