प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
जय शिवशंकर, जय गंगाधर.. पार्वती पति, हर हर शम्भो (Shivashtakam: Jai ShivShankar Jai Gangadhar, Parvati Pati Har Har Shambhu Lyrics in Hindi) - Bhaktilok
जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी सुख-सार हरे
जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर, जय जय प्रेमागार हरे
जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे
निर्गुण जय जय सगुण अनामय, निराकार, साकार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ १ ॥
जय रामेश्वर, जय नागेश्वर, वैद्यनाथ, केदार हरे
मल्लिकार्जुन, सोमनाथ जय, महाकाल ओंकार हरे
त्रयम्बकेश्वर, जय घुश्मेस्वर, भीमेश्वर, जगतार हरे
काशीपति, श्री विश्वनाथ जय, मंगलमय अघ-हार हरे
नीलकण्ठ जय, भूतनाथ, मृत्युंजय, अविकार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ २ ॥
जय महेश, जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो
किस मुख से हे गुणातीत प्रभु, तव महिमा अपार वर्णन हो
जय भवकारक, तारक, हारक, पातक-दारक, शिव शम्भो
दीन दुःखहर, सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाकर शिव शम्भो
पार लगा दो भवसागर से, बनकर करुणाधार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ३ ॥
जय मनभावन, जय अतिपावन, शोक-नशावन शिव शम्भो
सहज वचन हर, जलज-नयन-वर, धवल-वरन-तन शिव शम्भो
विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन, शिव शम्भो
सहज वचन हर, जलज-नयन-वर, धवल-वरन-तन शिव शम्भो
मदन-कदन-कर पाप हरन हर-चरन मनन धन शिव शम्भो
विवसन, विश्वरूप प्रलयंकर, जग के मूलाधार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ४ ॥
भोलानाथ कृपालु दयामय, औघड़दानी शिव योगी
निमित्र मात्र में देते हैं, नवनिधि मनमानी शिव योगी
सरल ह्रदय अतिकरुणा सागर, अकथ कहानी शिव योगी
भक्तों पर सर्वस्व लुटा कर बने मसानी शिव योगी
स्वयं अकिंचन, जनमन रंजन, पर शिव परम उदार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ५॥
आशुतोष इस मोहमयी निद्रा से मुझे जगा देना
विषय-वेदना से विषयों को माया-धीश छुड़ा देना
रूप-सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना
दिव्य-ज्ञान-भण्डार-युगल-चरणों में लगन लगा देना
एक बार इस मन मन्दिर में कीजे पद संचार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ६ ॥
दानी हो, दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभो
शक्तिमान हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभो
पूर्ण ब्रह्म हो, दो तुम अपने रूप का सच्चा ज्ञान प्रभो
स्वामी हो, निज सेवक की सुन लेना करुण पुकार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ७ ॥
तुम बिन, व्याकुल हूँ प्राणेश्वर आ जाओ भगवंत हरे
चरण-शरण की बांह गहो, हे उमा-रमण प्रियकंत हरे
विरह व्यथित हूँ, दीन दुःखी हूँ, दीन दयालु अनन्त हरे
आओ तुम मेरे हो जाओ, आ जाओ श्रीमन्त हरे
मेरी इस दयनीय दशा पर, कुछ तो करो विचार हरे
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ८ ॥
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "शिवाष्ट्कम्: जय शिवशंकर, जय गंगाधर.. पार्वती पति, हर हर शम्भो (Shivashtakam: Jai ShivShankar Jai Gangadhar, Parvati Pati Har Har Shambhu Lyrics in Hindi)" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

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