📜 सम्पूर्ण श्लोक · बाल काण्ड · सर्ग 1

संक्षेप रामायण

वाल्मीकि रामायण के इस सर्ग के सभी 100 पावन श्लोक, मूल संस्कृत पाठ, अन्वय और सरल हिंदी अनुवाद सहित।

100 सम्पूर्ण श्लोक
1 सर्ग संख्या
29 मिनट पठन अवधि
मार्च २०२६ अंतिम समीक्षा
प्रथम सर्ग
सर्ग 1 · 100 श्लोक
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सम्पूर्ण पावन श्लोक सूची

श्लोक संख्या पर सीधे जाएँ:
श्लोक संख्या 61

इदं रामायणं कृत्स्नं रामस्य चरितं महत् । पठतः पापं नश्यति शृण्वतः सुखमश्नुते ॥

हिंदी भावार्थ:

“यह सम्पूर्ण रामायण राम का महान् चरित्र है। इसे पढ़ने वाले के पाप नष्ट हो जाते हैं और सुनने वाले को सुख की प्राप्ति होती है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के पाठ और श्रवण के फल का वर्णन – पापनाश और सुखप्राप्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के महात्म्य का वर्णन करता है, जो संक्षेप रामायण के अन्तिम भाग में आता है।
श्लोक संख्या 62

आदित्यवर्णं तेजोराशिं रामं ध्यात्वा फलं लभेत् । सर्वपापविशुद्धात्मा रामलोकं स गच्छति ॥

हिंदी भावार्थ:

“आदित्य के समान वर्ण वाले, तेजोराशि राम का ध्यान करके फल प्राप्त करे। वह सब पापों से शुद्ध आत्मा होकर रामलोक को जाता है।”

विशेष व्याख्या:

राम का ध्यान और उसका फल – रामलोक की प्राप्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक राम के ध्यान की महिमा का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 63

य इदं कीर्तयेद् रामायणं सततमादरात् । स सर्वान् कामानाप्नोति प्रेत्य स्वर्गे महीयते ॥

हिंदी भावार्थ:

“जो यह रामायण सदा आदर के साथ कीर्तन करता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के कीर्तन से सभी इच्छाओं की पूर्ति और स्वर्ग की प्राप्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के नियमित पाठ के फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 64

विघ्नानि नश्यन्ति समस्तदोषाः प्रसीदति ब्रह्मकुलं समग्रम् । यस्यां कथायां रघुनन्दनस्य तस्माच्छृणुध्वं रघुनाथचरितम् ॥

हिंदी भावार्थ:

“जिस कथा (रामायण) में रघुनन्दन (राम) का वर्णन है, उसके श्रवण से सभी विघ्न नष्ट होते हैं, सभी दोष मिटते हैं और सम्पूर्ण ब्रह्मकुल (ब्राह्मण समाज) प्रसन्न होता है। इसलिए तुम लोग रघुनाथ के चरित्र को सुनो।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के श्रवण से विघ्न-दोष नष्ट होते हैं और ब्राह्मण प्रसन्न होते हैं।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण श्रवण के फल को बताता है।
श्लोक संख्या 65

आयुः कीर्तिं यशश्चैव धनं धान्यं सुतान् पशून् । प्रयच्छति नरेन्द्रस्य रामायणकथा शुभा ॥

हिंदी भावार्थ:

“रामायण की शुभ कथा राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु प्रदान करती है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण की कथा राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु देती है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के पाठ के भौतिक लाभों का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 66

इतिहासमिमं पुण्यं रामायणमनुत्तमम् । यः पठेत् शृणुयाद् वापि स मुच्येत सर्वकिल्बिषैः ॥

हिंदी भावार्थ:

“इस पुण्यमय, अनुपम रामायण इतिहास को जो पढ़े या सुने, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के पाठ या श्रवण से सभी पापों से मुक्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के पाठ-श्रवण के फल को दोहराता है।
श्लोक संख्या 67

वेदेषु रामायणमेव पुण्यं गङ्गासु गङ्गैव सरित्सु मुख्या । देवेषु रामः प्रवरो मनुष्ये तस्माद् रामायणमादरेण शृणुयात् ॥

हिंदी भावार्थ:

“वेदों में रामायण ही सबसे पुण्यमय है, नदियों में गंगा ही मुख्य है, देवताओं में राम श्रेष्ठ हैं, इसलिए मनुष्य को आदरपूर्वक रामायण सुनना चाहिए।”

विशेष व्याख्या:

रामायण की उपमा वेद, गंगा और राम से दी गई है, और आदरपूर्वक सुनने की प्रेरणा दी गई है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण की तुलना वेद, गंगा और राम से करता है।
श्लोक संख्या 68

सर्वतीर्थफलं यस्मात् प्राप्नोति शृण्वतां नरः । रामायणकथां पुण्यां तस्माच्छृणुयात् प्रयत्नतः ॥

हिंदी भावार्थ:

“जिससे सुनने वाला मनुष्य सभी तीर्थों का फल प्राप्त कर लेता है, उस पुण्यमय रामायण कथा को इसलिए प्रयत्नपूर्वक सुनना चाहिए।”

विशेष व्याख्या:

रामायण सुनने से सभी तीर्थों का फल मिलता है, इसलिए प्रयत्नपूर्वक सुनना चाहिए।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण श्रवण को तीर्थयात्रा के समान फलदायी बताता है।
श्लोक संख्या 69

सारं सर्वपुराणानां सारं वेदस्य कीर्तितम् । सारं रामायणं पुण्यं सारं ज्ञानस्य चोच्यते ॥

हिंदी भावार्थ:

“सभी पुराणों का सार, वेदों का सार, पुण्यमय रामायण, और ज्ञान का सार – यह कहा जाता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण को सभी पुराणों, वेदों और ज्ञान का सार बताया गया है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण को सभी शास्त्रों का सार घोषित करता है।
श्लोक संख्या 70

रामायणकथां पुण्यां यः पठेत् प्रयतः शुचिः । सर्वान् कामानवाप्नोति प्रेत्य स्वर्गे महीयते ॥

हिंदी भावार्थ:

“जो शुद्ध और संयमी होकर इस पुण्यमय रामायण कथा को पढ़ता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण पाठ से सभी कामनाओं की पूर्ति और स्वर्ग की प्राप्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण पाठ के फल को सारांशित करता है।
श्लोक संख्या 71

य इदं परमं पुण्यं रामायणमनुत्तमम् । श्रद्धया परया युक्तः शृणुयात् स विमुच्यते ॥

हिंदी भावार्थ:

“जो इस परम पुण्यमय, अनुपम रामायण को परम श्रद्धा से युक्त होकर सुनता है, वह (सब बंधनों से) मुक्त हो जाता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण को परम श्रद्धा से सुनने वाला सब पापों और बंधनों से मुक्त हो जाता है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण श्रवण के मोक्षदायी फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 72

सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वतीर्थफलं लभेत् । रामायणकथां पुण्यां यः पठेत् प्रयतः शुचिः ॥

हिंदी भावार्थ:

“जो शुद्ध और संयमी होकर इस पुण्यमय रामायण कथा को पढ़ता है, वह सब पापों से मुक्त होकर सभी तीर्थों का फल प्राप्त करता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण पाठ से पापमुक्ति और तीर्थफल की प्राप्ति।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण पाठ के फल को पुनः दोहराता है।
श्लोक संख्या 73

रामायणस्य वक्तारं श्रोतारं च महामतिम् । पूजयेत् प्रयतो नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥

हिंदी भावार्थ:

“रामायण के वक्ता और महामति (महान बुद्धि वाले) श्रोता की, संयमी व्यक्ति को धन-धान्य से युक्त होकर नित्य पूजा करनी चाहिए।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के वक्ता और श्रोता का सम्मान करना चाहिए।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के वक्ता और श्रोता के प्रति आदर का भाव व्यक्त करता है।
श्लोक संख्या 74

रामायणमिदं दिव्यं सर्वकामफलप्रदम् । ददाति विप्रमुख्येभ्यो यः स याति परां गतिम् ॥

हिंदी भावार्थ:

“यह दिव्य, सभी कामनाओं का फल देने वाला रामायण जो ब्राह्मणों में श्रेष्ठ को दान में देता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण का दान करने वाला परमगति (मोक्ष) को प्राप्त होता है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के दान के फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 75

एकैकं रामचरितं यः पठेत् श्रद्धयान्वितः । तस्य पुण्यफलं वक्तुं न शक्यं वर्षकोटिभिः ॥

हिंदी भावार्थ:

“जो श्रद्धा से युक्त होकर रामचरित के एक-एक (श्लोक) को पढ़ता है, उसके पुण्यफल को करोड़ों वर्षों में भी नहीं कहा जा सकता।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के एक-एक श्लोक के पाठ का फल अपरिमित है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के प्रत्येक श्लोक की महिमा का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 76

रामनामाङ्कितं लोके रामायणमिति स्मृतम् । यस्य श्रवणमात्रेण रामभक्तिः प्रजायते ॥

हिंदी भावार्थ:

“राम के नाम से अंकित यह रामायण लोक में प्रसिद्ध है, जिसके मात्र श्रवण से रामभक्ति उत्पन्न होती है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के श्रवण मात्र से रामभक्ति जाग्रत होती है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के श्रवण के भक्ति-फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 77

रामायणकथामेतां ये गायन्ति द्विजोत्तमाः । ते धन्या रामभक्ताश्च रामलोकं व्रजन्ति ते ॥

हिंदी भावार्थ:

“इस रामायण कथा को जो द्विजोत्तम (श्रेष्ठ ब्राह्मण) गाते हैं, वे धन्य हैं और रामभक्त हैं, और वे रामलोक को जाते हैं।”

विशेष व्याख्या:

रामायण गाने वाले धन्य हैं और रामलोक प्राप्त करते हैं।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के गायन (संगीतमय पाठ) के फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 78

यत्र रामकथा नित्यं गीयते पुण्यदा शुभा । तद् ग्रामं तीर्थरूपं हि पापतापप्रणाशनम् ॥

हिंदी भावार्थ:

“जहाँ नित्य यह पुण्यदायिनी, शुभ रामकथा गाई जाती है, वह ग्राम तीर्थरूप हो जाता है और पाप तथा ताप (संताप) का नाश करने वाला होता है।”

विशेष व्याख्या:

जहाँ रामकथा गाई जाती है, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामकथा के माहात्म्य से स्थान की पवित्रता का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 79

रामायणरसास्वादी रामभक्तिपरायणः । स मुच्यते भवाब्धेस्तु रामप्रसादतः सदा ॥

हिंदी भावार्थ:

“रामायण के रस का आस्वादन करने वाला और रामभक्ति में तत्पर व्यक्ति राम की कृपा से सदा के लिए भवसागर से मुक्त हो जाता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण रस का आनन्द लेने वाला रामभक्त भवसागर से पार हो जाता है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के रस का आनन्द लेने के फल का वर्णन करता है।
श्लोक संख्या 80

एवं रामायणं पुण्यं यः पठेत् शृणुयादपि । स सर्वकामानाप्नोति रामलोके महीयते ॥

हिंदी भावार्थ:

“इस प्रकार इस पुण्यमय रामायण को जो पढ़े या सुने, वह सब कामनाओं को प्राप्त करता है और रामलोक में पूजित होता है।”

विशेष व्याख्या:

रामायण के पाठ या श्रवण से सभी कामनाएँ पूर्ण होती हैं और रामलोक की प्राप्ति होती है।

टिप्पणी: यह श्लोक रामायण के फलश्रुति का समापन करता है।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
शोधकर्ता व व्याख्याता

आचार्य रामानन्द त्रिपाठी

संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।

महंत रामशरण दास
संपादकीय समीक्षा

महंत रामशरण दास

अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।

मंगल भवन अमंगल हारी । द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।।