सनातन श्रेणी संग्रह · पृष्ठ 53
1,810+ पावन रचनाएँ

Krishna Stotram
पावन भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर Krishna Stotram के अंतर्गत सभी भक्ति रचनाओं, लोकप्रिय भजनों, आरतियों, चालीसा और मंत्रों का प्रामाणिक संकलन सरल हिंदी भावार्थ एवं शास्त्रीय संदर्भ सहित पढ़ें।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ सहित भक्ति साहित्य।

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Krishna Stotram परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में Krishna Stotram का स्थान अत्यंत पावन है। कलियुग में नाम संकीर्तन और प्रभु वंदना को समस्त क्लेशों से मुक्ति तथा आत्मिक शांति का सबसे सुलभ साधन बताया गया है।

भक्तिलोक के संपादकीय मंडल द्वारा इस संग्रह के प्रत्येक भजन, पद, स्तुति एवं कथा को शुद्धता, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि श्रद्धालुजन सुगमता से भक्ति रस का अनुभव कर सकें।

Krishna Stotram संग्रह (1810)

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करुणा करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवन (karuda karo kast haro gyan do bhagwan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

करुणा करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवन - परिचय एवं भक्ति रस सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में संकीर्तन, भजन और प्रार्थना का स्थान अत्यंत…

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Mere Mun Ke Chote Mandir Mein || Shyam Agarwal || बाबा को सदैव मन में रखने वालों के लिए भजन || SCI - BhaktiLok

"मेरे मन के छोटे मंदिर में" भजन भगवान श्री बांके बिहारी, सांवरे सरकार और जगत के पालनहार श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्…

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जग में आये गोगा पीर | Jag Mein Aaye Goga Peer | Gogaji Janmotsav Bhajan | Rajkumar Vinayak (Full HD) - BhaktiLok

गोगा पीर, जिन्हें 'जाहरवीर' के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान और उत्तर भारत के लोक-देवताओं में अत्यंत पूजनीय हैं। "जग में आये गो…

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Ganesh Aarti | जय गणेश देवा - माता जाकी पार्वती पिता महादेवा | Jai Ganesh Deva | Tripti Shakya - BhaktiLok

सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय देव माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान या यज्ञ के प्रारंभ में विघ्नहर्ता…

Krishna Stotram से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

भगवान कृष्ण के सबसे लोकप्रिय भजनों में "अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं", "यशोमती मैया से बोले नंदलाला", "राधे राधे जपा करो", "मीठे रस से भरोरी राधा रानी लागे", और "हरे कृष्ण महामंत्र" प्रमुख हैं।

कृष्ण भजन और ध्यान के लिए सुबह का ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) एवं संध्या काल सबसे उत्तम माना जाता है, परंतु निष्काम भक्ति और नाम संकीर्तन किसी भी समय किया जा सकता है।

अष्टछाप महाप्रभु वल्लभाचार्य और गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित आठ प्रमुख कृष्णभक्त कवियों का समूह था, जिसमें सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास आदि शामिल थे। इन्होंने ब्रजभाषा में मधुर कृष्ण पदों की रचना की।

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे” महामंत्र कलियुग में मानसिक शांति और प्रभु प्राप्ति का सबसे सरल व प्रभावशाली साधन माना गया है।