भक्ति रस काव्य व भजन

ऐसो को उदार जग माहीं - तुलसीदास जी का प्रसिद्ध भजन और अर्थ

7 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन का परिचय, भाव एवं भक्ति संदर्भ

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'ऐसो को उदार जग माहीं' पद उनकी अनन्य राम-भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भजन विनय पत्रिका से लिया गया है, जिसमें भक्त शिरोमणि तुलसीदास जी प्रभु श्री राम की करुणा और उदारता का गुणगान करते हैं। इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागत वत्सलता' है। तुलसीदास जी कहते हैं कि इस संसार में प्रभु श्री राम के समान उदार और दयालु कोई दूसरा नहीं है। वे बिना किसी सेवा या कठिन तपस्या के केवल दीन-दुखियों पर द्रवित हो जाते हैं।

इस भजन में तुलसीदास जी ने प्रभु की कृपा के उन उदाहरणों को प्रस्तुत किया है, जो शास्त्रों में वर्णित हैं। वे बताते हैं कि जिस मोक्ष की प्राप्ति के लिए बड़े-बड़े ऋषि-मुनि युगों तक तपस्या करते हैं, उसे प्रभु ने गीध (जटायु) और गज (गजेंद्र) जैसे पशु-पक्षियों को सहज ही प्रदान कर दिया। यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु श्री राम का नाम और उनका आश्रय ही समस्त दुखों का निवारण है।

ऐसो को उदार जग माहीं।
बिनु सेवा जो द्रवै दीन पर, राम सरिस को नाहीं॥

पदवार सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक संदेश

प्रथम पद: तुलसीदास जी कहते हैं कि इस पूरे संसार में प्रभु श्री राम के समान उदार कौन है? वे बिना किसी सेवा या स्वार्थ के केवल दीन-दुखियों की पुकार सुनकर उन पर दया करने वाले हैं। उनके समान दयालु कोई दूसरा नहीं है।

द्वितीय पद: जिस परम गति (मोक्ष) को प्राप्त करने के लिए देवता और मुनि कठिन तप करते हैं, और जिसे बहुत कम लोग ही पा पाते हैं, उस परम पद को प्रभु ने जटायु और गजेंद्र जैसे जीवों को सहज ही दे दिया। प्रभु के लिए किसी को तारना कोई बड़ी बात नहीं है।

तृतीय पद: रावण ने अपने दस सिरों को अर्पण करके शिव जी से जो संपत्ति (लंका का राज्य) प्राप्त की थी, उसी संपत्ति को प्रभु श्री राम ने विभीषण को एक पल में ही दे दिया। यह प्रभु की असीम उदारता का प्रमाण है।

चतुर्थ पद: तुलसीदास जी अंत में उपदेश देते हैं कि हे मन! यदि तू सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करना चाहता है, तो प्रभु श्री राम का भजन कर। वे सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं और समस्त दुखों का नाश करने वाले हैं।

गायन समय, लाभ एवं श्रवण महात्म्य

इस भजन का गायन किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है।

  • मानसिक शांति: इस भजन को सुनने से मन के विकार दूर होते हैं और चित्त में शांति का अनुभव होता है।
  • भक्ति भाव: यह भजन भक्त के हृदय में प्रभु के प्रति शरणागति का भाव जागृत करता है।
  • संकट निवारण: प्रभु की उदारता का स्मरण करने से जीवन के कठिन समय में धैर्य मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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