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श्री राम तुम्हारे चरणों में मैं शीश झुकाने आया हूँ (प्रार्थना) भजन लिरिक्स | Shri Ram Tumhare Charanon Mein Main Sheesh Jhukane Aaya Hoon Prayer Bhajan Lyrics

281 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 श्री राम तुम्हारे चरणों में – मैं शीश झुकाने आया हूँ

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

(Shri Ram Tumhare Charanon Mein – Main Sheesh Jhukane Aaya Hoon) – प्रार्थना / राम भजन

🌸 मैं जन्म-जन्म का पापी हूँ – प्रभु दाग धुलाने आया हूँ – करुण प्रार्थना

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राम भजन / प्रार्थना / शरणागति गीत
🎶 भाव: विनम्रता, पश्चाताप, समर्पण, करुणा
📍 विशेषता: भक्त की अपनी दीन-हीन स्थिति स्वीकार करते हुए श्री राम के चरणों में शीश झुकाने की प्रार्थना
📀 प्रचलन: राम भक्तों में अत्यंत प्रिय, विशेषकर आत्म-समर्पण भाव से गाया जाने वाला भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।
मैं जन्म-जन्म का पापी हूँ,
प्रभु दाग धुलाने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।

बजरंग सी सेवा-भाव नहीं,
और भरत सा मुझ में त्याग नहीं,
बजरंग सी सेवा-भाव नहीं,
और भरत सा मुझ में त्याग नहीं।
इस खोटे सिक्के को प्रभु जी,
मैं आज चलाने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।

कुछ पुण्य कमाई पास नहीं,
बस पाप की गठरी लाया हूँ,
कुछ पुण्य कमाई पास नहीं,
बस पाप की गठरी लाया हूँ।
रो-रो कर अपने कष्टों को,
प्रभु तुम्हें सुनाने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।

गंगा जल की कोई बूंद नहीं,
और पास में अमृत है ही नहीं,
गंगा जल की कोई बूंद नहीं,
और पास में अमृत है ही नहीं।
इन पापी आँखों के जल से,
तेरे चरणों को धोने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।

ये गांधी मूर्ख अज्ञानी,
न जप तप योग भजन जाने,
ये गांधी मूर्ख अज्ञानी,
न जप तप योग भजन जाने।
बस अपने इन दो नैनों से,
मैं नीर बहाने आया हूँ,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,
मैं शीश झुकाने आया हूँ।

✍️ रचनाकार : लोक परम्परा / राम भक्ति गीत

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत विनम्र और करुण प्रार्थना भजन है, जिसमें भक्त श्री राम के चरणों में अपना सिर झुकाते हुए अपनी दीनता स्वीकार करता है। “श्री राम तुम्हारे चरणों में, मैं शीश झुकाने आया हूँ” – भक्त केवल शीश झुकाने आया है, कोई माँग नहीं, बस समर्पण। “मैं जन्म-जन्म का पापी हूँ, प्रभु दाग धुलाने आया हूँ” – वह अपने पापों का दाग धुलाने आया है, अर्थात क्षमा याचना करने।

पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि उसमें हनुमान जैसा सेवा-भाव नहीं है, और न ही भरत जैसा त्याग। वह स्वयं को “खोटा सिक्का” बताता है, फिर भी प्रभु से प्रार्थना करता है कि इस खोटे सिक्के को चला लो (स्वीकार कर लो)।

दूसरे अंतरे में – उसके पास कोई पुण्य कमाई नहीं, केवल पापों की गठरी है। वह रो-रोकर अपने कष्ट सुनाने आया है।

तीसरे अंतरे में – उसके पास गंगाजल की एक बूंद भी नहीं, न ही अमृत। वह अपनी पापी आँखों के आँसुओं से राम के चरण धोने आया है। यह अत्यंत मार्मिक भाव है – आँसू ही उसका अर्पण है।

चौथे अंतरे में – “गांधी” शब्द संभवतः भक्त का नाम है (गांधी परिवार से संबंधित या उपनाम)। वह स्वयं को मूर्ख, अज्ञानी कहता है, जो जप, तप, योग, भजन कुछ नहीं जानता। बस अपनी दो आँखों से आँसू बहाने आया है।

यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति के लिए न तो पुण्य चाहिए, न तप, न ज्ञान – बस विनम्र हृदय और आँसुओं की भेंट ही पर्याप्त है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

खोटा सिक्का स्वीकार करने की प्रार्थना: भक्त स्वयं को खोटा सिक्का कहता है, फिर भी प्रार्थना करता है कि प्रभु उसे स्वीकार कर लें। यह अत्यंत विनम्रता का भाव है।

आँसुओं से चरण धोने का भाव: “इन पापी आँखों के जल से तेरे चरणों को धोने आया हूँ” – यह मीरा और तुलसीदास की परम्परा में आता है, जहाँ आँसू ही सबसे शुद्ध अर्पण है।

बिना साधन के शरणागति: यह भजन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो लगता है कि उनके पास कोई साधन, पुण्य या योग्यता नहीं है। राम की शरण में आने के लिए केवल सच्चा मन चाहिए।

💖 विनम्रता और शरणागति का भाव

🎯 संदेश

श्री राम के चरणों में सिर झुकाने के लिए किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं। पापी हो या पुण्यात्मा, बस सच्चे मन से शरण में आना ही सबसे बड़ा धर्म है। राम दाग धुला देते हैं, आँसू स्वीकार करते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन लाखों राम भक्तों के हृदय की आवाज़ है। “शीश झुकाने आया हूँ” का सरल भाव ही सच्ची आस्था को दर्शाता है।

🙏 जय श्री राम ।। श्री राम तुम्हारे चरणों में मैं शीश झुकाने आया हूँ ।।

॥ इति राम प्रार्थना भजनम् ॥
॥ मैं जन्म-जन्म का पापी हूँ – प्रभु दाग धुलाने आया हूँ – इन पापी आँखों के जल से तेरे चरणों को धोने आया हूँ ॥
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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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