Ganesh Chaturthi

तेरी जय हो गणेश(Teri Jai Ho Ganesh) - Ganesh Chaturthi Special Best Song By Gagandeep Singh Ganesh Vandana - Bhaktilok

116 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तेरी जय हो गणेश | Teri Jai Ho Ganesh – गणेश चतुर्थी विशेष भजन

भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देव कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश अथवा नए व्यापार के आरंभ में सर्वप्रथम गणपति बप्पा का ही स्मरण किया जाता है। "तेरी जय हो गणेश" (Teri Jai Ho Ganesh) एक अत्यंत हृदयस्पर्शी गणेश वंदना (Ganesh Vandana) है, जिसे गायक गगनदीप सिंह (Gagandeep Singh) की भक्तिमय आवाज़ में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन विघ्नहर्ता गणेश जी की महिमा, उनके गजानन स्वरूप, विशाल उदर, ऋद्धि-सिद्धि तथा शुभ-लाभ के गुणगान से ओतप्रोत है। गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के पावन अवसर पर यह भजन विशेष रूप से गाया और सुना जाता है। इस भजन की भक्ति भावना में जहाँ एक ओर भगवान की स्तुति है, वहीं दूसरी ओर जीवन में सुख, समृद्धि, बुद्धि और निर्विघ्नता की कामना भी निहित है। भक्त जब पूर्ण श्रद्धा से इस भजन को गाते हैं, तो गणपति बप्पा की कृपा से उनके जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश।
विघ्नहर्ता, गजानन, तेरी जय हो गणेश।।

गजमुख की शोभा न्यारी, चंदन की छवि प्यारी।
मूषक की सवारी, तेरी जय हो गणेश।।

विशाल उदर पर राजे, मोदक प्रिय भोग सजाए।
ऋद्धि-सिद्धि संग विराजे, तेरी जय हो गणेश।।

एकदंत दयालु देवा, सुन लो मेरी यह सेवा।
कर दो सब विघ्नों का नाश, तेरी जय हो गणेश।।

शुभ-लाभ के दाता तुम हो, बुद्धि-विद्या के स्वामी।
भक्तों के रखवाले हो, तेरी जय हो गणेश।।

जो भी तेरा ध्यान धरे, वह सुख-संपत्ति पाए।
दुःख दरिद्र सब दूर हो, तेरी जय हो गणेश।।

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया।
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रारंभ ही भगवान गणेश की जयघोष से होता है — "तेरी जय हो गणेश"। यह वाक्य भक्त की गहन श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। जब भक्त बार-बार "तेरी जय हो गणेश" कहता है, तो वह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने हृदय से भगवान की महिमा का बखान कर रहा होता है। "विघ्नहर्ता" का अर्थ है — विघ्नों को हरने वाले। जीवन में जब भी कोई बाधा आती है, कोई संकट उपस्थित होता है, तब गणपति बप्पा का स्मरण करने से वह विघ्न स्वयं ही दूर हो जाता है। "गजानन" अर्थात् हाथी के समान मुख वाले भगवान — जो अपनी सूंड से जीवन के कष्टों को दूर करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

दूसरे पद में भगवान के गजमुख की शोभा और चंदन की छवि का वर्णन है। चंदन शीतलता, पवित्रता और शांति का प्रतीक है। भगवान गणेश के मुख पर चंदन का लेप उनकी दिव्यता और सौम्यता को दर्शाता है। "मूषक की सवारी" — मूषक यानी चूहा, जो भगवान गणेश का वाहन है। यह प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देता है कि भगवान गणेश अत्यंत सूक्ष्म से सूक्ष्म विघ्नों को भी पकड़कर नष्ट कर देते हैं। चूहा उस सूक्ष्म बुद्धि का प्रतीक है जो हर छोटी-बड़ी बाधा को खोज लेती है और उसे दूर करती है।

तीसरे पद में भगवान के विशाल उदर और मोदक प्रिय भोग का वर्णन है। विशाल उदर यह दर्शाता है कि भगवान गणेश सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपने भीतर समाहित किए हुए हैं। वे भूख-प्यास, सुख-दुःख, लाभ-हानि — सब कुछ अपने भीतर धारण करते हैं। मोदक उनका प्रिय भोग है, जो मिठास और आनंद का प्रतीक है। ऋद्धि और सिद्धि उनकी दो पत्नियाँ हैं, जो समृद्धि और सफलता की देवियाँ हैं। जो भक्त गणेश जी की पूर्ण श्रद्धा से पूजा करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि दोनों की प्राप्ति होती है।

चौथे पद में "एकदंत दयालु देवा" कहकर भगवान की दयालुता का बखान किया गया है। एकदंत अर्थात् जिनके एक ही दाँत है। यह उनके अद्वितीय स्वरूप का प्रतीक है। भक्त प्रार्थना करता है कि हे दयालु देवा, मेरी सेवा स्वीकार करो और मेरे सभी विघ्नों का नाश कर दो। पाँचवें पद में भगवान गणेश को शुभ-लाभ का दाता, बुद्धि-विद्या का स्वामी और भक्तों का रखवाला बताया गया है। अंतिम पद में भक्त कहता है कि जो भी भगवान गणेश का ध्यान करता है, उसे सुख-संपत्ति प्राप्त होती है और उसके दुःख-दरिद्र सब दूर हो जाते हैं। "गणपति बप्पा मोरया" का उद्घोष भक्ति की पराकाष्ठा है, जो महाराष्ट्र की परंपरा से जुड़ा हुआ है और आज सम्पूर्ण भारत में गूंजता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन अपनी सरल भाषा, मधुर संगीत और गहन भक्ति भाव के कारण अत्यंत लोकप्रिय है। गगनदीप सिंह की भावपूर्ण प्रस्तुति इसे और भी विशेष बनाती है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रथम पूज्य देव की स्तुति: यह भजन भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करता है, जो सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं।
  • विघ्न विनाशक भावना: भजन का मूल उद्देश्य जीवन के विघ्नों को दूर करना और शुभता का आगमन है।
  • बुद्धि एवं विद्या की प्राप्ति: गणेश जी बुद्धि और विद्या के देवता हैं, अतः इस भजन के श्रवण से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है।
  • ऋद्धि-सिद्धि एवं शुभ-लाभ: भजन में समृद्धि और सफलता के प्रतीक ऋद्धि-सिद्धि तथा शुभ-लाभ का वर्णन है।
  • गणेश चतुर्थी विशेष: यह भजन गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर विशेष रूप से गाया जाता है।
  • भक्ति एवं समर्पण: भजन में भक्त का पूर्ण समर्पण और श्रद्धा झलकती है।

गणेश पुराण के अनुसार, भगवान गणेश की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति, समृद्धि तथा सुख का वास होता है। इस भजन को नियमित रूप से सुनने और गाने से मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान गणेश का भजन किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष समय और अवसर हैं जब इसका महत्व और भी बढ़ जाता है:

  • प्रातःकाल: सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश के सामने दीपक जलाकर यह भजन गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • संध्या काल: सायंकाल की आरती के समय इस भजन का गायन विशेष फलदायी होता है।
  • गणेश चतुर्थी: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • प्रत्येक बुधवार: बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर यह भजन गाना अत्यंत शुभ होता है।
  • नए कार्य का आरंभ: कोई भी नया कार्य, व्यापार, गृह प्रवेश अथवा विवाह से पूर्व इस भजन का गायन शुभ माना जाता है।
  • संकट के समय: जीवन में जब कोई बड़ी बाधा आए, तब पूर्ण श्रद्धा से यह भजन गाने से विघ्न दूर होते हैं।

भजन गाने की विधि अत्यंत सरल है। सर्वप्रथम भगवान गणेश की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष दीपक और धूप जलाएं। पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। मोदक अथवा लड्डू का भोग लगाएं। फिर हाथ जोड़कर पूर्ण श्रद्धा से यह भजन गाएं। भजन के बोलों का उच्चारण स्पष्ट और भक्ति भाव से युक्त होना चाहिए। भजन के पश्चात गणेश जी की आरती अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "तेरी जय हो गणेश" भजन किसने गाया है?

यह भजन प्रसिद्ध भक्ति गायक गगनदीप सिंह (Gagandeep Singh) द्वारा गाया गया है। यह गणेश चतुर्थी विशेष भजन के रूप में Bhaktilok पर प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 2: यह भजन कब गाना चाहिए?

यह भजन गणेश चतुर्थी, प्रत्येक बुधवार, प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती तथा किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गाया जा सकता है।

प्रश्न 3: क्या इस भजन को सुनने से विघ्न दूर होते हैं?

शास्त्रों और परंपरा के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। पूर्ण श्रद्धा से इस भजन का श्रवण और गायन करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 4: गणेश जी का प्रिय भोग क्या है?

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। इसके अतिरिक्त दूर्वा, केला, नारियल और गुड़-चना भी उन्हें अर्पित किया जाता है।

प्रश्न 5: क्या विद्यार्थियों के लिए यह भजन लाभदायक है?

हाँ, भगवान गणेश बुद्धि और विद्या के देवता हैं। विद्यार्थी यदि प्रतिदिन प्रातःकाल इस भजन का श्रवण करें और गणेश जी का ध्यान करें, तो उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6: "गणपति बप्पा मोरया" का क्या अर्थ है?

"गणपति बप्पा मोरया" का अर्थ है — हे गणपति, हे पिता, आपकी जय हो। यह महाराष्ट्र की परंपरा से जुड़ा उद्घोष है, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, गणेश पुराण तथा लोकप्रिय भजन परंपराओं के संदर्भ में तैयार किया गया है। भजन के बोल लोकप्रिय भक्ति गीत परंपरा से लिए गए हैं और उनका भावार्थ सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन का गायन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से करें।

संदर्भ: गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, लोक भजन परंपरा एवं भक्ति संगीत।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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