सर्ग का संक्षिप्त परिचय एवं प्रसंग
प्रसंग सार संक्षेप
रावण और उसके भाइयों के विवाहों का वर्णन, जिसमें रावण मंदोदरी को, विभीषण सरमा को और कुम्भकर्ण वज्रज्वाला को पत्नी रूप में प्राप्त करते हैं।
सर्ग की विस्तृत पृष्ठभूमि
आध्यात्मिक व्याख्या एवं कथा
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग १२
(राक्षसों के विवाह)
🔆 प्रस्तावना : लंका पर अधिकार करने के बाद रावण ने अपने राज्य को सुदृढ़ करने के लिए वैवाहिक संबंध स्थापित किए। इस सर्ग में उसके और उसके भाइयों के विवाह का सुन्दर वर्णन है।
तस्य पुत्री मंदोदरी रूपेणाप्रतिमा भुवि ॥
स्वयंवरे समायाता रावणेन वृता तदा ।
मयश्च प्रददौ हृष्टो रावणाय महात्मने ॥
गन्धर्वराजस्य सुतां लब्धवान्विधिवत्प्रियाम् ॥
सरमा च महाभागा पतिव्रता पतिप्रिया ।
विभीषणमनुप्राप्ता धर्मेण सुसमाहिता ॥
विद्याधराधिपस्यासीद्दुहिता रूपसंयुता ॥
विवाहं कारयामास रावणो भ्रातृवत्सलः ।
हर्षेण महता युक्तो ददौ दानानि भूरिशः ॥
इस सर्ग में राक्षसों के वैवाहिक जीवन की झलक मिलती है। मंदोदरी, सरमा और वज्रज्वाला जैसी स्त्रियाँ केवल रूपवती ही नहीं, बल्कि गुणवती और धर्मपरायण भी थीं। यह दर्शाता है कि राक्षस कुल में भी सद्गुणों का सम्मान था। साथ ही, यह विवाह रावण के साम्राज्य विस्तार की नीति का भाग थे।
सर्ग के पावन श्लोक (मूल पाठ व अर्थ)
नीचे महर्षि वाल्मीकि रचित इस सर्ग के सभी श्लोक, उनके मूल देवनागरी छंद, सरल हिंदी अनुवाद एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं।
इस सर्ग के श्लोक वर्तमान में अद्यतन किए जा रहे हैं। कृपया कुछ समय पश्चात देखें।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।