Hanuman Bhajan

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) - hanuman tipsbhaktiprem hanumanchalisa - Bhaktilok

50 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान चालीसा, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जो कलयुग में श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और सिद्ध मार्ग माना जाता है। 40 चौपाइयों में रचित यह चालीसा न केवल बल, बुद्धि और विद्या का प्रतीक है, बल्कि यह साधक के मन से भय, चिंता और नकारात्मकता को दूर कर आत्म-विश्वास और भक्ति का संचार करती है। हनुमान जी, जो स्वयं 'संकटमोचन' हैं, उनकी शरण में जाने मात्र से भक्त के सभी कष्ट मिट जाते हैं। यह चालीसा नित्य पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण चालीसा पाठ | Complete Chalisa Lyrics

॥ दोहा ॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥


॥ दोहा ॥
पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥

दोहा एवं चौपाई संरचना | Doha & Chaupai Structure

हनुमान चालीसा की रचना अवधी भाषा में हुई है। इसमें कुल 43 छंद हैं—दो दोहे प्रारंभ में, 40 चौपाइयां और अंत में एक दोहा। 'चालीसा' शब्द का अर्थ ही 'चालीस' है, जो इसकी 40 मुख्य पंक्तियों (चौपाइयों) को दर्शाता है।

प्रत्येक चौपाई का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning of Chaupais

हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई हनुमान जी के गुणों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन करती है। उदाहरण के लिए, "राम दूत अतुलित बल धामा" का अर्थ है कि आप प्रभु श्री राम के दूत हैं और असीम बल के धाम हैं। "संकट तें हनुमान छुड़ावै" यह स्पष्ट करता है कि जो भक्त मन, वचन और कर्म से हनुमान जी का ध्यान करता है, वह सभी संकटों से मुक्त हो जाता है।

चालीसा की रचना, रचनाकार एवं पृष्ठभूमि | Author, Origin & Background

हनुमान चालीसा के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं। किंवदंती है कि मुगल सम्राट अकबर ने तुलसीदास जी को कारागार में डाल दिया था। तब तुलसीदास जी ने हनुमान जी की स्तुति में इन 40 पंक्तियों की रचना की। इसके पाठ से कारागार में बंदरों का प्रकोप बढ़ गया, जिससे विवश होकर सम्राट को उन्हें मुक्त करना पड़ा।

चालीसा पाठ विधि एवं नियम | Recitation Method & Vidhi

  • प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • पाठ शुरू करने से पहले श्री राम का स्मरण अवश्य करें।
  • पाठ के दौरान मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें।
  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

एक नजर में चालीसा की जानकारी | Quick Information

विवरण जानकारी
चालीसा का नामश्री हनुमान चालीसा
आराध्य देवश्री हनुमान जी
रचनाकारगोस्वामी तुलसीदास
भाषाअवधी
मुख्य विषयभक्ति, शक्ति और सेवा
विशेष अवसरमंगलवार, शनिवार, संकट निवारण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हनुमान चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त और मंगलवार/शनिवार की संध्या को विशेष शुभ माना जाता है।

जी हाँ, भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है। महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री गोस्वामी तुलसीदास कृत 'हनुमान चालीसा' के पारंपरिक पाठ और भक्ति ग्रंथों के आधार पर तैयार की गई है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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