Diwali Vrat Katha

दीवाली का त्यौहार है (Diwali Ka Tyohar Hai Lyrics in Hindi) - Mukesh Kumar Diwali Song - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

दीवाली का त्यौहार है (Diwali Ka Tyohar Hai Lyrics in Hindi) - Mukesh Kumar Diwali Song - Bhaktilok एक अत्यंत मनमोहक, पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गीत है, जिसे महान पार्श्व गायक मुकेश कुमार की सुरीली और भावपूर्ण आवाज़ ने अमर बना दिया है। दीवाली या दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर और अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा का शाश्वत संदेश है। जब चौदह वर्ष के वनवास के उपरांत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या पुरी वापस लौटे थे, तब संपूर्ण अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। मुकेश कुमार द्वारा गाए गए इस भजन व गीत में उसी पावन ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंग का जीवंत चित्रण किया गया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस गीत के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, पूजा की विधि, दीवाली के पर्व का महत्व और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि भक्तजन इस पावन पर्व को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मना सकें।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

दिवाली का त्यौहार है, झूम उठा संसार है,

खुश सभी परिवार हैं, अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

कोई आँगन लीप रहा है, कोई करे पुताई है,

ख़ुशी ख़ुशी सब नारियों ने रंगोली सजाई है,

सजे सभी के द्वार हैं, झूम उठा संसार है, खुश सभी परिवार हैं... अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

चौदह बरस के बाद हमारे राम अयोध्या आये हैं,

राज तिलक जब हुआ प्रभु का नर नारी हर्षाये हैं,

गूंजे जय जयकार हैं, झूम उठा संसार है, खुश सभी परिवार हैं... अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

घर की साफ़ सफाई करलो लक्ष्मी मैया आएँगी,

श्री गणेश भी साथ पधारे घर घर खुशियां छाएंगी,

धन से भरे भण्डार हैं, झूम उठा संसार है, खुश सभी परिवार हैं... अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

नगर नगर में गाँव गाँव में पटाखों का शोर है,

खुशियों के अनार फूटते देखो चारों ओर है,

सजे बाज़ार गुलज़ार हैं, झूम उठा संसार है, खुश सभी परिवार हैं... अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

दीपक से दीपक जलता अंधियारा मिट जाता है,

भेदभाव का परदा हटकर अपनापन आ जाता है,

महके दिल के तार हैं, झूम उठा संसार है, खुश सभी परिवार हैं... अवधपुरी में जाकर देखो दीपों की कतार है।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

मुकेश कुमार द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय दीवाली गीत की प्रत्येक पंक्ति सनातन संस्कृति, भाईचारे और भगवान श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम को दर्शाती है। गीत के मुखड़े में ही कवि और गायक ने दीवाली के दिन के आनंद का अद्भुत वर्णन किया है। जब चारों तरफ दीपों की कतारें जलती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानों संपूर्ण ब्रह्मांड आनंद से झूम उठा हो।

पहले अंतराल में घरों की साफ-सफाई, पुताई और महिलाओं द्वारा आंगन में बनाई जाने वाली सुंदर रंगोली का वर्णन है। यह इस बात का प्रतीक है कि माता लक्ष्मी का स्वागत केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि आंतरिक स्वच्छता और उल्लास के साथ किया जाता है। दूसरा अंतराल सबसे महत्वपूर्ण है, जो भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या आगमन और उनके राज्याभिषेक का स्मरण कराता है। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि सत्य और धर्म की विजय हमेशा होती है, चाहे कठिनाइयां कितनी ही लंबी क्यों न हों।

अगले चरणों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन की परंपरा का सुंदर उल्लेख है। धन और बुद्धि के देवता का संयुक्त पूजन जीवन में भौतिक समृद्धि के साथ-साथ विवेक प्रदान करता है। अंत में, दीप से दीप जलने की परंपरा के माध्यम से समाज से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया गया है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मूल भावना उल्लास, भक्ति, कृतज्ञता और सामाजिक समरसता है। दीवाली केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह आंतरिक जागरण का अवसर है। मुकेश कुमार की गंभीर और मधुर आवाज इस गीत में एक ऐसा भक्तिमय वातावरण पैदा करती है, जो सुनने वाले के मन को प्रफुल्लित कर देता है। गीत का संदेश स्पष्ट है—अहंकार और अज्ञान के अंधकार को मिटाकर अपने हृदय में भक्ति और प्रेम का दीपक जलाएं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम दीवाली का त्यौहार है (Diwali Ka Tyohar Hai)
गायक मुकेश कुमार (Mukesh Kumar)
संगीत शैली भक्ति गीत / त्यौहार गीत (Devotional / Festival Song)
भाषा हिंदी / अवधी मिश्रित बोल
मुख्य प्रसंग श्रीराम अयोध्या आगमन, दीवाली उत्सव, लक्ष्मी-गणेश पूजन
प्लेटफॉर्म भक्तिलोक (Bhaktilok)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भारतीय संगीत जगत में मुकेश कुमार को 'दुख के सम्राट' और अपनी मखमली आवाज के लिए जाना जाता है। हालांकि उन्होंने मुख्य रूप से कई सदाबहार रोमांटिक और दर्द भरे गीत गाए, परंतु उनके गाए हुए भक्ति गीत और भजन भी उतनी ही गहराई से श्रोताओं के दिलों को छूते हैं। इस गीत में उनकी गायकी का अंदाज बेहद सौम्य और पारंपरिक है, जो श्रोता को सीधे अयोध्या की गलियों और उस दिव्य उत्सव से जोड़ देता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
अवधपुरी अयोध्या नगरी भगवान श्रीराम की जन्मभूमि और राजधानी
पुताई घरों की रंगाई-पोताई दीपावली पर घर की शुद्धि और सजावट
हर्षाये प्रसन्न हुए / आनंदित हुए नर-नारियों की प्रसन्नता
भंडार खजाना / अन्न-धन का भंडार माता लक्ष्मी की कृपा से सुख-समृद्धि
अंधियारा अंधकार अज्ञान और बुराई का प्रतीक

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

दीपावली का पर्व सनातन धर्म में सबसे बड़ा और प्रकाशमान उत्सव माना जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और सामाजिक भी है। सर्दियों की शुरुआत से पहले घरों की सफाई करना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी होता है। आध्यात्मिक रूप से, यह पर्व आत्मा की शुद्धि और परमात्मा (भगवान श्रीराम) के साथ पुनर्मिलन का प्रतीक है। जब हम दीप जलाते हैं, तो वह बाहरी अंधकार को दूर करने के साथ-साथ हमारे भीतर छिपे लोभ, मोह, क्रोध और अहंकार के अंधकार को भी नष्ट करता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • धैर्य और संघर्ष का फल: जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष का कठिन वनवास सहन किया और अंततः अयोध्या के राजा बने, उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयों में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
  • सफाई और पवित्रता: बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ मन की पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक है।
  • सबका साथ, सबका विकास: दीवाली का पर्व परिवार और समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर खुशियां बांटने की प्रेरणा देता है।
  • प्रकाश का प्रसार: जिस प्रकार एक दीये से हजारों दीये जलाए जा सकते हैं, उसी प्रकार ज्ञान और प्रेम से जीवन को रोशन किया जा सकता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से दीपावली के पावन अवसर पर, धनतेरस से लेकर भाई दूज तक के पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान सुना और गाया जाता है। इसके अलावा, घरों में पूजा-पाठ की तैयारियों के समय, स्कूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तथा परिवार के मिलन समारोहों में इस गीत को बजाकर माहौल को पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बनाया जाता है। आप नियमित रूप से ऐसे अन्य पर्वों और व्रतों की जानकारी के लिए Bhaktilok पर विजिट कर सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

शीर्षक दीवाली का त्यौहार है (Diwali Ka Tyohar Hai Lyrics in Hindi)
गायक मुकेश कुमार
मुख्य विषय दीपावली उत्सव, श्रीराम अयोध्या वापसी, लक्ष्मी पूजन
भावना (Bhava) उल्लास, भक्ति, उत्सव, आनंद
उपयुक्त अवसर दीपावली, धनतेरस, लक्ष्मी पूजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम
वेबसाइट भक्तिलोक (Bhaktilok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: दीवाली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

उत्तर: दीपावली मुख्य रूप से भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के पश्चात माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है।

Q2: 'दीवाली का त्यौहार है' गीत किसने गाया है?

उत्तर: यह प्रसिद्ध गीत महान पार्श्व गायक मुकेश कुमार जी की सुरीली आवाज में गाया गया है।

Q3: दीपावली के दिन किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?

उत्तर: दीपावली की रात्रि को धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी तथा बुद्धि और शुभता के देवता भगवान श्री गणेश का पूजन किया जाता है।

Q4: दीवाली के अवसर पर घरों में क्या विशेष किया जाता है?

उत्तर: घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, सुंदर रंगोली बनाना, दीये जलाना और पकवान बनाना इस पर्व की मुख्य परंपराएं हैं।

Q5: क्या यह गीत बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त है?

उत्तर: हाँ, यह गीत बहुत ही सरल, मधुर और प्रेरणादायक है, इसलिए इसे स्कूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आसानी से गाया जा सकता है।

Q6: दीपावली कितने दिनों का त्यौहार है?

उत्तर: दीपावली का मुख्य उत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक कुल पांच दिनों तक मनाया जाता है।

Q7: इस गीत के बोल कहाँ मिल सकते हैं?

उत्तर: इस गीत के संपूर्ण और शुद्ध बोल आप भक्तिलोक (Bhaktilok.in) वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

Q8: दीवाली पर दीप जलाने का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

उत्तर: दीप जलाना ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान के अंधकार को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन संस्कृति, पारंपरिक लोकगीतों और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित दीपावली के प्रसंगों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक बोल, अर्थ और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीरामचरितमानस (तुलसीदास जी रचित) - उत्तर कांड (अयोध्या आगमन प्रसंग)
  • पारंपरिक भारतीय लोकगीत एवं संगीत संग्रह
  • सनातन पंचांग एवं सांस्कृतिक पर्व विवरण

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!