Chhath Puja Geet

उगी हे सूरजदेव (Ugi Hey Surajdev) - Kiran Singh Chhath Puja Geet Chhath Puja Song - BhaktiLok

47 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठ पूजा (Chhath Puja) सनातन धर्म की सबसे कठिन और सबसे पवित्र उपासना परंपराओं में से एक है, जिसमें सूर्यदेव (Surya Dev) और छठी मइया (Shashthi Devi) की आराधना की जाती है। इसी पावन पर्व की भक्ति परंपरा में गाया जाने वाला यह लोकप्रिय गीत "उगी हे सूरजदेव" (Ugi Hey Surajdev) भोजपुरी लोकगायन की अमूल्य धरोहर है, जिसे प्रसिद्ध लोकगायिका किरण सिंह (Kiran Singh) के स्वरों में प्रस्तुत किया गया है। यह गीत भक्ति, श्रद्धा और लोक-संस्कृति का ऐसा संगम है जो श्रोता के हृदय में सूर्योपासना के प्रति गहरी भावना जागृत करता है। "उगी हे सूरजदेव" का अर्थ है — "हे सूर्यदेव! आप उदय हुए हैं", अर्थात् भक्त उगते सूर्य के दर्शन करके उनका आह्वान और स्तवन कर रहा है। छठ पर्व में अर्घ्य (Arghya) देते समय जब भक्त नदी-तालाब के जल में खड़ा होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करता है, तब यही गीत उसकी आत्मा की गहराई से फूटता है। यह गीत केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि सूर्यदेव के प्रति पूर्ण शरणागति, कृतज्ञता और निष्ठा की अभिव्यक्ति है। भोजपुरी भाषा की मिठास, लोक-लय की सरलता और भक्ति की गहराई — ये तीनों तत्व इस गीत को छठ पर्व का अनिवार्य स्वर बना देते हैं। इस लेख में हम इस गीत के बोल, भावार्थ, महत्व, गायन विधि तथा इससे जुड़े आध्यात्मिक पहलुओं का विस्तृत विवेचन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

उगी हे सूरजदेव (Ugi Hey Surajdev)

उगी हे सूरजदेव, उगी हे सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

करिया कारी बदरिया, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

छठी मइया के दुआरी, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

केरा के पेड़, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

पानी के कलसिया, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

ठेकुआ के भोग, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

सूप में फल-फूल, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

बहिन-भाई के साथ, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

सुख-समृद्धि के दाता, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

किरण सिंह के स्वर, हो सूरजदेव,
अरघ के बेरिया, हो सूरजदेव,
उगी हे सूरजदेव।

गीत का भावार्थ एवं अर्थ | Song Meaning

यह छठ पूजा गीत (Chhath Puja Geet) भोजपुरी लोक परंपरा में सूर्योपासना की सजीव अभिव्यक्ति है। इसका केंद्रीय भाव यह है कि भक्त सूर्यदेव के उदय होने की प्रतीक्षा करता है, ताकि वह उन्हें अर्घ्य अर्पित कर सके। "उगी हे सूरजदेव" का अर्थ है — "हे सूर्यदेव! आप उदय हो चुके हैं।" यह वाक्य भक्त के हृदय की तीव्र उत्सुकता और श्रद्धा को प्रकट करता है। छठ पर्व में सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है, और यह गीत उसी परंपरा का जीवंत स्वरूप है।

गीत में "अरघ के बेरिया" अर्थात् "अर्घ्य देने का समय" बार-बार दोहराया गया है। यह पंक्ति भक्त की व्याकुलता को दर्शाती है — वह बार-बार सूर्यदेव को स्मरण करता है कि अर्घ्य का पावन समय आ गया है। "करिया कारी बदरिया" अर्थात् "काले-काले बादल" — यह पंक्ति उस भय और चिंता को व्यक्त करती है कि कहीं बादल सूर्यदेव के दर्शन में बाधा न बनें। भक्त प्रार्थना करता है कि बादल छंट जाएं और सूर्यदेव के दर्शन हों, ताकि वह विधिवत अर्घ्य अर्पित कर सके। यह भाव भक्ति की गहनता और निष्ठा को प्रकट करता है।

"छठी मइया के दुआरी" पंक्ति में भक्त छठी मइया (Shashthi Devi) के दरबार की स्तुति करता है। छठ पर्व में सूर्यदेव के साथ-साथ छठी मइया की भी उपासना की जाती है, जो संतान, सुख और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। "केरा के पेड़" अर्थात् "केले के पेड़" — छठ पूजा में केले के पेड़ और गन्ने का विशेष महत्व है, जो समृद्धि और शुभता के प्रतीक हैं। "पानी के कलसिया" अर्थात् "जल से भरा कलश" — यह पूजा की पवित्रता और जल के महत्व को दर्शाता है। "ठेकुआ के भोग" — ठेकुआ छठ पूजा का प्रमुख प्रसाद है, जो गुड़, आटा और घी से बनाया जाता है। "सूप में फल-फूल" — सूप में फल, फूल, गन्ना, केला आदि रखकर अर्घ्य दिया जाता है।

"बहिन-भाई के साथ" पंक्ति पारिवारिक एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक है। छठ पर्व में पूरा परिवार एक साथ मिलकर पूजा करता है। "सुख-समृद्धि के दाता" — भक्त सूर्यदेव को सुख, समृद्धि और आरोग्य का दाता मानकर उनकी स्तुति करता है। अंत में "किरण सिंह के स्वर" पंक्ति इस गीत के गायन को समर्पित है, जो इस लोकगीत को नई पहचान और लोकप्रियता प्रदान करती है। कुल मिलाकर, यह गीत भक्ति, श्रद्धा, कृतज्ञता और सामूहिकता का सुंदर संगम है, जो छठ पर्व की आत्मा को जीवंत करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नाम उगी हे सूरजदेव (Ugi Hey Surajdev)
गायिका किरण सिंह (Kiran Singh)
गीतकार पारंपरिक लोकगीत (Traditional Folk)
संगीत पारंपरिक लोक-संगीत
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
विषय छठ पूजा, सूर्योपासना, छठी मइया
शैली लोकगीत / भक्ति गीत
अवसर छठ पर्व, कार्तिक शुक्ल षष्ठी

गीत की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह छठ पूजा गीत (Chhath Puja Geet) अपनी सरल भाषा, मधुर लय और गहन भक्ति भाव के कारण बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सूर्योपासना का जीवंत स्वरूप: यह गीत सूर्यदेव की उपासना का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है, जिसमें भक्त उनके उदय की प्रतीक्षा करता है और अर्घ्य अर्पित करता है।
  • लोक-संस्कृति की धरोहर: यह गीत भोजपुरी लोक परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही है।
  • भक्ति और श्रद्धा का संगम: गीत में भक्त की पूर्ण शरणागति, कृतज्ञता और निष्ठा व्यक्त होती है।
  • पारिवारिक सामूहिकता: यह गीत पूरे परिवार और समाज को एक साथ जोड़ता है, जिससे सामूहिक भक्ति का भाव जागृत होता है।
  • किरण सिंह की मधुर प्रस्तुति: किरण सिंह के स्वरों में इस गीत को नई ऊंचाई और लोकप्रियता मिली है।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह गीत साधक को यह सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और कृतज्ञता ही सच्ची भक्ति है। सूर्यदेव जीवन के आधार हैं — वे प्रकाश, ऊर्जा और आरोग्य के दाता हैं। उनकी उपासना से मनुष्य में आत्मविश्वास, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। छठ पर्व में सूर्यदेव की उपासना करने से संतान सुख, आरोग्य, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। यह गीत उसी भक्ति भावना को जन-जन तक पहुंचाता है।

गीत गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पर्व (Chhath Puja) के अवसर पर गाया जाता है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। छठ पर्व चार दिनों तक चलता है — नहाय-खाय, खरना, सांझ का अर्घ्य और उषा का अर्घ्य। इस गीत को विशेष रूप से सांझ के अर्घ्य (Sandhya Arghya) और उषा के अर्घ्य (Usha Arghya) के समय गाया जाता है।

गायन विधि:

  • छठ व्रती महिलाएं नदी, तालाब या पोखर के किनारे जल में खड़ी होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं।
  • अर्घ्य देते समय सूप में फल, फूल, गन्ना, केला, ठेकुआ आदि रखकर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है।
  • इसी समय यह गीत गाया जाता है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • गीत को समूह में गाया जाता है, जिसमें एक व्यक्ति मुखड़ा गाता है और अन्य लोग दोहराते हैं।
  • गीत के साथ ढोल, झाल, मंजीरा आदि पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है।

श्रवण का समय: इस गीत को छठ पर्व के अलावा किसी भी शुभ अवसर पर, विशेषकर सूर्यदेव की उपासना के समय, सुबह के समय सूर्योदय के दर्शन करते समय, या मन की शांति के लिए सुना जा सकता है। यह गीत मन को शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "उगी हे सूरजदेव" गीत का क्या अर्थ है?

उत्तर: "उगी हे सूरजदेव" का अर्थ है — "हे सूर्यदेव! आप उदय हो चुके हैं।" यह गीत छठ पूजा के समय सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते समय गाया जाता है, जिसमें भक्त उनके उदय की प्रतीक्षा करता है और उन्हें अर्घ्य अर्पित करता है।

प्रश्न 2: यह गीत किसने गाया है?

उत्तर: यह गीत प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायिका किरण सिंह (Kiran Singh) के स्वरों में प्रस्तुत किया गया है। यह एक पारंपरिक छठ पूजा लोकगीत है, जिसे किरण सिंह ने अपनी मधुर आवाज में लोकप्रिय बनाया है।

प्रश्न 3: यह गीत कब और कहाँ गाया जाता है?

उत्तर: यह गीत विशेष रूप से छठ पर्व के अवसर पर गाया जाता है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह गीत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में नदी, तालाब या पोखर के किनारे गाया जाता है।

प्रश्न 4: छठ पूजा में सूर्यदेव की उपासना का क्या महत्व है?

उत्तर: छठ पूजा में सूर्यदेव की उपासना का अत्यंत महत्व है। सूर्यदेव जीवन के आधार हैं — वे प्रकाश, ऊर्जा और आरोग्य के दाता हैं। उनकी उपासना से संतान सुख, आरोग्य, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। छठ पर्व में सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है।

प्रश्न 5: क्या यह गीत केवल भोजपुरी भाषा में है?

उत्तर: हाँ, यह गीत मूल रूप से भोजपुरी भाषा में है, लेकिन इसका भाव और संदेश सार्वभौमिक है। यह गीत भोजपुरी लोक परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसे पूरे भारत और विदेशों में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोग गाते हैं।

प्रश्न 6: छठ पूजा में कौन-कौन से प्रसाद का भोग लगाया जाता है?

उत्तर: छठ पूजा में ठेकुआ, कसार, चावल के लड्डू, गन्ना, केला, नारियल, सुथनी, अदरक, हल्दी, फल-फूल आदि का भोग लगाया जाता है। इन सभी प्रसादों को सूप में रखकर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें छठ पूजा गीत "उगी हे सूरजदेव" के बोल, भावार्थ, महत्व और गायन विधि का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस सामग्री को तैयार करते समय भोजपुरी लोक परंपरा, छठ पूजा की धार्मिक मान्यताओं और सूर्योपासना की प्राचीन परंपरा का ध्यान रखा गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों को इस पावन गीत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है।

संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री: यह गीत पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत परंपरा का हिस्सा है, जिसे किरण सिंह के स्वरों में प्रस्तुत किया गया है। छठ पूजा की परंपरा, सूर्योपासना की विधि और इससे जुड़ी मान्यताओं की जानकारी पुराणों, लोक परंपराओं और शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित है।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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